सम्पादकीय

बैंकों को भुगतान करना होगा

nidhi
5 Nov 2026 2:06 PM IST
बैंकों को भुगतान करना होगा
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बैंकों को भुगतान
देश में 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम के बढ़ते खतरे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट का खुद संज्ञान लेना एक सही दिशा में उठाया गया कदम है। कोर्ट का यह कहना बिल्कुल सही है कि बैंकों को उन लोगों की भरपाई करनी चाहिए, जिन्होंने ऐसे स्कैम में अपने पैसे गंवा दिए हैं। अब तक बैंक इस मामले से अपना पल्ला झाड़ते रहे हैं। उनका तर्क है कि खाताधारक खुद ही उन ठगों को पैसे ट्रांसफर कर देते हैं, जो खुद को CBI, ED या RBI का अधिकारी बताते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा है कि बैंक इस मामले को लेकर ढुलमुल रवैया अपना रहे हैं। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि खाताधारकों को मुआवजा क्यों नहीं दिया जा सकता, जबकि करोड़ों रुपये के लोन को 'राइट ऑफ' (बट्टे खाते में डालना) कर दिया जाता है। कोर्ट ने गौर किया कि इस तरह के स्कैम के शिकार होने वालों में ज्यादातर वरिष्ठ नागरिक हैं।
अटॉर्नी जनरल ने स्थिति को थोड़ा नरम करने की कोशिश करते हुए कहा कि जब से कोर्ट ने इस मामले में दखल देना शुरू किया है, तब से ऐसे मामलों की संख्या में कमी आई है। उन्होंने यह भी कहा कि कोर्ट का कोई भी निर्देश बैंकों के लिए गंभीर परिणाम ला सकता है। अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया कि RBI ऐसे मामलों के लिए नियम और दिशा-निर्देश तैयार कर रहा है, और इस संबंध में विभिन्न बैंकों के साथ बातचीत चल रही है।
हालांकि, यह मामला काफी जरूरी है, इसलिए नियम और प्रक्रियाएं लागू करने के लिए एक समय-सीमा तय की जानी चाहिए। किसी भी स्थिति में, बैंक ऐसे स्कैम के लिए अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। हालांकि बैंक आमतौर पर संदिग्ध लेनदेन होने पर खाताधारकों को अलर्ट करते हैं, लेकिन इन्हें रोकने के लिए कोई खास कंप्यूटराइज्ड सिस्टम नहीं बनाया गया है।
उदाहरण के लिए, वरिष्ठ नागरिकों के बचत खातों से होने वाले संदिग्ध या असामान्य लेनदेन को 24 घंटे के लिए अपने आप 'होल्ड' (रोक) पर रखा जा सकता है। इस दौरान प्राप्तकर्ता खातों की जांच की जा सकती है और बैंक का कोई अधिकारी खाताधारक से बात कर सकता है। अगर कोई वरिष्ठ नागरिक विदेश से पैसे (रेमिटेंस) प्राप्त कर रहा है या बड़ी रकम का लेनदेन कर रहा है, तो ऐसे मामलों में बैंक जाकर व्यक्तिगत रूप से मिलना अनिवार्य किया जा सकता है।
इससे भी बेहतर यह होगा कि जो लोग आसानी से ठगी का शिकार हो सकते हैं, उन्हें स्वेच्छा से इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल बंद करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उम्मीद है कि RBI के दिशा-निर्देशों में इस तरह के मजबूत सुरक्षा उपाय शामिल होंगे। इस मामले से जुड़े एक वरिष्ठ वकील ने बताया कि जागरूकता अभियान चलाने से कोई खास फायदा नहीं हुआ है, क्योंकि ज्यादातर लोग गिरफ्तारी के डर से ही ठगों को पैसे दे देते हैं।
इसके साथ ही, पुलिस को एक समानांतर अभियान भी चलाना चाहिए ताकि झारखंड और हरियाणा के कुछ इलाकों के गांवों में बैठकर ठगी करने वाले अपराधियों को पकड़ा जा सके। पुलिस की कार्रवाई के बाद कंबोडिया और म्यांमार में चल रहे स्कैम कॉल सेंटरों को काफी हद तक बंद कर दिया गया है। यहाँ भी, पुलिस ने अब तक अच्छा काम किया है, लेकिन मामलों की बढ़ती संख्या से संकेत मिलता है कि कुछ बैंकिंग एजेंट और बैंक के अंदर के लोग इन घोटालों में शामिल हो सकते हैं, जो पैसों के बदले बैंक की जानकारी लीक कर रहे हैं। बैंकों को फ्रीलांस लोन और इंश्योरेंस एजेंटों को काम पर रखना बंद कर देना चाहिए, जिन्हें बैंक परिसर में कहीं भी आने-जाने की छूट होती है। असली खतरा यहीं है।
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