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पंकज त्रिपाठी के 50वें जन्मदिन पर खास: मनोज बाजपेयी की चप्पल संभालकर रख ली थी, जेल में गुजारे 7 दिन
jantaserishta.com
5 Sept 2026 3:39 PM IST

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नई दिल्ली: दिग्गज अभिनेता पंकज त्रिपाठी आज अपना 50वां जन्मदिन मना रहे हैं। बिहार के गोपालगंज जिले के बेलसंड गांव से निकलकर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा तक का सफर तय करने वाले पंकज त्रिपाठी ने बिना किसी फिल्मी पृष्ठभूमि के हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। छोटे-छोटे किरदारों से शुरुआत करने वाले पंकज आज फिल्मों और OTT की दुनिया के चर्चित अभिनेताओं में शामिल हैं। लेकिन उनकी जिंदगी में कुछ ऐसे किस्से भी हैं, जो उनके संघर्ष और अभिनय के प्रति जुनून को दिखाते हैं।
जब मनोज बाजपेयी की चप्पल को बना लिया था यादगार
फिल्मों में पहचान बनाने से पहले पंकज त्रिपाठी पटना के होटल मौर्य की किचन में सुपरवाइजर के तौर पर काम करते थे। नौकरी के साथ वह थिएटर भी करते थे। इसी दौरान उन्हें पता चला कि अभिनेता मनोज बाजपेयी होटल में ठहरे हुए हैं। पंकज उनके बड़े प्रशंसक थे, इसलिए उन्होंने होटल स्टाफ से कह दिया कि मनोज बाजपेयी के कमरे से कोई ऑर्डर आए तो उन्हें जरूर बताया जाए।
जब ऑर्डर आया तो पंकज ने होटल में मौजूद सेबों में से सबसे अच्छे सेब चुने और उन्हें अच्छी तरह पैक करवाकर मनोज के कमरे में भिजवाया। उन्होंने वेटर से यह भी कहलवाया कि एक लड़का उनसे मिलना चाहता है और थिएटर करता है।
इसके बाद पंकज खुद मनोज बाजपेयी से मिलने पहुंचे। उन्होंने उन्हें प्रणाम किया, पैर छुए और बताया कि वह भी थिएटर करते हैं। मुलाकात के बाद वह वापस लौट आए। अगले दिन मनोज होटल से चेकआउट कर एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गए, लेकिन उनकी एक हवाई चप्पल कमरे में छूट गई।
हाउसकीपिंग कर्मचारी ने जब पंकज को इसकी जानकारी दी तो उन्होंने चप्पल जमा कराने के बजाय अपने पास रखने को कहा। पंकज ने इस घटना को एकलव्य से जोड़ते हुए बताया था कि वह उस चप्पल को अपने लिए प्रेरणा की तरह देखते थे। यह किस्सा सुनाते हुए वह भावुक हो गए थे और उनकी आंखों में आंसू आ गए थे। बाद में पंकज और मनोज बाजपेयी ने ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ में साथ काम किया।
पंकज की जन्मतिथि भी बनी दिलचस्प कहानी
पंकज त्रिपाठी की जन्मतिथि को लेकर भी एक अनोखी बात सामने आई है। दस्तावेजों और कई आधिकारिक प्रोफाइल में उनकी जन्मतिथि 5 सितंबर 1976 दर्ज है, जबकि पंकज खुद बता चुके हैं कि उनका वास्तविक जन्म 28 सितंबर 1976 को हुआ था।
उन्होंने बताया था कि स्कूल में दाखिले के समय उनके भाई से जन्मतिथि पूछी गई थी। भाई को सही तारीख याद नहीं थी और इसी वजह से 5 सितंबर दर्ज हो गया। बाद में यही तारीख आधिकारिक दस्तावेजों में उनकी जन्मतिथि बन गई।
छात्र राजनीति के दौरान जेल भी गए
अभिनय की दुनिया में आने से पहले पंकज छात्र राजनीति से भी जुड़े थे। साल 1993 में एक आंदोलन के दौरान उन्हें पटना की बेऊर जेल में करीब सात दिन बिताने पड़े थे। मधुबनी में छात्रों पर हुई गोलीबारी के विरोध में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के खिलाफ प्रदर्शन किया था। उस दौरान उन्हें राजनीतिक कैदी के तौर पर जेल में रखा गया था।
जेल का यह अनुभव उनके लिए काफी अहम रहा। वहां उन्होंने किताबें पढ़ना शुरू किया और अलग-अलग लोगों के व्यवहार को करीब से समझने का मौका मिला। बाद में उन्होंने इन अनुभवों को अपने अभिनय और किरदारों को समझने में उपयोगी बताया।
छोटे रोल से ‘मिर्जापुर’ तक का सफर
पंकज त्रिपाठी ने 2004 में फिल्म ‘रन’ से अभिनय की शुरुआत की, जिसमें उनका छोटा सा किरदार था। इसके बाद ‘ओमकारा’ समेत कई फिल्मों में काम किया, लेकिन 2012 की ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। फिल्म में सुल्तान कुरैशी का उनका किरदार खूब पसंद किया गया।
इसके बाद ‘फुकरे’, ‘मसान’, ‘निल बट्टे सन्नाटा’, ‘बरेली की बर्फी’, ‘न्यूटन’ और ‘स्त्री’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। OTT पर ‘सेक्रेड गेम्स’, ‘मिर्जापुर’ और ‘क्रिमिनल जस्टिस’ ने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ाया। फिल्म ‘मिमी’ में उनके अभिनय के लिए उन्हें 69वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का पुरस्कार भी मिला।
गांव से शुरू हुआ यह सफर आज हिंदी सिनेमा के सबसे पहचाने जाने वाले कलाकारों तक पहुंच चुका है। पंकज त्रिपाठी की कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि संघर्ष, थिएटर के जुनून और छोटे मौकों को बड़ी पहचान में बदलने की कहानी भी है।
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