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PM मोदी ने शिक्षकों से पूछा कैसे जिंदा रखें बच्चों का बचपन

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित अपने आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर ‘नेशनल टीचर्स अवॉर्ड’ से सम्मानित शिक्षकों की मेजबानी की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने पुरस्कार विजेता शिक्षकों से खुलकर बातचीत की और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर उनके अनुभव जाने। चर्चा में पढ़ाने के नए और रोचक तरीके, बच्चों की स्क्रीन पर बढ़ती निर्भरता, पब्लिक स्पीकिंग, नशीली दवाओं के दुरुपयोग से बचाव और बच्चों के भीतर ‘बचपन को जिंदा रखने’ जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल रहे।
#TeachersDay is about appreciating the strong contribution of teachers to our society. It is also a day to pay homage to Dr. S. Radhakrishnan.
— Narendra Modi (@narendramodi) September 5, 2026
Here is what happened when the National Teachers' Awards winners were invited to 7, LKM yesterday…. pic.twitter.com/LtXTvHiQoQ
प्रधानमंत्री और शिक्षकों के बीच बातचीत औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रही। कई मुद्दों पर हल्के-फुल्के अंदाज में चर्चा हुई, लेकिन इसके जरिए बच्चों और शिक्षा से जुड़ी गंभीर चुनौतियों पर भी ध्यान आकर्षित किया गया। प्रधानमंत्री ने शिक्षकों के अनुभवों को सुना और विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में उनकी भूमिका के महत्व को रेखांकित किया।
पढ़ाई को रोचक बनाने पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने पुरस्कार विजेता शिक्षकों के साथ शिक्षण के नए तरीकों पर चर्चा की। बदलते दौर में केवल किताबों और पारंपरिक कक्षा शिक्षण तक सीमित रहने के बजाय विद्यार्थियों को विषयों से जोड़ने के लिए नए प्रयोगों की आवश्यकता पर बातचीत हुई।
आज के दौर में बच्चों के पास जानकारी हासिल करने के कई डिजिटल माध्यम उपलब्ध हैं। ऐसे में शिक्षकों के सामने चुनौती है कि वे कक्षा को इतना रोचक और संवादात्मक बनाएं कि विद्यार्थी पढ़ाई में सक्रिय भागीदारी करें।
नेशनल टीचर्स अवॉर्ड पाने वाले कई शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में नवाचार और अलग-अलग शिक्षण प्रयोगों के लिए पहचाने गए हैं। प्रधानमंत्री ने उनके अनुभवों और प्रयासों को समझने में रुचि दिखाई।
स्क्रीन की लत पर हुई अहम बातचीत
प्रधानमंत्री और शिक्षकों के बीच बच्चों में बढ़ती स्क्रीन की लत पर भी चर्चा हुई। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, वीडियो और डिजिटल मनोरंजन की बढ़ती उपलब्धता ने बच्चों की दिनचर्या में बड़ा बदलाव किया है।
डिजिटल तकनीक पढ़ाई और जानकारी हासिल करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनी है, लेकिन इसका अत्यधिक इस्तेमाल चिंता का कारण भी बन सकता है।
ऐसे में बच्चों के बीच तकनीक के संतुलित इस्तेमाल को बढ़ावा देने में माता-पिता के साथ शिक्षकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी गई।
‘बचपन को जिंदा रखने’ की जरूरत
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों के भीतर ‘बचपन को जिंदा रखने’ की जरूरत जैसे विषय पर भी चर्चा की।
प्रतिस्पर्धा और पढ़ाई के बढ़ते दबाव के बीच बच्चों के खेल, रचनात्मक गतिविधियों और स्वाभाविक जिज्ञासा के लिए पर्याप्त अवसर बनाए रखना महत्वपूर्ण है। बच्चों की शिक्षा केवल परीक्षा और अंकों तक सीमित न रहे बल्कि उनके संपूर्ण व्यक्तित्व के विकास का माध्यम बने, इस दिशा में शिक्षकों की भूमिका बेहद अहम है।
स्कूल बच्चों के जीवन का बड़ा हिस्सा होता है। इसलिए कक्षा और स्कूल का वातावरण ऐसा होना चाहिए जहां विद्यार्थी बिना अनावश्यक दबाव के सीख सकें और अपनी प्रतिभा को सामने ला सकें।
पब्लिक स्पीकिंग पर भी हुई चर्चा
प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से पब्लिक स्पीकिंग यानी सार्वजनिक रूप से अपनी बात प्रभावी तरीके से रखने की क्षमता पर भी चर्चा की।
विद्यार्थियों में आत्मविश्वास विकसित करने और उन्हें अपनी बात स्पष्ट रूप से रखने के लिए तैयार करने में स्कूलों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
