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भारत को ईरान की बड़ी राहत, होर्मुज से गुजरेंगे जहाज

Kavita2
4 Nov 2026 5:14 PM IST
भारत को ईरान की बड़ी राहत, होर्मुज से गुजरेंगे जहाज
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नई दिल्ली/तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री व्यापार पर बढ़ते खतरे के बीच भारत के लिए ईरान से राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि भारतीय जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में लागू पारगमन प्रतिबंधों से छूट दी गई है। भारतीय जहाजों के अलावा चीन, इराक और कतर के जहाजों को भी इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई है। ईरान के इस बयान को अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अहमद हयात-मोघद्दम ने मंगलवार, 3 नवंबर को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ईरान ने चार देशों के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य में लागू प्रतिबंधों से अलग रखा है। इन देशों में भारत, चीन, इराक और कतर शामिल हैं।

ईरानी सांसद ने देश की आर्थिक और सुरक्षा परिस्थितियों पर चर्चा के दौरान कहा कि इन चार देशों के जहाजों को ईरान की ओर से पारगमन की अनुमति है। उनके अनुसार, इन देशों के जहाज जलमार्ग का इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी पक्ष की ओर से इन जहाजों को रोका नहीं जा रहा है।

ईरान के इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू भारत को दी गई विशेष छूट है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। खाड़ी देशों से आने वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। ऐसे में इस रास्ते से भारतीय जहाजों को गुजरने की अनुमति मिलने से व्यापारिक गतिविधियों में आने वाली बाधाओं को कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, ईरान की ओर से प्रतिबंधों में छूट दिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि क्षेत्र में समुद्री यातायात से जुड़े सभी खतरे समाप्त हो गए हैं। पश्चिम एशिया में तनाव, जहाजों की सुरक्षा, समुद्री बीमा की लागत और परिवहन संबंधी जोखिम अब भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।

अहमद हयात-मोघद्दम ने भारत को छूट देने के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण भी बताया। उनके मुताबिक, ईरान भारत से दवाओं का आयात सुनिश्चित करना चाहता है। इसी उद्देश्य से भारतीय जहाजों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाया गया है।

भारत दवा निर्माण और निर्यात के क्षेत्र में विश्व के प्रमुख देशों में शामिल है। भारतीय कंपनियों की दवाएं कई देशों में भेजी जाती हैं। ईरान के लिए भी चिकित्सा सामग्री और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। इस कारण समुद्री परिवहन को जारी रखना दोनों देशों के हित में माना जा रहा है।

ईरानी सांसद के बयान से यह भी स्पष्ट हुआ कि चारों देशों को छूट देने के पीछे अलग-अलग रणनीतिक और आर्थिक कारण हैं। उन्होंने कहा कि चीन के जहाजों को मिली छूट का संबंध ईरान के लिए बीजिंग के राजनीतिक समर्थन से है। ईरान और चीन के बीच लंबे समय से आर्थिक तथा रणनीतिक संबंध रहे हैं।

वहीं, कतर को मिली छूट भी क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है। कतर पश्चिम एशिया की राजनीति में कई अवसरों पर मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। ईरान के साथ उसके संबंध क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग के लिहाज से अहम माने जाते हैं।

ईरानी सांसद के मुताबिक, भारतीय और चीनी जहाजों से पारगमन शुल्क लिया जा रहा है। वहीं, कतर के जहाजों को बिना शुल्क गुजरने की अनुमति दी गई है। इराक के जहाजों से शुल्क वसूला जा रहा है या नहीं, इस बारे में उन्होंने स्पष्ट जानकारी नहीं दी।

इस प्रकार चार देशों को प्रतिबंधों से छूट मिलने के बावजूद शुल्क संबंधी व्यवस्थाएं एक जैसी नहीं हैं। इसलिए भारतीय जहाजों को पारगमन की अनुमति मिलने और पूरी तरह शुल्क-मुक्त आवाजाही के बीच अंतर समझना जरूरी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में गिना जाता है। यह ईरान और ओमान के बीच स्थित है तथा फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। इस रास्ते से खाड़ी क्षेत्र के कई देशों का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है।

इस समुद्री मार्ग पर किसी भी प्रकार की बाधा का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहता। तेल और गैस की अंतरराष्ट्रीय कीमतों, माल ढुलाई, बीमा प्रीमियम तथा वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।

भारत के संदर्भ में होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि देश अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। खाड़ी क्षेत्र से होने वाले ऊर्जा आयात के लिए यह मार्ग महत्वपूर्ण है। यदि यहां लंबे समय तक जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो भारतीय आयातकों को वैकल्पिक व्यवस्थाओं और परिवहन लागत से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव ने इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बना दिया है। क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ने और व्यापारिक जहाजों को लेकर अनिश्चितता पैदा होने से वैश्विक बाजार भी प्रभावित हो सकते हैं।

ऐसे माहौल में ईरान की ओर से भारत सहित चार देशों को विशेष छूट देने का बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इस व्यवस्था के व्यावहारिक प्रभाव का आकलन जहाजों की वास्तविक आवाजाही, सुरक्षा परिस्थितियों और संबंधित देशों की आधिकारिक व्यवस्थाओं के आधार पर ही किया जा सकेगा।

भारत और ईरान के संबंध केवल ऊर्जा व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच दवा, कृषि उत्पाद, परिवहन और क्षेत्रीय संपर्क जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग की संभावनाएं रही हैं। ऐसे में भारतीय जहाजों को मार्ग उपलब्ध कराने का ईरानी फैसला दोनों देशों के आर्थिक हितों से भी जुड़ा हुआ दिखाई देता है।

फिलहाल ईरान के वरिष्ठ सांसद के बयान से यह संकेत मिला है कि तेहरान कुछ देशों के साथ समुद्री व्यापार जारी रखने के पक्ष में है। भारत के लिए यह घोषणा राहत का संकेत जरूर है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध व्यापार के लिए क्षेत्रीय तनाव में कमी आना भी आवश्यक होगा।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान की घोषित छूट किस प्रकार लागू होती है और इससे भारतीय जहाजों, आयातकों तथा ऊर्जा आपूर्ति को कितनी व्यावहारिक राहत मिलती है।

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