
मनोरंजन: हिंदी सिनेमा की दुनिया में कई ऐसे फिल्मकार हुए हैं, जिन्होंने अपने काम से इतिहास रचा है। कुछ ने कई फिल्में बनाईं और अपनी अलग पहचान बनाई, वहीं कुछ ऐसे भी रहे जिन्होंने कम समय में ऐसा काम किया कि उनका नाम हमेशा के लिए यादगार बन गया। ऐसे ही एक फिल्ममेकर थे अवतार कृष्ण कौल, जिन्होंने अपने पूरे करियर में सिर्फ एक फिल्म बनाई, लेकिन वह एक फिल्म इतनी खास साबित हुई कि उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हालांकि किस्मत का खेल ऐसा रहा कि जिस दिन उनकी उपलब्धि का ऐलान हुआ, उसी दिन उनकी जिंदगी का अंत भी हो गया।
अवतार कृष्ण कौल हिंदी सिनेमा के उन दुर्लभ फिल्मकारों में शामिल हैं, जिनका सफर छोटा जरूर था, लेकिन प्रभाव बेहद बड़ा था। उनका जन्म कश्मीर के एक कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ था। बचपन से ही उन्हें कला और सिनेमा में गहरी रुचि थी। हालांकि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, इसलिए उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा।
शुरुआती जीवन में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। परिवार की जिम्मेदारियों के चलते उन्होंने विदेश मंत्रालय में क्लास फोर कर्मचारी के रूप में नौकरी भी की। इसके बाद उन्हें अमेरिका जाने का अवसर मिला। अमेरिका में उन्होंने कई तरह के काम किए और अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने न्यूयॉर्क स्थित सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क से शिक्षा हासिल की। इसी दौरान उन्होंने सिनेमा और फिल्म निर्माण की दुनिया को करीब से समझा।
विदेश में रहने के बाद भी उनका मन भारतीय सिनेमा से जुड़ा रहा। आखिरकार वह भारत लौटे और फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर की। धीरे-धीरे उन्होंने फिल्म निर्माण की बारीकियां सीखीं और अपनी पहली फिल्म बनाने का फैसला किया।
साल 1974 में अवतार कृष्ण कौल ने अपनी पहली और आखिरी फिल्म बनाई, जिसका नाम था ‘27 डाउन’। यह फिल्म हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित समानांतर फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म की कहानी मशहूर लेखक रमेश बक्शी के उपन्यास ‘अठारह सूरज के पौधे’ से प्रेरित थी। फिल्म की कहानी एक ऐसे व्यक्ति के जीवन पर आधारित थी, जो अपनी इच्छाओं, सपनों और जिम्मेदारियों के बीच संघर्ष करता है।
‘27 डाउन’ में राखी और एम.के. रैना ने मुख्य भूमिकाएं निभाईं। फिल्म की कहानी और निर्देशन दोनों ही अवतार कृष्ण कौल ने संभाला था। सीमित संसाधनों में बनी इस फिल्म ने अपनी गहरी कहानी और शानदार प्रस्तुति से दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान खींचा।
फिल्म ‘27 डाउन’ को राष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहना मिली। इस फिल्म ने दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल किए, जो किसी भी निर्देशक के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। पहली ही फिल्म से अवतार कृष्ण कौल ने साबित कर दिया कि उनमें एक बेहतरीन फिल्मकार बनने की पूरी क्षमता थी।
लेकिन उनकी सफलता का सफर ज्यादा लंबा नहीं चल सका। उनकी जिंदगी का अंत बेहद दुखद और अचानक हुआ। बताया जाता है कि वह मुंबई के समुद्र किनारे मौजूद थे, जहां उन्होंने किसी व्यक्ति को समुद्र में डूबने से बचाने की कोशिश की। इसी दौरान वह खुद समुद्र की तेज लहरों की चपेट में आ गए और उनकी मौत हो गई।
सबसे दुखद बात यह रही कि जिस दिन उनके निधन की खबर आई, उसी दिन उनकी फिल्म ‘27 डाउन’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा हुई थी। वह अपनी इस बड़ी उपलब्धि और सम्मान को अपनी आंखों से नहीं देख पाए। महज 34 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।
अवतार कृष्ण कौल का फिल्मी सफर भले ही छोटा रहा, लेकिन उनकी एक फिल्म ने उन्हें भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमर बना दिया। उन्होंने साबित कर दिया कि महान काम के लिए लंबा करियर नहीं, बल्कि प्रतिभा और सोच की जरूरत होती है। ‘27 डाउन’ आज भी सिनेमा प्रेमियों के बीच एक यादगार फिल्म के रूप में जानी जाती है और अवतार कृष्ण कौल का नाम एक ऐसे फिल्मकार के तौर पर लिया जाता है, जिसने सिर्फ एक फिल्म से अपनी अमिट छाप छोड़ दी।





