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नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर को सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन शनमुगरत्नम और प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग से मुलाकात की। इन बैठकों में भारत और सिंगापुर के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने, आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और निवेश की नई संभावनाओं पर चर्चा हुई। वित्त मंत्री की तीन दिवसीय यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देश अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत वित्त, प्रौद्योगिकी और कारोबार से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। सीतारमण 9 से 11 अक्टूबर तक सिंगापुर के आधिकारिक दौरे पर हैं।
राष्ट्रपति थर्मन शनमुगरत्नम से सीतारमण की मुलाकात सिंगापुर के राष्ट्रपति भवन ‘द इस्ताना’ में हुई। वित्त मंत्रालय के अनुसार, बैठक में व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे ले जाने और द्विपक्षीय सहयोग को अधिक मजबूत बनाने पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। दोनों देशों के बीच स्थापित राजनीतिक संबंधों के साथ आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाना इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य है। राष्ट्रपति से हुई बातचीत ने उच्च स्तर पर जारी संवाद को आगे बढ़ाने का अवसर दिया।
प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग के साथ बैठक में वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम और मौजूदा ऊर्जा संकट पर भी बातचीत हुई। वोंग ने सोशल मीडिया पर बताया कि सीतारमण ने भारत में हो रहे विकास तथा निवेश और सहयोग के नए अवसरों की जानकारी साझा की। इस चर्चा में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने का विषय शामिल रहा। ऊर्जा और वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों के साथ भारत में उपलब्ध कारोबारी संभावनाओं पर संवाद इस मुलाकात का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
वित्त मंत्रालय की जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री के साथ बातचीत में आर्थिक, वित्तीय, निवेश और कारोबारी संबंधों को मजबूत करने के उपायों पर विचार हुआ। सीतारमण ने राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष यानी एनआईआईएफ से जुड़ी चुनिंदा परियोजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था के मजबूत आधार का उल्लेख करते हुए सिंगापुर स्थित निवेशकों को अधिक निवेश के लिए प्रोत्साहित किया। बैठक में चौथे भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज संवाद के परिणामों को आगे बढ़ाने की प्रगति भी देखी गई।
इस दौरान पूंजी बाजार, भुगतान प्रणालियों की कनेक्टिविटी, डिजिटलीकरण, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा में सहयोग पर चर्चा हुई। वित्तीय परिसंपत्तियों के टोकनाइजेशन और केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा जैसे उभरते विषय भी बातचीत में शामिल रहे। सिंगापुर ने परिसंपत्तियों के टोकनाइजेशन से संबंधित अपने अनुभव साझा करने में रुचि दिखाई। इसके अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम तथा भारत-आसियान सहयोग को मजबूत करने पर विचार हुआ। यह चर्चा 2027 में सिंगापुर की आसियान अध्यक्षता की तैयारी के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण रही।
सीतारमण ने सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालकृष्णन से भी मुलाकात की। बातचीत में भू-राजनीतिक परिस्थितियों और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का वित्तीय बाजारों पर असर शामिल रहा। भारत की आर्थिक स्थिति, विकास, विदेशी निवेश और जारी नीतिगत सुधारों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। बालकृष्णन ने भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं में सिंगापुर की कंपनियों की भागीदारी के अवसरों का उल्लेख किया। उन्होंने वित्त मंत्री की यात्रा के उपयोगी रहने की कामना भी की।
इस दौरे में राजनीतिक नेतृत्व से बातचीत के साथ निवेश समुदाय से सीधे संवाद का कार्यक्रम भी रखा गया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, सीतारमण हेज फंड और पोर्टफोलियो फंड प्रबंधकों के साथ गोलमेज बैठक में भाग लेंगी। सरकार और कारोबार जगत के बीच बैठकों के जरिए भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दिशा, निवेश अवसरों और बदलते अंतरराष्ट्रीय वित्तीय परिदृश्य पर चर्चा की जाएगी। इन संवादों का उद्देश्य निवेशकों के साथ संपर्क बढ़ाना और कारोबारी साझेदारी की संभावनाओं को आगे ले जाना है।
वित्त मंत्री के कार्यक्रम में प्रमुख वित्तीय संस्थानों, निवेश कंपनियों और स्वास्थ्य सेवा कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों से अलग-अलग मुलाकातें भी शामिल हैं। इनमें जीआईसी, टेमासेक, डीबीएस बैंक, स्टैंडर्ड चार्टर्ड, ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट और आईएचएच हेल्थकेयर जैसे संस्थान शामिल हैं। इसके अलावा एमयूएफजी, बी कैपिटल, एचपीएस इन्वेस्टमेंट पार्टनर्स तथा अन्य कारोबारी समूहों के नेतृत्व के साथ संवाद प्रस्तावित है। यात्रा का घोषित एजेंडा व्यापार और निवेश के साथ डिजिटल वित्तीय संपर्क, कराधान, उन्नत विनिर्माण, कौशल विकास और विमानन तक फैला हुआ है।
भारत के लिए सिंगापुर का महत्व उसके बड़े निवेश योगदान से भी स्पष्ट होता है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच सिंगापुर से भारत में लगभग 194.68 अरब अमेरिकी डॉलर का संचयी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया है। इस आधार पर सिंगापुर भारत का सबसे बड़ा एफडीआई स्रोत है। जीआईसी और टेमासेक जैसे सिंगापुर के संस्थागत निवेशकों की भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। इसलिए उच्च स्तरीय बैठकों के साथ निवेशकों से संवाद इस दौरे का अहम पहलू बना हुआ है।
सीतारमण का यह दौरा दोनों देशों के बीच हाल के मंत्रिस्तरीय संवाद की निरंतरता भी दर्शाता है। वह इससे पहले चौथे भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज संवाद के लिए सिंगापुर गई थीं। उस भारतीय प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और राज्य मंत्री जितिन प्रसाद शामिल थे। मौजूदा यात्रा में उसी संवाद के परिणामों को आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मुलाकातों के बाद वित्त मंत्री का कार्यक्रम वैश्विक निवेशकों, कारोबारी नेतृत्व और वित्तीय संस्थानों के साथ बातचीत पर केंद्रित रहेगा।
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