
मनोरंजन: हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ गाने ऐसे होते हैं, जो समय बीतने के साथ और ज्यादा खास बन जाते हैं। ऐसा ही एक सदाबहार गीत है फिल्म 'हीरा पन्ना' का मशहूर गाना 'पन्ना की तमन्ना है कि हीरा मुझे मिल जाए'। 53 साल बाद भी यह गीत संगीत प्रेमियों के बीच उतना ही लोकप्रिय है, जितना अपनी रिलीज के समय था। इस गाने को अपनी आवाज से अमर बनाने वाले थे महान गायिका लता मंगेशकर और मशहूर गायक किशोर कुमार। वहीं इस गीत की धुन तैयार की थी दिग्गज संगीतकार आरडी बर्मन ने।
फिल्म 'हीरा पन्ना' साल 1973 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में अभिनेता देव आनंद और अभिनेत्री जीनत अमान मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म का निर्देशन और लेखन भी देव आनंद ने ही किया था। फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी आरडी बर्मन के कंधों पर थी, जिन्होंने अपनी शानदार धुनों से फिल्म को यादगार बना दिया।
इस गाने के बनने की कहानी भी काफी दिलचस्प है। बताया जाता है कि फिल्म के निर्माण के दौरान आरडी बर्मन एक मुश्किल दौर से गुजर रहे थे। वह काफी परेशान और निराश थे। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, उस समय वह मानसिक तनाव और डिप्रेशन का सामना कर रहे थे। ऐसे समय में फिल्म के अभिनेता और निर्देशक देव आनंद ने उनका हौसला बढ़ाया।
कहा जाता है कि देव आनंद ने आरडी बर्मन से करीब तीन घंटे तक बातचीत की और उनका आत्मविश्वास वापस लाने की कोशिश की। इस बातचीत का असर यह हुआ कि आरडी बर्मन ने दोबारा अपनी रचनात्मक ऊर्जा को महसूस किया और फिल्म के लिए शानदार संगीत तैयार किया। इसी दौर में बना गीत 'पन्ना की तमन्ना है' आगे चलकर हिंदी सिनेमा के यादगार गीतों में शामिल हो गया।
इस गाने को आनंद बख्शी ने लिखा था। गीत के बोल, संगीत और किशोर कुमार व लता मंगेशकर की जादुई आवाज ने इसे एक अलग पहचान दी। फिल्म में यह गीत देव आनंद और जीनत अमान पर फिल्माया गया था। अपनी मधुर धुन और भावनात्मक शब्दों के कारण यह गाना आज भी लोगों के दिलों में जगह बनाए हुए है।
इस गीत की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रिलीज के कई दशक बाद भी इसके अलग-अलग रीमिक्स वर्जन बनाए गए। इतना ही नहीं, इस गाने की धुन और बोलों का इस्तेमाल दूसरे संगीत प्रोजेक्ट्स में भी किया गया। पंजाबी संगीत में भी इस गीत की लोकप्रियता देखने को मिली, जहां इसे नए अंदाज में पेश किया गया।
'पन्ना की तमन्ना है' गीत को 1974 की लोकप्रिय संगीत सूची बिनाका गीत माला में भी जगह मिली थी। यह उस दौर के सबसे पसंद किए जाने वाले गीतों में शामिल रहा। आरडी बर्मन की खास संगीत शैली, जिसमें भारतीय धुनों के साथ आधुनिक प्रयोगों का मेल दिखाई देता था, इस गीत में भी नजर आती है।
आरडी बर्मन का जीवन उतार-चढ़ाव से भरा रहा। 70 के दशक में उन्होंने कई शानदार फिल्मों में संगीत दिया और अपनी अलग पहचान बनाई। हालांकि 80 के दशक में उनके करियर में एक कठिन दौर आया। कई फिल्मों के अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के कारण उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में काम की कमी का सामना करना पड़ा। इस दौरान उन्होंने काफी संघर्ष किया।
साल 1988 में आरडी बर्मन को हार्ट अटैक भी आया। इसके कुछ वर्षों बाद 1994 में महज 54 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। हालांकि उनके जाने के बाद भी उनका संगीत लोगों के बीच जिंदा रहा। आज भी उनके बनाए गीत भारतीय संगीत की धरोहर माने जाते हैं।
'पन्ना की तमन्ना है' सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि उस दौर की भावनाओं, संघर्ष और रचनात्मकता की कहानी है। एक कलाकार जिसने मुश्किल समय से निकलकर ऐसा संगीत दिया, जिसे पांच दशक बाद भी लोग सुनना पसंद करते हैं। किशोर कुमार और लता मंगेशकर की आवाज तथा आरडी बर्मन की धुन ने इस गीत को हमेशा के लिए अमर बना दिया।





