दिल्ली-एनसीआर

CJP की फंडिंग पर सियासी तूफान, महुआ मोइत्रा ने उठाए सवाल

Ratna Netam
5 Nov 2026 4:21 PM IST
CJP की फंडिंग पर सियासी तूफान, महुआ मोइत्रा ने उठाए सवाल
x
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को कथित तौर पर भारत-विरोधी संगठनों और विदेशी गैर-सरकारी संस्थाओं (NGO) से आर्थिक सहायता मिलने के आरोपों को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के आरोपों पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पलटवार करते हुए दावा किया कि सीजेपी को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ही फंडिंग कर रही है। उनके इस बयान के बाद विदेशी फंडिंग, राजनीतिक आंदोलनों और उनके पीछे आर्थिक सहयोग के स्रोतों को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। हालांकि, दोनों पक्षों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।दरअसल, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सीजेपी से जुड़े कुछ प्रमुख व्यक्तियों पर भारत के बाहर स्थित संगठनों और कथित भारत-विरोधी तत्वों से आर्थिक सहायता प्राप्त करने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया कि देश में सरकार के खिलाफ चलाए जा रहे कुछ अभियानों को विदेशी स्रोतों से आर्थिक मदद मिल रही है।जितेंद्र सिंह के इन आरोपों पर महुआ मोइत्रा ने सवाल उठाते हुए भाजपा पर ही सीजेपी को आर्थिक सहयोग देने का आरोप लगाया। इस बयान ने पहले से जारी राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया है।
जितेंद्र सिंह ने लगाए विदेशी फंडिंग के आरोप
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके और सह-संस्थापक आशुतोष रांका का नाम लेते हुए कथित विदेशी आर्थिक सहायता का मुद्दा उठाया।उन्होंने आरोप लगाया कि अभिजीत दिपके को अमेरिका स्थित दानदाताओं से आर्थिक सहयोग मिल रहा है, जबकि आशुतोष रांका को पाकिस्तानी राजनीतिक व्यक्तियों और अन्य संपर्कों से सहायता मिलने की आशंका है।जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि उनके पास ऐसे आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विदेशों से वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले कुछ संगठन भारत में सरकार-विरोधी माहौल तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं।हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में किसी अंतिम जांच निष्कर्ष या न्यायिक फैसले की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है। इसलिए इन्हें केंद्रीय मंत्री के आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
महुआ मोइत्रा ने भाजपा पर किया पलटवार
तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने जितेंद्र सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पर निशाना साधा।उन्होंने आरोप लगाया कि जिस संगठन की फंडिंग को लेकर भाजपा सवाल उठा रही है, उसे आर्थिक सहयोग देने के पीछे भाजपा का ही हाथ है।महुआ मोइत्रा की प्रतिक्रिया ने विवाद को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। अब सवाल केवल विदेशी फंडिंग के आरोपों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक संगठनों और अभियानों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की पारदर्शिता पर भी चर्चा शुरू हो गई है।हालांकि, महुआ मोइत्रा ने अपने दावे के समर्थन में कौन से वित्तीय दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।ऐसे में उनके बयान को भी एक राजनीतिक आरोप के रूप में देखा जा रहा है।
क्या है कॉकरोच जनता पार्टी?
कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक और सामाजिक अभियान से जुड़ा संगठन है, जिसने युवाओं तथा विभिन्न सार्वजनिक मुद्दों पर विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से अपनी पहचान बनाई है।यह संगठन चुनावी प्रक्रियाओं, युवाओं की समस्याओं, शिक्षा व्यवस्था और सरकारी जवाबदेही जैसे विषयों पर सवाल उठाता रहा है।इसके संस्थापक अभिजीत दिपके और सह-संस्थापक आशुतोष रांका विभिन्न राजनीतिक विवादों के कारण चर्चा में रहे हैं।सीजेपी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी व्यवस्था से संबंधित मुद्दों पर भी विरोध जताया है। संगठन की गतिविधियों और आंदोलनों को लेकर सत्तापक्ष तथा विपक्ष के नेताओं के बीच पहले भी आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं।
सीजेपी ने भी दिया आरोपों का जवाब
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के आरोपों के बाद सीजेपी की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।संगठन से जुड़े आशुतोष रांका ने विदेशी फंडिंग के आरोपों पर सरकार का विरोध करते हुए कई सवाल उठाए हैं।सीजेपी ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर भाजपा नेताओं के रुख की आलोचना की है। संगठन का कहना है कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है।संगठन ने यह भी सवाल उठाया कि जनता की समस्याओं और सरकारी नीतियों के विरोध को विदेशी प्रभाव से जोड़ने का आधार क्या है।सीजेपी की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि वह इन आरोपों को स्वीकार करने के बजाय सरकार से उनके समर्थन में साक्ष्य पेश करने की अपेक्षा कर रहा है।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी उठाए सवाल
सीजेपी की कथित विदेशी फंडिंग को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने भी भाजपा से सबूत मांगे हैं।कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने विदेशी फंडिंग संबंधी आरोपों पर सवाल उठाते हुए उनके आधार को स्पष्ट करने की मांग की।विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि किसी संगठन को अवैध विदेशी सहायता मिलने के प्रमाण हैं, तो संबंधित एजेंसियों को कानून के अनुसार जांच करनी चाहिए।दूसरी ओर, भाजपा नेताओं का आरोप है कि कुछ संगठन विदेशी सहायता के माध्यम से देश में सरकार-विरोधी अभियान चलाने का प्रयास कर रहे हैं।इस तरह विवाद अब केवल सीजेपी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक आंदोलनों की फंडिंग और उसकी पारदर्शिता का व्यापक मुद्दा बन गया है।
विदेशी फंडिंग पर क्यों उठ रहे सवाल?
भारत में विदेशी आर्थिक सहायता प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के तहत विदेशी योगदान प्राप्त करने और उसके इस्तेमाल से संबंधित नियम निर्धारित हैं।इन नियमों का उद्देश्य विदेशी आर्थिक सहायता के स्रोतों और उसके उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।हालांकि, किसी संगठन को विदेशी सहायता मिलने का आरोप लगना अपने आप में कानून के उल्लंघन का प्रमाण नहीं होता। यह निर्धारित करने के लिए वित्तीय रिकॉर्ड, लेनदेन और संबंधित कानूनी प्रावधानों की जांच आवश्यक है।सीजेपी से जुड़े मामले में भी आरोपों की सत्यता का निर्धारण प्रमाणों और सक्षम जांच एजेंसियों के निष्कर्षों के आधार पर ही किया जा सकता है।
राजनीतिक आंदोलनों पर बढ़ी बहस
सीजेपी की गतिविधियों को लेकर पिछले कुछ महीनों से राजनीतिक बयानबाजी होती रही है।संगठन ने विभिन्न मुद्दों पर प्रदर्शन आयोजित किए हैं और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।इस बीच भाजपा के कुछ नेताओं ने इन विरोध प्रदर्शनों के पीछे विदेशी प्रभाव होने की आशंका जताई है।विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन करना और सरकार की आलोचना करना नागरिकों का अधिकार है।ऐसे में यह विवाद राजनीतिक असहमति, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों से भी जुड़ गया है।
अब सबकी नजरें आरोपों के सबूतों पर
महुआ मोइत्रा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल आर्थिक सहायता के वास्तविक स्रोतों को लेकर है।जितेंद्र सिंह ने जहां विदेशी संगठनों और पाकिस्तानी संपर्कों से फंडिंग मिलने का आरोप लगाया है, वहीं महुआ मोइत्रा ने भाजपा पर ही आर्थिक सहयोग देने का दावा किया है।फिलहाल इन परस्पर विरोधी दावों के संबंध में कोई स्वतंत्र और निर्णायक प्रमाण सार्वजनिक रूप से स्थापित नहीं हुआ है।ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित पक्ष अपने दावों के समर्थन में क्या दस्तावेज सामने रखते हैं और क्या किसी सक्षम एजेंसी की जांच से फंडिंग के वास्तविक स्रोत स्पष्ट होते हैं।
Next Story