
Entertainment मनोरंजन : मशहूर अभिनेता राकेश बेदी हाल ही में इंडिया’ के इवेंट ‘अमृत रत्न’ में पहुंचे, जहां उन्होंने अपने फिल्मी सफर और हिंदी सिनेमा के बदलते स्वरूप पर खुलकर बातचीत की। दशकों से अपनी बेहतरीन कॉमेडी और अभिनय से दर्शकों को हंसाते आए राकेश बेदी ने कहा कि शुरुआती दौर में उनके लिए इंडस्ट्री में जगह बनाना आसान नहीं था, लेकिन समय के साथ उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा से पहचान बनाई।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपनी चर्चित फिल्म ‘धुरंधर’ का भी जिक्र किया और कहा कि इस फिल्म से उन्हें जिस तरह का स्टारडम और दर्शकों का प्यार मिला, उसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने बताया कि उनके किरदार ‘जमील जमाली’ को दर्शकों ने काफी पसंद किया और यह उनके करियर के लिए एक खास मोड़ साबित हुआ।
राकेश बेदी ने कहा कि पहले के समय में फिल्मों को लेकर लोगों का रिएक्शन अलग होता था। उस दौर में पोस्टर और सिनेमाघरों तक ही चर्चा सीमित रहती थी, लेकिन आज सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के कारण किसी भी फिल्म का असर कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि ‘चश्मे बद्दूर’ जैसे प्रोजेक्ट्स के समय भी उन्हें दर्शकों का प्यार मिला था, लेकिन आज के समय में उसका प्रभाव और अधिक व्यापक हो गया है।
अपने शुरुआती संघर्ष को याद करते हुए उन्होंने बताया कि जब वे इंडस्ट्री में आए थे, तब उन्हें हीरो या मुख्य भूमिकाओं के लिए फिट नहीं माना जाता था। उस समय हीरो के लिए लंबा कद और अलग छवि जरूरी समझी जाती थी, जबकि खलनायक और उसके साथी के लिए भी एक खास तरह की छवि तय थी। ऐसे में कॉमेडी उनके लिए एक रास्ता बनी और धीरे-धीरे यही उनकी पहचान बन गई।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से अभिनय की पढ़ाई की है और थिएटर से भी लगातार जुड़े रहे हैं। उनका मानना है कि अभिनय की तकनीकें सिखाई जा सकती हैं, लेकिन असली पहचान कलाकार की मेहनत और अनुभव से बनती है।
इसी बातचीत के दौरान उन्होंने इंडस्ट्री में कलाकारों के योगदान और उनके सम्मान को लेकर भी अपने विचार रखे। उनके बयानों ने एक बार फिर इस बात पर चर्चा शुरू कर दी है कि फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों को उनका उचित हक और पहचान मिलनी चाहिए।





