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‘The Narmada Story’ में सिमाला प्रसाद का दमदार अभिनय

Dolly
13 Jun 2026 9:58 PM IST
‘The Narmada Story’ में सिमाला प्रसाद का दमदार अभिनय
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मनोरंजन:आईपीएस अधिकारी सिमाला प्रसाद ने ‘द नर्मदा स्टोरी’ और ड्यूटी-एक्टिंग बैलेंस पर की बात फिल्म ‘द नर्मदा स्टोरी’ हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है, जिसमें रियल लाइफ आईपीएस अधिकारी सिमाला प्रसाद लीड रोल में नजर आ रही हैं। नर्मदा नदी, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म को लेकर उन्होंने एक इंटरव्यू में अपने अनुभव साझा किए। सिमाला प्रसाद ने बताया कि वह इस फिल्म में एक सब-इंस्पेक्टर की भूमिका निभा रही हैं, जबकि असल जिंदगी में वह आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने कहा कि दोनों भूमिकाओं की जिम्मेदारियां और बैकग्राउंड पूरी तरह अलग हैं, सिर्फ वर्दी पहन लेने से किरदार समान नहीं हो जाता। उनके अनुसार समानता सिर्फ इतनी है कि असल जीवन हो या फिल्म, दोनों में न्याय और जिम्मेदारी की भावना सबसे महत्वपूर्ण है।

फिल्म में महिला पुलिस अधिकारियों के साथ होने वाले भेदभाव को भी दिखाया गया है। इस पर सिमाला ने कहा कि समाज में अक्सर पुलिस को “महिला और पुरुष पुलिस” के रूप में देखा जाता है, जबकि असल में क्षमता को जेंडर से जोड़ना गलत है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्तिगत रूप से उन्हें ऐसे भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा है।

शूटिंग के अनुभव पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने ड्यूटी से छुट्टी और अनुमति लेकर करीब 10 से 15 दिनों में पूरा शूट पूरा किया। अपने व्यस्त शेड्यूल को उन्होंने अच्छे से मैनेज किया। सिमाला का कहना है कि वह फिल्मों में केवल मीनिंगफुल सिनेमा का हिस्सा बनना चाहती हैं, जो समाज को संदेश दे और किसी समस्या का समाधान प्रस्तुत करे।

सेट पर अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि शूटिंग के दौरान वह खुद को सिर्फ एक एक्ट्रेस की तरह देखती हैं, न कि आईपीएस अधिकारी के रूप में। उन्होंने यह भी कहा कि बड़े कलाकारों जैसे रघुबीर यादव, मुकेश तिवारी और अश्विनी कलसेकर के साथ काम करना सीखने का अच्छा अवसर रहा।

सोशल मीडिया पर वर्दी पहनकर रील बनाने की प्रवृत्ति पर सिमाला प्रसाद ने आलोचनात्मक राय दी। उन्होंने कहा कि ड्यूटी के समय ध्यान काम पर होना चाहिए, न कि व्यूज या रील्स पर। उनके अनुसार वर्दी सम्मान और जिम्मेदारी का प्रतीक है, इसलिए उसका उपयोग निजी प्रचार के लिए नहीं होना चाहिए।

इस तरह सिमाला प्रसाद ने अपने अनुभवों के जरिए फिल्म, ड्यूटी और समाज के बीच संतुलन पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए।

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