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टेवोल्डे गेब्रेमारियम ने संभाली एयर इंडिया की कमान, CEO और MD के रूप में किया पदभार ग्रहण

नई दिल्ली। टेवोल्डे गेब्रेमारियम ने गुरुवार, 1 अक्टूबर को एयर इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक के रूप में औपचारिक रूप से पदभार संभाल लिया। उनकी नियुक्ति की घोषणा एयर इंडिया ने 5 अगस्त 2026 को की थी। इसके बाद जरूरी नियामकीय प्रक्रियाएं पूरी की गईं और इस सप्ताह उन्हें सुरक्षा मंजूरी भी मिल गई। अब उन्होंने टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयरलाइन की कमान आधिकारिक रूप से संभाल ली है।
गेब्रेमारियम ने कैंपबेल विल्सन की जगह ली है। एयर इंडिया के बोर्ड ने वैश्विक स्तर पर व्यापक चयन प्रक्रिया के बाद उन्हें इस पद के लिए चुना था। कंपनी ने उनकी नियुक्ति की घोषणा करते हुए कहा था कि एयर इंडिया के अगले विकास चरण के लिए बड़े पैमाने पर एयरलाइन संचालन, सुरक्षा, सेवा और लाभप्रद विस्तार का अनुभव रखने वाले नेतृत्व की जरूरत थी।
टेवोल्डे गेब्रेमारियम इससे पहले इथियोपियन एयरलाइंस ग्रुप के CEO रह चुके हैं। उन्होंने वहां एक दशक से ज्यादा समय तक शीर्ष पद पर रहते हुए एयरलाइन के बड़े विस्तार का नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल में इथियोपियन एयरलाइंस का राजस्व कई गुना बढ़ा और उसके बेड़े का आकार भी तेजी से बढ़ा। एयर इंडिया ने नियुक्ति के समय उनके इस अनुभव को अपनी मौजूदा परिवर्तन यात्रा के लिए महत्वपूर्ण बताया था।
एयर इंडिया में पदभार संभालने से पहले गेब्रेमारियम ने कर्मचारियों के साथ अपनी पहली टाउनहॉल बैठक भी की थी। इस बैठक में उन्होंने एयरलाइन के लिए सुरक्षा, परिचालन विश्वसनीयता, लाभप्रदता और अनुशासित विकास को प्राथमिकता बताया। उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि लागत नियंत्रण को कंपनी की कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाना होगा।
गेब्रेमारियम ने साफ संकेत दिया है कि एयर इंडिया के लिए केवल बेड़े का विस्तार पर्याप्त नहीं होगा। कंपनी को राजस्व बढ़ाने, लागत नियंत्रित करने और परिचालन दक्षता सुधारने पर एक साथ काम करना होगा। उनका जोर इस बात पर है कि एयरलाइन का विकास टिकाऊ और वित्तीय रूप से मजबूत हो।
उन्होंने सुरक्षा को अपनी पहली प्राथमिकताओं में रखा है। एयरलाइन के कर्मचारियों के साथ बातचीत में उन्होंने ऐसी कार्य संस्कृति बनाने की जरूरत बताई जिसमें सुरक्षा से जुड़ी किसी भी चिंता को बिना झिझक सामने लाया जा सके। उनका मानना है कि बेहतर सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही यात्रियों का भरोसा मजबूत किया जा सकता है।
परिचालन विश्वसनीयता भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। एयर इंडिया पिछले कुछ वर्षों में अपने नेटवर्क, बेड़े और सेवाओं का तेजी से विस्तार कर रही है। ऐसे में उड़ानों की समयबद्धता, तकनीकी विश्वसनीयता और यात्रियों को बेहतर अनुभव उपलब्ध कराना कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
गेब्रेमारियम ने कर्मचारियों से लागत बचत के नए सुझाव देने की भी बात कही है। एयरलाइन ऐसे कार्यक्रम शुरू करने पर विचार कर रही है जिनके तहत परिचालन खर्च कम करने या दक्षता बढ़ाने वाले सुझाव देने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया जा सके।
उनका पदभार ग्रहण ऐसे समय हुआ है जब एयर इंडिया बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। टाटा समूह के अधिग्रहण के बाद एयरलाइन ने ब्रांड, बेड़े, नेटवर्क और परिचालन संरचना में कई बदलाव किए हैं। विस्तारा का एयर इंडिया में विलय और समूह की अन्य एयरलाइन गतिविधियों का एकीकरण भी इस परिवर्तन का हिस्सा रहा है।
कंपनी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसके लिए लंबी दूरी के रूट, नए विमान, आधुनिक केबिन और बेहतर यात्री सेवाओं पर काम किया जा रहा है। गेब्रेमारियम से उम्मीद की जा रही है कि वह इन योजनाओं को वित्तीय अनुशासन के साथ आगे बढ़ाएंगे।