वाद-विवाद, भाषण, समूह चर्चा और अन्य गतिविधियां बच्चों में संवाद कौशल विकसित करने में मददगार हो सकती हैं। बदलते रोजगार और सामाजिक परिवेश में अच्छी कम्युनिकेशन स्किल को भी विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
नशीली दवाओं के दुरुपयोग पर चिंता
प्रधानमंत्री मोदी और शिक्षकों की बातचीत में नशीली दवाओं के दुरुपयोग का विषय भी सामने आया। युवाओं और विद्यार्थियों को नशे से बचाना समाज के सामने बड़ी चुनौतियों में से एक है।
स्कूलों और शिक्षकों की भूमिका केवल नशे के नुकसान बताने तक सीमित नहीं रहती। विद्यार्थियों के व्यवहार में बदलाव को पहचानना, उन्हें सही मार्गदर्शन देना और जरूरत पड़ने पर परिवार को सतर्क करना भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
इस दिशा में जागरूकता और बच्चों के साथ लगातार संवाद को प्रभावी माध्यम माना जाता है।
शिक्षकों से सीधे जाने अनुभव
प्रधानमंत्री ने पुरस्कार विजेता शिक्षकों से उनके स्कूलों, विद्यार्थियों और शिक्षण पद्धतियों से जुड़े अनुभव भी जाने।
देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले शिक्षक विभिन्न सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियों में काम करते हैं। कहीं सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई कराई जाती है तो कहीं आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।
ऐसे शिक्षकों के अनुभव शिक्षा व्यवस्था में नई सोच और बेहतर प्रयोगों के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
शिक्षक सिर्फ पढ़ाने तक सीमित नहीं
शिक्षक की भूमिका विद्यार्थी को पाठ्यक्रम पढ़ाने से कहीं व्यापक है। बच्चे स्कूल में ज्ञान हासिल करने के साथ अनुशासन, सामाजिक व्यवहार, नेतृत्व और जिम्मेदारी जैसे गुण भी सीखते हैं।
शिक्षक विद्यार्थियों की प्रतिभा पहचानने और उनकी कमजोरियों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि एक अच्छे शिक्षक का प्रभाव विद्यार्थी के जीवन में लंबे समय तक बना रहता है।
प्रधानमंत्री और पुरस्कार विजेता शिक्षकों की बातचीत में शिक्षा के इसी व्यापक स्वरूप की झलक देखने को मिली।
नई तकनीक के साथ संतुलन जरूरी
डिजिटल दौर में शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। स्मार्ट क्लास, ऑनलाइन सामग्री और डिजिटल प्लेटफॉर्म विद्यार्थियों को सीखने के नए अवसर दे रहे हैं।
हालांकि तकनीक का इस्तेमाल कितना और किस तरह किया जाए, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है। स्क्रीन की लत पर हुई चर्चा इसी चुनौती से जुड़ी रही।
शिक्षकों के सामने अब तकनीक का सकारात्मक उपयोग करते हुए विद्यार्थियों को वास्तविक दुनिया की गतिविधियों, खेल, किताबों और सामाजिक संवाद से भी जोड़े रखने की जिम्मेदारी है।
नेशनल टीचर्स अवॉर्ड विजेताओं के लिए खास अवसर
राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान हासिल करने वाले शिक्षकों के लिए प्रधानमंत्री से मुलाकात विशेष अवसर रही। पुरस्कार उनके शिक्षण कार्य, नवाचार और विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयासों को मिली पहचान है।
प्रधानमंत्री के साथ बातचीत के दौरान उन्हें अपने अनुभव साझा करने और शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार रखने का अवसर मिला।
यह संवाद शिक्षा व्यवस्था में शिक्षक की केंद्रीय भूमिका को भी सामने लाता है।
शिक्षा के साथ व्यक्तित्व निर्माण पर फोकस
प्रधानमंत्री की शिक्षकों के साथ बातचीत का दायरा पाठ्यक्रम और कक्षा से आगे बढ़कर बच्चों के संपूर्ण विकास तक रहा। पब्लिक स्पीकिंग से लेकर नशे के खिलाफ जागरूकता और स्क्रीन की लत से लेकर बचपन को सुरक्षित रखने तक कई विषयों पर चर्चा हुई।
इन विषयों का सीधा संबंध विद्यार्थियों के मानसिक, सामाजिक और व्यक्तिगत विकास से है।
प्रधानमंत्री मोदी और नेशनल टीचर्स अवॉर्ड विजेताओं के बीच हुई यह मुलाकात इस संदेश के साथ महत्वपूर्ण रही कि बदलते दौर में शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक हासिल करना नहीं बल्कि आत्मविश्वासी, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक तैयार करना भी है।





