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HIV पीड़ित युवक की मौत पर बवाल, पुलिस हिरासत में पिटाई का आरोप

दक्षिणी दिल्ली: महरौली इलाके में एचआईवी संक्रमित 21 वर्षीय युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद हंगामा खड़ा हो गया। युवक की मौत के बाद उसके परिजनों ने पुलिस पर हिरासत में मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाया और सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। वहीं, पुलिस ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा है कि युवक पहले से ही गंभीर बीमारियों से पीड़ित था और उसके शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं मिले हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
जानकारी के अनुसार, युवक अपने परिवार के साथ महरौली इलाके में रहता था और एक सैलून में काम करता था। परिवार के मुताबिक, महरौली थाना पुलिस इलाके को नशा मुक्त बनाने के लिए अभियान चला रही थी। इसी अभियान के तहत 14 जुलाई को पुलिस ने युवक और उसके भाई को हिरासत में लिया था।
परिजनों का आरोप है कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मियों ने युवक और उसके भाई के साथ मारपीट की। परिवार का कहना है कि युवक पहले से ही एचआईवी और टीबी जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित था। कथित पिटाई के बाद उसकी हालत बिगड़ गई, जिसके बाद पुलिस उसे घर छोड़ गई।
परिजनों के अनुसार, 17 जुलाई को युवक की तबीयत ज्यादा खराब हो गई। इसके बाद उसे इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए वेंटिलेटर पर रखा। इलाज के दौरान शुक्रवार को उसकी मौत हो गई।
युवक की मौत की खबर मिलने के बाद परिवार के लोगों और स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। परिजनों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सड़क जाम कर दिया और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और परिवार को मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया।
पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को शांत कराया और युवक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस के अनुसार, पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड द्वारा कराया जाएगा, ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, युवक और उसके भाई को नशा विरोधी अभियान के दौरान हिरासत में लिया गया था। पुलिस का कहना है कि युवक के खिलाफ कोई गंभीर कार्रवाई नहीं की गई थी। उसके भाई के खिलाफ 7/51 के तहत कलंदरा बनाकर कार्रवाई की गई थी।
दिल्ली पुलिस ने परिवार के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि युवक के शरीर पर किसी तरह के चोट के निशान नहीं मिले हैं। पुलिस के मुताबिक, युवक पहले से ही एचआईवी और टीबी जैसी बीमारियों से जूझ रहा था, जिसके कारण उसकी हालत बिगड़ी और उसकी मौत हुई।
हालांकि, परिवार पुलिस के इस दावे से संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि युवक की मौत से पहले उसकी हालत ठीक थी और हिरासत के बाद उसकी तबीयत खराब हुई। परिवार ने मांग की है कि मामले की गहन जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अब मेडिकल रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि युवक की मौत बीमारी के कारण हुई या किसी अन्य वजह से। फिलहाल पुलिस और परिवार दोनों अपने-अपने दावों पर कायम हैं।





