
मनोरंजन: भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ गाने ऐसे होते हैं, जिनकी लोकप्रियता समय के साथ और बढ़ती जाती है। 60 के दशक में बने ऐसे ही एक सदाबहार गीत ने आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में अपनी खास जगह बना रखी है। स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की जादुई आवाज में सजा यह गाना आज भी लोगों को अपनी धुन और खूबसूरत फिल्मांकन से मंत्रमुग्ध कर देता है।
यह गीत 1965 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म ‘जब-जब फूल खिले’ का है। फिल्म का गाना ‘ये समा, समा है ये प्यार का’ आज भी बॉलीवुड के रोमांटिक क्लासिक गानों में गिना जाता है। इस गीत को लता मंगेशकर ने अपनी मधुर आवाज दी थी, जबकि इसके बोल मशहूर गीतकार आनंद बख्शी ने लिखे थे और संगीत कल्याणजी-आनंदजी की जोड़ी ने तैयार किया था।
इस गाने की खासियत सिर्फ इसकी खूबसूरत धुन ही नहीं थी, बल्कि इसका फिल्मांकन भी दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ था। गाने में अभिनेत्री नंदा ने सफेद सैटिन गाउन पहनकर अपनी खूबसूरती और अदाओं से ऐसा जादू बिखेरा था कि उनका यह अंदाज आज भी याद किया जाता है।
गाने की शूटिंग कश्मीर की मशहूर डल झील पर एक हाउसबोट में की गई थी। पानी के बीच हाउसबोट पर फिल्माया गया यह रोमांटिक सीक्वेंस उस दौर के लिए काफी अनोखा माना जाता था। माना जाता है कि इसी तरह के खूबसूरत बोट सीक्वेंस ने बाद की कई फिल्मों में रोमांटिक दृश्यों के लिए एक नया ट्रेंड भी बनाया।
फिल्म में यह गाना अभिनेत्री नंदा और अभिनेता शशि कपूर पर फिल्माया गया था। गाने में शशि कपूर का किरदार नंदा को निहारते हुए नजर आता है, जबकि पूरी कहानी नंदा की खूबसूरती और भावनाओं के इर्द-गिर्द घूमती है। लता मंगेशकर की आवाज, आनंद बख्शी के भावपूर्ण शब्द और कश्मीर की खूबसूरत वादियों ने इस गाने को अमर बना दिया।
‘ये समा, समा है ये प्यार का’ के अलावा फिल्म ‘जब-जब फूल खिले’ का संगीत भी काफी लोकप्रिय रहा था। इस फिल्म में मोहम्मद रफी का गाया हुआ गीत ‘परदेसियों से न अंखियां मिलाना’ भी काफी बड़ा हिट साबित हुआ था। फिल्म की कहानी, कलाकारों का अभिनय और संगीत ने इसे बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता दिलाई थी।
लता मंगेशकर ने अपने लंबे करियर में हजारों गाने गाए, जिनमें से कई गीत भारतीय संगीत की विरासत बन चुके हैं। उनके गाए रोमांटिक, भावनात्मक और देशभक्ति गीत आज भी नई पीढ़ी के बीच लोकप्रिय हैं। ‘ये समा, समा है ये प्यार का’ भी उन्हीं गीतों में शामिल है, जिसने कई दशक बाद भी अपनी मिठास और आकर्षण को बनाए रखा है।
आज के दौर में जहां संगीत तेजी से बदल रहा है, वहीं 61 साल पुराना यह गीत साबित करता है कि अच्छे बोल, मधुर संगीत और शानदार प्रस्तुति कभी पुराने नहीं होते। लता मंगेशकर की आवाज का जादू और नंदा की खूबसूरत अदाएं इस गाने को हमेशा के लिए यादगार बना चुकी हैं।





