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Entertainment,मनोरंजन : आज के समय में छोटे बच्चों की क्यूटनेस अक्सर माता-पिता और समाज का ध्यान आकर्षित करती है। कई माता-पिता यह सोचते हैं कि बच्चे का थोड़ा अधिक वजन या गोल-मटोल चेहरा उन्हें प्यारा बनाता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह सोच बच्चों की सेहत के लिए खतरा बन सकती है।
बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र में अत्यधिक वजन केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है। Dr. नेहा शर्मा, बाल रोग विशेषज्ञ, बताती हैं कि “आजकल बच्चों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। कई बार माता-पिता बच्चे की क्यूटनेस के लिए उन्हें अधिक कैलोरीयुक्त भोजन दे देते हैं या उन्हें बाहर खेलने की जगह स्क्रीन पर बैठने देते हैं। यह आदत लंबे समय में उन्हें डायबिटीज़, हार्ट प्रॉब्लम और ऑर्थोपेडिक समस्या जैसी गंभीर बीमारियों की तरफ ले जाती है।”
आंकड़ों के अनुसार, भारत में 5 से 10 साल की उम्र के लगभग 19% बच्चे अधिक वजन या मोटापे की समस्या से ग्रसित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संख्या लगातार बढ़ रही है और इसके पीछे मुख्य कारण बच्चों की खराब भोजन习惯 और शारीरिक गतिविधि की कमी हैं।
विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि माता-पिता को बच्चे के वजन पर नजर रखते हुए उन्हें संतुलित आहार और नियमित व्यायाम की आदत डालनी चाहिए। इसमें ताजे फल, सब्ज़ियां, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त भोजन शामिल होना चाहिए। साथ ही, जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक और मिठाईयों का सेवन सीमित रखना चाहिए।
बाल स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि बच्चों को खेल और बाहर की गतिविधियों में शामिल करना उनकी सेहत और मोटापे को नियंत्रित करने के लिए बेहद जरूरी है। “कम उम्र से बच्चों को शारीरिक गतिविधियों में शामिल करना न केवल वजन नियंत्रण में मदद करता है, बल्कि उनकी हड्डियों और मांसपेशियों की मजबूती भी बढ़ाता है,” Dr. शर्मा ने बताया।
मनोवैज्ञानिक भी चेतावनी देते हैं कि अत्यधिक मोटापा बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। बच्चे अपने वजन के कारण शारीरिक रूप से शर्मिंदा महसूस कर सकते हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास कम हो सकता है और सामाजिक विकास प्रभावित हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता को बच्चों की क्यूटनेस के चक्कर में उनकी सेहत पर समझौता नहीं करना चाहिए। हेल्दी बच्चे न केवल मजबूत और ऊर्जावान होते हैं, बल्कि उनकी लंबी उम्र और जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है।
सारांश में, बच्चों का वजन केवल उनकी क्यूटनेस का मापदंड नहीं है। कम उम्र में सही वजन और संतुलित जीवनशैली उन्हें गंभीर बीमारियों से बचा सकती है। माता-पिता और परिवार को इस पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है।
बच्चों की क्यूटनेस पर ध्यान देना स्वाभाविक है, लेकिन इसे स्वास्थ्य पर प्राथमिकता देने से ऊपर नहीं रखना चाहिए। संतुलित आहार, शारीरिक गतिविधि और नियमित मेडिकल चेक‑अप से ही बच्चे स्वस्थ, खुशहाल और ऊर्जा से भरपूर रह सकते हैं।
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