एयर इंडिया के सामने बाहरी चुनौतियां भी मौजूद हैं। ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव, अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र से जुड़ी पाबंदियां और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता एयरलाइन उद्योग की लागत को प्रभावित करती हैं। भारतीय एयरलाइंस के लिए कुछ अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर लंबी उड़ान अवधि भी परिचालन खर्च बढ़ाती है।
गेब्रेमारियम ऐसे समय में कंपनी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं जब एयर इंडिया को लाभप्रदता की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है। उन्होंने कर्मचारियों के साथ अपनी बातचीत में स्पष्ट किया था कि कंपनी को राजस्व और खर्च दोनों पर समान ध्यान देना होगा।
एयर इंडिया की बोर्ड चयन प्रक्रिया में भी इसी अनुभव को महत्व दिया गया था। बोर्ड ने ऐसे नेतृत्व की तलाश की थी जो बड़ी एयरलाइन को बदलने, परिचालन गुणवत्ता बढ़ाने और मुनाफे के साथ विस्तार करने का अनुभव रखता हो। इसी आधार पर गेब्रेमारियम को चुना गया।
इथियोपियन एयरलाइंस में अपने कार्यकाल के दौरान गेब्रेमारियम ने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क विस्तार और नए विमान जोड़ने पर बड़े स्तर पर काम किया था। इस अनुभव को एयर इंडिया की वैश्विक महत्वाकांक्षाओं के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
अब एयर इंडिया में उनकी सबसे बड़ी चुनौती कंपनी के परिवर्तन कार्यक्रम को अगले स्तर तक ले जाना होगी। इसके तहत नए विमानों को शामिल करना, पुराने विमानों को अपग्रेड करना, समय पर उड़ानों का संचालन और यात्रियों की शिकायतों में कमी लाना शामिल है।
कंपनी की रणनीति में भारत के तेजी से बढ़ते हवाई यात्रा बाजार का लाभ उठाना भी शामिल है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की बढ़ती संख्या के बीच एयर इंडिया खुद को दुनिया की प्रमुख एयरलाइंस में शामिल करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
गेब्रेमारियम के कार्यकाल में कर्मचारी प्रबंधन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने पहले ही संकेत दिया है कि कंपनी की सफलता में कर्मचारियों की भागीदारी अहम होगी। सुरक्षा से लेकर लागत बचत तक कर्मचारियों को निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका देने की योजना है।
एयर इंडिया की मौजूदा स्थिति में सेवा गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। यात्रियों की उम्मीदें बढ़ने के साथ एयरलाइन को केबिन सेवा, ग्राहक सहायता, उड़ान समयबद्धता और यात्रा अनुभव को लगातार बेहतर करना होगा।
गेब्रेमारियम ने अपने शुरुआती संदेश में एयर इंडिया को टिकाऊ रूप से लाभप्रद बनाने पर जोर दिया है। उनका मानना है कि एयरलाइन को केवल आकार में बड़ा नहीं होना चाहिए, बल्कि परिचालन और वित्तीय स्तर पर भी मजबूत होना चाहिए।
उनकी नियुक्ति के साथ एयर इंडिया में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया अब पूरी हो गई है। कैंपबेल विल्सन के बाद अब गेब्रेमारियम कंपनी के अगले चरण की रणनीति को आगे बढ़ाएंगे।
गुरुवार को औपचारिक रूप से पदभार संभालने के बाद अब उनकी प्राथमिकताओं को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू होगी। एयर इंडिया के लिए आने वाले महीनों में सुरक्षा, समयबद्धता, लागत नियंत्रण, सेवा गुणवत्ता और लाभप्रदता सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल रहने वाले हैं।
टेवोल्डे गेब्रेमारियम के सामने एयर इंडिया को तेजी से बढ़ती लेकिन चुनौतीपूर्ण वैश्विक विमानन प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थान दिलाने की जिम्मेदारी है। उनके पिछले अनुभव और एयरलाइन के मौजूदा परिवर्तन कार्यक्रम को देखते हुए अब नजर इस बात पर रहेगी कि नया नेतृत्व एयर इंडिया की योजनाओं को कितनी तेजी से परिणाम में बदल पाता है।





