मनोरंजन

संगीत से समाज तक का सफर, महालक्ष्मी अय्यर ने साझा किए अपने विचार

nidhi
4 Oct 2026 2:05 PM IST
संगीत से समाज तक का सफर, महालक्ष्मी अय्यर ने साझा किए अपने विचार
x
महालक्ष्मी अय्यर ने रखी अपनी बात
मशहूर गायिका महालक्ष्मी अय्यर ने संगीत, बदलाव और अपने अब तक के सफर को लेकर खुलकर बात की है। उनका मानना है कि कलाकारों की भूमिका केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होती। कला और संगीत के जरिए भी समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाया जा सकता है। उनके अनुसार हर कलाकार अपने तरीके से समाज के लिए योगदान दे सकता है और लोगों को सोचने के लिए प्रेरित कर सकता है।
महालक्ष्मी अय्यर भारतीय संगीत जगत का जाना-पहचाना नाम हैं। उन्होंने अलग-अलग भाषाओं और कई तरह के संगीत में अपनी आवाज दी है। उनके करियर में फिल्मी गीतों के साथ अन्य संगीत परियोजनाएं भी शामिल रही हैं। लंबे सफर के दौरान उन्होंने संगीत के बदलते दौर को करीब से देखा है और अपनी आवाज के जरिए अलग-अलग तरह की कहानियों का हिस्सा बनी हैं।
उनका मानना है कि संगीत की सबसे बड़ी ताकत उसकी पहुंच है। एक गीत कुछ ही मिनटों में हजारों और लाखों लोगों तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि कलाकार अपनी रचनात्मकता के जरिए भावनाओं, विचारों और सामाजिक मुद्दों को लोगों के सामने ला सकते हैं। उनके लिए संगीत केवल सुर और शब्दों का मेल नहीं, बल्कि समाज के साथ संवाद करने का माध्यम भी है।
महालक्ष्मी अय्यर ने कलाकारों की जिम्मेदारी पर बात करते हुए कहा कि हर व्यक्ति का समाज में योगदान देने का अपना तरीका होता है। कोई शिक्षा के जरिए बदलाव लाता है, कोई सेवा के माध्यम से और कलाकार अपनी कला के जरिए लोगों तक पहुंचता है। कला में लोगों के मन और भावनाओं को प्रभावित करने की क्षमता होती है, इसलिए कलाकारों का काम भी व्यापक असर पैदा कर सकता है।
गायिका ने अपने सफर को भी सीख और अनुभव से जुड़ा बताया। संगीत की दुनिया में लगातार नए बदलाव आते रहे हैं। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से रिकॉर्डिंग, म्यूजिक प्रोडक्शन और गानों के दर्शकों तक पहुंचने के तरीके बदल गए हैं। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने नए कलाकारों के लिए भी अवसर बढ़ाए हैं।
महालक्ष्मी अय्यर का कहना है कि बदलाव को अपनाना कलाकार के लिए जरूरी है, लेकिन अपनी मूल पहचान बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। समय के साथ संगीत की शैली, श्रोताओं की पसंद और काम करने के तरीके बदल सकते हैं, लेकिन एक कलाकार की आवाज और उसकी अपनी संवेदना उसे दूसरों से अलग बनाती है।
अपने करियर के दौरान अलग-अलग तरह के प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनने से उन्हें कई अनुभव मिले। अलग भाषाओं, अलग संगीत शैलियों और अलग रचनाकारों के साथ काम करने ने उनकी समझ को व्यापक बनाया। उनके मुताबिक हर नया प्रोजेक्ट सीखने और खुद को बेहतर समझने का अवसर देता है।
संगीत और समाज के रिश्ते पर बात करते हुए उन्होंने यह भी माना कि कला लोगों के बीच संवाद और संवेदनशीलता बढ़ाने का माध्यम हो सकती है। एक गीत किसी व्यक्ति को भावुक कर सकता है, किसी याद से जोड़ सकता है या किसी विचार पर सोचने के लिए मजबूर कर सकता है। यही संगीत की सामाजिक ताकत है।
महालक्ष्मी अय्यर के लिए कलाकार होना केवल मंच पर प्रदर्शन करने तक सीमित नहीं है। वह मानती हैं कि कलाकार अपने काम के जरिए समाज में अपनी भूमिका निभा सकता है। जरूरी नहीं कि हर कलाकार एक ही तरीके से योगदान करे। किसी के लिए सामाजिक मुद्दों पर गीत बनाना महत्वपूर्ण हो सकता है, तो कोई अपनी कला के जरिए उम्मीद, शांति और सकारात्मकता का संदेश दे सकता है।
आज जब संगीत डिजिटल माध्यमों के जरिए दुनिया के किसी भी कोने तक आसानी से पहुंच सकता है, कलाकारों की जिम्मेदारी और प्रभाव दोनों बढ़े हैं। ऐसे समय में महालक्ष्मी अय्यर का नजरिया कला को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक संवाद का माध्यम मानने की दिशा में जाता है।
महालक्ष्मी अय्यर का लंबा संगीत सफर इस बात का उदाहरण है कि कलाकार समय के साथ खुद को बदलते हुए भी अपनी पहचान बनाए रख सकता है। संगीत, बदलाव और समाज में योगदान को लेकर उनकी सोच बताती है कि कला का असर मंच और स्क्रीन से आगे भी जा सकता है। उनके अनुसार कलाकार अपनी आवाज और रचनात्मकता के जरिए समाज में अपने हिस्से का सकारात्मक योगदान दे सकते हैं।
Next Story