
x
मुंबई। दक्षिण भारतीय और हिंदी फिल्मों के चर्चित अभिनेता प्रकाश राज एक बार फिर अपने राजनीतिक बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर खुलकर अपनी राय रखने वाले प्रकाश राज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है। अभिनेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए सरकार से सवाल पूछने वालों और असहमति व्यक्त करने वाले लोगों का बचाव किया। इसके साथ ही उन्होंने लोगों से तर्कसंगत ढंग से सोचने और सत्ता से सवाल करने की अपील की।
प्रकाश राज ने 16 अगस्त की शाम अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया। वीडियो में उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सामने आई दो अलग-अलग गतिविधियों का उल्लेख किया। एक ओर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन की चर्चा की, जबकि दूसरी ओर सरकारी स्कूलों की स्थिति सामने लाने वाले स्वयंसेवकों के अभियान का जिक्र किया। अभिनेता ने प्रधानमंत्री के लिए ‘सुप्रीम लीडर’ शब्द का प्रयोग करते हुए उनके बयान पर व्यंग्य किया।
अभिनेता ने कहा कि लंबे समय से सरकार से सवाल पूछने वाले लोगों को अलग-अलग नामों से संबोधित किया जाता रहा है। कभी उन्हें ‘अर्बन नक्सल’ और ‘देश विरोधी’ कहा गया तो कभी आंदोलन करने वालों के लिए दूसरे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। प्रकाश राज ने आरोप लगाया कि अब असहमति जताने और सवाल उठाने वाले लोगों को ‘दिमागी नक्सल’ का नया नाम दिया गया है।
प्रकाश राज ने अपने वीडियो में सोशल मीडिया पर चर्चित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के स्वयंसेवकों की गतिविधियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये स्वयंसेवक ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों का दौरा कर रहे हैं। अभियान के माध्यम से स्कूलों की इमारतों, कक्षाओं, शौचालयों, शिक्षकों और संपर्क मार्गों की वास्तविक स्थिति लोगों के सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।
अभिनेता के मुताबिक, सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को कई स्थानों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि कुछ स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं तो कहीं कक्षाओं और शौचालयों की हालत ठीक नहीं है। कई इलाकों में स्कूल तक पहुंचने के लिए उचित सड़क भी उपलब्ध नहीं है। प्रकाश राज ने कहा कि इन कमियों को सामने लाने वाले लोगों की बात सुनने और व्यवस्था सुधारने के बजाय उन्हें तरह-तरह के नाम देना उचित नहीं है।
वीडियो में प्रकाश राज ने कहा कि देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लोगों ने दो अलग-अलग पक्षों को काम करते देखा। अब जनता को यह तय करना है कि वह किस तरह की राजनीति और विचारधारा का समर्थन करना चाहती है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी बात को बिना सोचे-समझे स्वीकार न करें, बल्कि तथ्यों को समझें और जरूरत पड़ने पर सवाल उठाएं।
प्रकाश राज ने अपने संदेश में कहा, “दिमागी बनो, बेवकूफ नहीं, अंधभक्त नहीं। सवाल करो, गुलामी नहीं।” उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध दोनों मिल रहे हैं। कुछ उपयोगकर्ताओं ने अभिनेता की बातों से सहमति जताते हुए सवाल पूछने को लोकतांत्रिक अधिकार बताया। वहीं, दूसरे पक्ष ने प्रकाश राज पर प्रधानमंत्री के बयान का गलत अर्थ निकालने और राजनीतिक एजेंडा चलाने का आरोप लगाया।
प्रकाश राज पहले भी केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की आलोचना करते रहे हैं। नागरिक अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शिक्षा और राजनीतिक असहमति जैसे मुद्दों पर वह लगातार अपनी राय रखते आए हैं। उनकी बेबाक टिप्पणियां कई बार व्यापक राजनीतिक बहस का कारण बन चुकी हैं।
इस बार भी उनके वीडियो ने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है। प्रकाश राज ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार से सवाल करना अपराध नहीं माना जाना चाहिए। हालांकि, उनके बयान पर सरकार या संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आने का इंतजार है।
TagsCriticismcrimelightsecretsarcasmआलोचनाअपराधप्रकाशराजतंजजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताजनता से रिश्ता.कॉमआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperजनताjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





