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चेक बाउंस केस में राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से राहत
Kanchan Paikara
7 Oct 2026 12:40 PM IST

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Rajpal Yadav Case: बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़े पुराने चेक बाउंस मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। हालांकि अदालत ने इस दौरान अभिनेता के रवैये को लेकर कड़ी नाराजगी भी जताई। कोर्ट ने भुगतान को लेकर राजपाल यादव की ओर से दिए गए आश्वासन और तय शर्तों के आधार पर उन्हें राहत दी है। इसके तहत अभिनेता को बुधवार को ही सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में 1.15 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करना है, जबकि सोमवार को आरटीजीएस के जरिए शिकायतकर्ता के खाते में 85 लाख रुपये भेजने का वादा किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि मामले में राहत भुगतान की शर्तों से जुड़ी हुई है। अदालत ने बकाया रकम लौटाने की दिशा में अभिनेता को अपने वादे पूरे करने को कहा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने भुगतान में लगातार हो रही देरी पर नाराजगी जताई और स्पष्ट संकेत दिया कि अदालत के आदेशों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
यह मामला लंबे समय से अदालतों में चल रहा है। विवाद की शुरुआत राजपाल यादव की फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए लिए गए कर्ज से जुड़ी है। उपलब्ध अदालती रिकॉर्ड से संबंधित रिपोर्टों के मुताबिक, फिल्म के लिए वर्ष 2010 में करीब पांच करोड़ रुपये की रकम ली गई थी। बाद में भुगतान और ब्याज को लेकर विवाद बढ़ता गया। वर्ष 2013 में रकम चुकाने के लिए दिए गए सात चेक कथित तौर पर बाउंस हो गए, जिसके बाद कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।
मामला वर्षों तक अलग-अलग अदालतों में चलता रहा। अप्रैल 2018 में चेक बाउंस मामलों में राजपाल यादव को दोषी ठहराया गया था। इसके बाद भी भुगतान और समझौते को लेकर दोनों पक्षों के बीच कोशिशें जारी रहीं। दिल्ली हाई कोर्ट ने जुलाई 2026 में उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अभिनेता ने राहत की मांग की।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले भी राजपाल यादव को भुगतान के लिए समय दे चुका है। 15 सितंबर को कोर्ट ने उन्हें अंतिम अवसर देते हुए दो सप्ताह के भीतर दो करोड़ रुपये जमा करने और शेष बकाया रकम चुकाने के लिए ठोस प्रस्ताव देने को कहा था। लेकिन निर्धारित अवधि में भुगतान पूरा नहीं होने पर पांच अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने अभिनेता के रवैये पर नाराजगी जाहिर करते हुए उन्हें भुगतान की जिम्मेदारी पूरी करने का निर्देश दिया था।
पांच अक्टूबर की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यहां तक कहा था कि वह राजपाल यादव की अपील खारिज कर सकता है। हालांकि अदालत ने इस बात को भी ध्यान में रखा कि यदि अपील तत्काल खारिज कर दी गई तो शिकायतकर्ता के लिए बकाया रकम की वसूली प्रभावित हो सकती है। इसी कारण अदालत ने उन्हें भुगतान के लिए एक और मौका दिया और मामले की अगली सुनवाई बुधवार के लिए तय की थी।
अब बुधवार को हुई सुनवाई में राजपाल यादव को राहत तो मिली है, लेकिन इसके साथ भुगतान की स्पष्ट शर्तें रखी गई हैं। अभिनेता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 1.15 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट रजिस्ट्री में जमा किया जाएगा। इसके अलावा 85 लाख रुपये सोमवार को आरटीजीएस के माध्यम से शिकायतकर्ता के खाते में ट्रांसफर करने का आश्वासन दिया गया।
इससे पहले भुगतान की समय सीमा पूरी नहीं किए जाने को लेकर अदालत का रुख बेहद सख्त रहा था। कोर्ट लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि राजपाल यादव की ओर से किए गए वादों और अदालत को दिए गए आश्वासनों का पालन होना चाहिए। सोमवार की पिछली सुनवाई में भी बेंच ने समय पर पैसा जमा नहीं किए जाने को गंभीरता से लिया था।
राजपाल यादव का यह कानूनी विवाद उनकी बतौर निर्देशक बनाई गई फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़ा है। फिल्म वर्ष 2012 में रिलीज हुई थी। फिल्म निर्माण के लिए जुटाई गई रकम को वापस करने को लेकर विवाद पैदा हुआ और बाद में चेक बाउंस होने के कारण मामला कानूनी लड़ाई में बदल गया। रिपोर्टों के अनुसार, समझौते के तहत ब्याज सहित देनदारी बढ़कर करीब 11 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी।
मामले में राजपाल यादव पहले जेल भी जा चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट में हाल की सुनवाई के दौरान उनके वकीलों की ओर से भुगतान के लिए अतिरिक्त समय और राहत की मांग की गई थी। अदालत ने शिकायतकर्ता के पैसे की वसूली को महत्वपूर्ण बताते हुए कई मौकों पर अभिनेता को भुगतान पूरा करने का अवसर दिया है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की ताजा राहत के बाद राजपाल यादव के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात अदालत के सामने किए गए भुगतान के वादे को तय समय पर पूरा करना है। 1.15 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट रजिस्ट्री में जमा करने और सोमवार को 85 लाख रुपये आरटीजीएस से देने की शर्त पूरी होने पर ही मौजूदा राहत का लाभ उन्हें मिल सकेगा। ऐसे में इस लंबे समय से चले आ रहे चेक बाउंस मामले में अब आगे की कार्रवाई काफी हद तक भुगतान की शर्तों के पालन पर निर्भर करेगी।
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