
नई दिल्ली: भारतीय संस्कृति में शादी-ब्याह का माहौल ढोलक की थाप, लोकगीतों और पारंपरिक उत्सवों के बिना अधूरा माना जाता है। गली-मोहल्लों से लेकर बड़े समारोहों तक, शादी की शुरुआत होते ही महिलाओं की टोलियां नाचने-गाने में जुट जाती हैं। एक तरफ जहां पारंपरिक बन्ना-बन्नी के गीत गूंजते हैं, वहीं बॉलीवुड के कुछ पुराने और ठेठ देहाती अंदाज वाले गाने आज भी डीजे और ढोलक की महफिल में चार चांद लगा देते हैं। हिंदी सिनेमा में कई ऐसे सदाबहार गाने मौजूद हैं, जो दशकों बीत जाने के बाद भी अपनी लोकप्रियता खो बैठे हैं। ऐसा ही एक करिश्माई और 64 साल पुराना गाना लीजेंड्री अभिनेत्री मीना कुमारी से जुड़ा है, जो आज भी हर शादी की रौनक बढ़ा रहा है।
'साहिब, बीबी और गुलाम' का ऐतिहासिक गाना
हम बात कर रहे हैं साल 1962 में रिलीज हुई क्लासिक फिल्म 'साहिब, बीबी और गुलाम' (Sahib Bibi Aur Ghulam) के बेहद लोकप्रिय गीत 'पिया ऐसो जिया में समाय गयो रे' (Piya Aiso Jiya Mein Samay Gayo Re) की। इस फिल्म में हिंदी सिनेमा की 'ट्रेजेडी क्वीन' कही जाने वाली मीना कुमारी ने अपनी दिलकश, सधी हुई और मदमस्त अदाओं से पर्दे पर ऐसा समां बांधा कि दर्शक आज भी मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। गुरु दत्त और वहीदा रहमान जैसे दिग्गजों से सजी इस फिल्म में मीना कुमारी के अभिनय और उनकी भाव-भंगिमाओं ने इस गीत को अमर बना दिया।
गीता दत्त की जादुई आवाज और बेहतरीन टीम
इस खूबसूरत गीत को अपनी जादुई और रूहानी आवाज से सजाया था मशहूर पार्श्व गायिका गीता दत्त ने। उनकी गायकी ने इस गाने में ऐसी जान फूंकी कि यह पीढ़ियों से लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है। फिल्म का निर्देशन अबरार अल्वी ने किया था, जबकि इसके शानदार और अर्थपूर्ण बोल महान शायर शकील बदायूंनी ने लिखे थे। इसके संगीत और खूबसूरत शब्दों की वजह से यह गाना आज भी ढोलक की थाप पर महिलाओं द्वारा परफॉर्म किए जाने वाले गानों में पहली पसंद बना हुआ है। इस गीत पर शानदार एक्सप्रेशन और एक्सप्रेशन के साथ किया गया डांस आज भी शादियों के माहौल को जीवंत कर देता है।
संगीत के स्वर्ण युग की अनमोल धरोहर
बॉलीवुड में कई ऐसे गीत हैं जिन्हें आज भी उत्सवों में बड़े चाव से बजाया जाता है, लेकिन मीना कुमारी पर फिल्माया गया यह गाना अपने आप में अनूठा है। गीतकार शकील बदायूंनी को हिंदी सिनेमा के संगीत स्वर्ण युग का महान शायर माना जाता है, जिन्होंने संगीतकार नौशाद के साथ मिलकर कई ऐतिहासिक और सदाबहार नगमे देश को दिए। आज भले ही सिनेमा का दौर बदल गया हो और आधुनिक गानों की भरमार हो, लेकिन मीना कुमारी के इस क्लासिक गीत का जादू आज भी शादी-ब्याह के सीजन में सिर चढ़कर बोलता है और पुरानी यादों को ताजा कर देता है।





