
मनोरंजन: बॉलीवुड में कई ऐसे गाने आए हैं, जिन्होंने न सिर्फ फिल्मों को यादगार बनाया बल्कि कलाकारों की पहचान को भी नई ऊंचाई दी। ऐसा ही एक गाना 33 साल पहले रिलीज हुई फिल्म 'खलनायक' का है, जो आज भी लोगों की जुबान पर बना हुआ है। यह गाना इतना लोकप्रिय हुआ था कि इसकी गूंज ऑटो रिक्शा से लेकर गलियों और चौराहों तक सुनाई देती थी।
हम बात कर रहे हैं साल 1993 में रिलीज हुई फिल्म 'खलनायक' के मशहूर गाने 'नायक नहीं खलनायक हूं मैं' की। इस गाने ने फिल्म के साथ-साथ अभिनेता संजय दत्त की छवि को भी एक अलग पहचान दी। गाने की लोकप्रियता इतनी ज्यादा थी कि यह उस दौर के सबसे चर्चित गीतों में शामिल हो गया था।
फिल्म 'खलनायक' में संजय दत्त के साथ माधुरी दीक्षित और जैकी श्रॉफ मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म का निर्देशन सुभाष घई ने किया था और यह बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल करने वाली फिल्मों में शामिल रही। फिल्म की कहानी, कलाकारों की अदाकारी और इसके गानों ने दर्शकों के बीच खास जगह बनाई।
'नायक नहीं खलनायक हूं मैं' गाने ने संजय दत्त के किरदार बल्लू बलराम को दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया था। इस गाने के बाद संजय दत्त की बैड ब्वॉय इमेज को भी काफी मजबूती मिली। उनका अंदाज, डांस स्टाइल और स्क्रीन प्रेजेंस लोगों को काफी पसंद आया।
इस गाने को मशहूर गायिका कविता कृष्णमूर्ति और विनोद राठौड़ ने अपनी आवाज दी थी। वहीं इसके बोल दिग्गज गीतकार आनंद बक्शी ने लिखे थे। संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी ने इस गाने को यादगार धुन दी थी। गाने के बोल और संगीत का ऐसा मेल बना कि यह लंबे समय तक लोगों की पसंद बना रहा।
90 के दशक में फिल्मी गानों का असर लोगों की जिंदगी पर काफी ज्यादा होता था। उस समय टीवी चैनलों, कैसेट्स और रेडियो के जरिए गाने लोगों तक पहुंचते थे। 'नायक नहीं खलनायक हूं मैं' भी ऐसा ही गीत था, जिसे हर उम्र के लोगों ने पसंद किया। शादी समारोहों, पार्टियों और सार्वजनिक जगहों पर यह गाना खूब बजता था।
संजय दत्त के करियर में भी यह फिल्म और यह गाना बेहद खास माना जाता है। 'खलनायक' ने उन्हें एक अलग तरह की पहचान दिलाई। उनके किरदार की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि आज भी जब संजय दत्त की फिल्मों की चर्चा होती है तो 'खलनायक' का नाम जरूर लिया जाता है।
समय बदल गया, संगीत के तरीके बदल गए और नई पीढ़ी के कलाकारों के नए गाने आने लगे, लेकिन 'नायक नहीं खलनायक हूं मैं' की लोकप्रियता आज भी बरकरार है। यही वजह है कि इसे 90 के दशक के उन चुनिंदा गानों में गिना जाता है, जो अपनी धुन, बोल और कलाकारों की वजह से हमेशा याद किए जाएंगे।





