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भारत में दाल का बाजार तलाशने पहुंचे मोंटाना गवर्नर, अमेरिका में MAGA समर्थकों ने उठाए सवाल

नई दिल्ली। अमेरिका के मोंटाना राज्य के गवर्नर ग्रेग जियानफोर्ट इन दिनों भारत के दौरे पर हैं। उनके इस दौरे का मुख्य उद्देश्य मोंटाना के किसानों के लिए भारत जैसे बड़े बाजार में दाल, मसूर, चना और मटर की बिक्री बढ़ाना है। लेकिन भारत के साथ कृषि व्यापार बढ़ाने की यह कोशिश अमेरिका की घरेलू राजनीति में बहस का विषय बन गई है। खासकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक MAGA गुट के एक हिस्से ने जियानफोर्ट के भारत दौरे और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर उनके जोर को लेकर सवाल उठाए हैं।
मोंटाना अमेरिका में पल्स क्रॉप यानी दालों का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। राज्य सरकार के अनुसार मोंटाना अमेरिकी स्तर पर दाल उत्पादन में शीर्ष पर है और भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल उपभोक्ता और आयातक देश है। ऐसे में मोंटाना सरकार भारत को अपने किसानों के लिए दीर्घकालिक और स्थिर बाजार के रूप में देख रही है।
मोंटाना सरकार ने भारत के लिए यह पहला आधिकारिक व्यापार मिशन शुरू किया है। गवर्नर जियानफोर्ट के नेतृत्व में 30 से अधिक लोगों का प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंचा है। इसमें कृषि के साथ-साथ उच्च शिक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स, मैन्युफैक्चरिंग, फोटोनिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और बायोसाइंस क्षेत्र के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। दौरे का अगला चरण श्रीलंका में भी निर्धारित है।
भारत पहुंचने के बाद जियानफोर्ट ने नई दिल्ली में भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधियों और उद्योग संगठनों के साथ बैठकें कीं। उन्होंने मोंटाना को व्यापार, तकनीक और कृषि के क्षेत्र में भरोसेमंद अमेरिकी भागीदार के रूप में पेश किया। भारतीय कंपनियों के साथ अमेरिकी बाजार में निवेश और विस्तार की संभावनाओं पर भी बातचीत हुई।
मोंटाना के लिए कृषि इस दौरे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राज्य के कृषि निदेशक जिलियन स्ट्रेट ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों का विस्तार मोंटाना के किसानों के लिए स्थिर और दीर्घकालिक मांग सुनिश्चित करने में मदद कर सकता है। भारत जैसे बड़े बाजार में दालों की खपत को देखते हुए राज्य सरकार यहां निर्यात बढ़ाने पर जोर दे रही है।
आंकड़ों के अनुसार 2025 में भारत मोंटाना का 29वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। भारत ने उस वर्ष मोंटाना से मटर, मसूर, चना और विमान के पुर्जों सहित 1.4 करोड़ डॉलर से अधिक का सामान खरीदा। अब राज्य सरकार इस व्यापार को कई गुना बढ़ाने की संभावना तलाश रही है।
इस प्रयास के पीछे भारत का विशाल उपभोक्ता बाजार सबसे बड़ा कारण है। भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक होने के साथ सबसे बड़ा उपभोक्ता और आयातक भी है। कमजोर मानसून और घरेलू मांग के कारण भारत समय-समय पर अलग-अलग दालों के आयात को बढ़ाता है। हाल में भारत सरकार कुछ दालों पर आयात शुल्क घटाने पर भी विचार कर रही है, जिससे अमेरिकी उत्पादकों के लिए संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
हालांकि चना और कुछ अन्य कृषि उत्पाद भारत के लिए संवेदनशील क्षेत्र भी हैं। भारत अपने घरेलू किसानों की सुरक्षा को लेकर सावधानी बरतता है और अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ता में कृषि बाजार की पहुंच प्रमुख विवादित मुद्दों में शामिल है। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते की बातचीत फिलहाल अंतिम चरण में बताई जा रही है, लेकिन कृषि सहित कई मुद्दों पर सहमति अभी बाकी है।
इसी बीच जियानफोर्ट के दौरे को अमेरिका में राजनीतिक रंग भी मिल गया है। MAGA समर्थकों के एक हिस्से ने सोशल मीडिया पर इस यात्रा की आलोचना की है। आलोचकों का तर्क है कि अमेरिकी नेताओं को घरेलू आर्थिक मुद्दों और अमेरिकी कामगारों पर अधिक ध्यान देना चाहिए, जबकि जियानफोर्ट भारत जैसे देशों में व्यापार और निवेश के अवसर तलाश रहे हैं।
यह विरोध केवल दाल कारोबार तक सीमित नहीं है। जियानफोर्ट का तकनीकी कंपनियों और भारत के साथ उच्च तकनीकी सहयोग से पुराना जुड़ाव भी MAGA समर्थकों के एक हिस्से की आलोचना का कारण बना है। जियानफोर्ट स्वयं तकनीकी क्षेत्र से आए हैं और उनकी यात्रा में क्वांटम टेक्नोलॉजी, फोटोनिक्स और बायोसाइंस जैसे क्षेत्रों पर भी चर्चा हो रही है।
मोंटाना प्रशासन का तर्क इससे अलग है। उसके अनुसार विदेशों में नए बाजार खोलना सीधे अमेरिकी किसानों और व्यवसायों के हित में है। यदि भारत में मोंटाना की दालों की मांग बढ़ती है, तो राज्य के किसानों को स्थिर खरीदार मिल सकते हैं और कृषि क्षेत्र की आय में सुधार हो सकता है।
गवर्नर जियानफोर्ट ने कहा है कि मोंटाना विश्वस्तरीय उत्पाद तैयार करता है और भारत जैसे तेजी से बढ़ते बाजार में व्यापारिक साझेदारी विकसित करना राज्य के लिए लाभकारी होगा। उन्होंने भारत को मोंटाना के साथ गुणवत्ता, नवाचार और व्यापारिक सहयोग बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण साझेदार बताया।
भारत दौरे के दौरान जियानफोर्ट और उनकी पत्नी सुसान जियानफोर्ट ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी दी। गवर्नर ने गांधी के सत्य और अहिंसा के संदेश का उल्लेख करते हुए भारत के साथ संबंध मजबूत करने की बात कही।
भारत और अमेरिका के बीच मौजूदा व्यापारिक संबंधों की पृष्ठभूमि में यह दौरा और भी अहम हो जाता है। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है, लेकिन शुल्क, कृषि उत्पादों की बाजार पहुंच और अन्य नीतिगत मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।
मोंटाना के लिए भारत केवल दालों का बाजार नहीं है। राज्य सरकार भारतीय कंपनियों से निवेश, उच्च शिक्षा सहयोग, अनुसंधान और तकनीकी साझेदारी की संभावनाएं भी तलाश रही है। नई दिल्ली में जियानफोर्ट ने उन भारतीय कंपनियों से भी मुलाकात की जो अमेरिका में विस्तार की संभावनाएं देख रही हैं।
फिलहाल गवर्नर जियानफोर्ट का ‘मिशन इंडिया’ दो अलग तस्वीरें पेश कर रहा है। एक तरफ मोंटाना के किसान भारत के विशाल दाल बाजार तक पहुंच बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं, दूसरी ओर अमेरिका में MAGA समर्थकों का एक हिस्सा इस पहल पर राजनीतिक सवाल उठा रहा है।
आने वाले समय में इस दौरे की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि मोंटाना को भारत में दालों और अन्य उत्पादों के लिए कितना अतिरिक्त बाजार मिलता है। लेकिन फिलहाल इतना साफ है कि मसूर, चना और मटर का कारोबार भी अमेरिका की घरेलू राजनीति में बहस का नया मुद्दा बन गया है।





