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Entertainment : बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा, जहीर इकबाल और अंकित गुप्ता की साइकोलॉजिकल-थ्रिलर फिल्म 'तू है मेरी किरण' शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। करण रावल के निर्देशन में बनी यह फिल्म प्यार, जुनून, डर और रहस्य की एक अलग कहानी पेश करती है। फिल्म में सोनाक्षी और जहीर की जोड़ी दर्शकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। हालांकि, दिलचस्प कहानी और नए प्रयोग के बावजूद फिल्म को समीक्षकों से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिली हैं। कुछ समीक्षकों ने इसके सस्पेंस और माहौल की तारीफ की है, जबकि कुछ ने कमजोर पटकथा और उलझे हुए घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं।
क्या है फिल्म 'तू है मेरी किरण' की कहानी?
फिल्म की कहानी किरण नाम की एक महिला के इर्द-गिर्द घूमती है। सोनाक्षी सिन्हा ने किरण का किरदार निभाया है, जो एक लेखिका है और अपने पति रियान के साथ खुशहाल जिंदगी बिता रही है। रियान की भूमिका अभिनेता अंकित गुप्ता ने निभाई है।
कहानी में बड़ा मोड़ उस समय आता है, जब किरण को अपने घर में एक पुराना मोबाइल फोन मिलता है। यह कोई सामान्य फोन नहीं होता, बल्कि इसके जरिए उसका संपर्क समर नाम के एक युवक से होता है।समर का किरदार जहीर इकबाल ने निभाया है। दिलचस्प बात यह है कि यह फोन अलग-अलग समय में रह रहे दो लोगों को आपस में जोड़ देता है।
शुरुआत में दोनों की बातचीत सामान्य लगती है, लेकिन धीरे-धीरे समर का व्यवहार बदलने लगता है। उसका आकर्षण खतरनाक जुनून का रूप लेने लगता है और किरण की जिंदगी में परेशानियां बढ़ने लगती हैं।इसके बाद कहानी में कई रहस्यमयी घटनाएं सामने आती हैं। किरण को यह समझना मुश्किल होने लगता है कि उसके आसपास आखिर क्या हो रहा है और समर उसकी जिंदगी को किस तरह प्रभावित कर रहा है।
सोनाक्षी सिन्हा का अभिनय कैसा है?
सोनाक्षी सिन्हा फिल्म में एक ऐसी महिला के किरदार में हैं, जिसकी सामान्य जिंदगी अचानक डर और अनिश्चितता से भर जाती है।उनका किरदार शुरुआत में आत्मविश्वास से भरा दिखाई देता है, लेकिन कहानी आगे बढ़ने के साथ वह मुश्किल परिस्थितियों का सामना करती है।सोनाक्षी ने अपने अभिनय के जरिए किरण की उलझन, भय और भावनात्मक संघर्ष को दिखाने की कोशिश की है।हालांकि, कमजोर लेखन के कारण कई जगह उनके किरदार का प्रभाव सीमित रह जाता है। फिल्म में उन्हें अभिनय दिखाने के अवसर मिलते हैं, लेकिन कहानी हर बार उनके प्रदर्शन को पर्याप्त मजबूती नहीं दे पाती।
जहीर इकबाल ने निभाया जुनूनी प्रेमी का किरदार
फिल्म में जहीर इकबाल का किरदार समर सबसे महत्वपूर्ण पात्रों में शामिल है। समर एक ऐसा युवक है, जिसका प्यार धीरे-धीरे खतरनाक जुनून में बदलने लगता है।वह किरण के प्रति इतना आकर्षित हो जाता है कि उसकी निजी जिंदगी में दखल देने लगता है।जहीर ने किरदार के सामान्य और परेशान करने वाले दोनों पहलुओं को निभाने का प्रयास किया है। खासकर जब समर का व्यवहार अस्थिर होने लगता है, तब कहानी में तनाव बढ़ता है।हालांकि, समीक्षकों के अनुसार, किरदार को भावनात्मक रूप से समझाने की कोशिश कई बार उसके खतरनाक व्यवहार की गंभीरता को कमजोर कर देती है।
अंकित गुप्ता का किरदार कितना प्रभावशाली?
अभिनेता अंकित गुप्ता फिल्म में किरण के पति रियान की भूमिका निभा रहे हैं। उनका किरदार कहानी के पारिवारिक और भावनात्मक पक्ष को आगे बढ़ाता है।किरण और रियान का रिश्ता कहानी की शुरुआत में सामान्य दिखाई देता है, लेकिन समर के आने के बाद परिस्थितियां बदलने लगती हैं।अंकित का किरदार कहानी में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। हालांकि, फिल्म का मुख्य ध्यान किरण और समर के बीच पैदा होने वाले रहस्य और तनाव पर केंद्रित रहता है।फिल्म में शर्लिन सेठ, जरीना वहाब और पूर्णेंदु भट्टाचार्य भी अन्य भूमिकाओं में दिखाई देते हैं।
निर्देशक करण रावल का नया प्रयोग
करण रावल ने इस फिल्म में रोमांस और साइकोलॉजिकल-थ्रिलर को एक साथ जोड़ने की कोशिश की है।फिल्म की सबसे दिलचस्प बात अलग-अलग समय में मौजूद दो व्यक्तियों को एक पुराने मोबाइल फोन से जोड़ने का विचार है।यह अवधारणा दर्शकों के मन में जिज्ञासा पैदा करती है। आखिर एक फोन समय की सीमाओं को कैसे पार कर सकता है और इसका किरण की जिंदगी पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यही सवाल कहानी को आगे बढ़ाते हैं।निर्देशक ने रहस्य बनाए रखने का प्रयास किया है, लेकिन पटकथा में कुछ ऐसे घटनाक्रम हैं, जिनके लिए दर्शकों को तर्क से समझौता करना पड़ सकता है।कई दृश्यों में कहानी रोचक बनती है, जबकि कुछ हिस्से अनावश्यक रूप से उलझे हुए महसूस होते हैं।
कमजोर पटकथा बनी फिल्म की सबसे बड़ी परेशानी
'तू है मेरी किरण' के पास एक दिलचस्प विचार है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी कमजोरी कहानी को प्रभावशाली ढंग से आगे नहीं बढ़ा पाना है।फिल्म में समय, रिश्तों और जुनूनी प्रेम को जोड़ने की कोशिश की गई है। हालांकि, इन सभी पहलुओं के बीच संतुलन हर जगह कायम नहीं रहता।
कुछ मोड़ दर्शकों को हैरान कर सकते हैं, लेकिन कई घटनाएं पर्याप्त स्पष्टता के बिना सामने आती हैं।इस वजह से फिल्म का सस्पेंस कभी रोमांच पैदा करता है, तो कभी कहानी को जरूरत से ज्यादा जटिल बना देता है।कुछ समीक्षाओं में इसकी लेखन संबंधी कमजोरियों की आलोचना हुई है, जबकि अन्य समीक्षकों ने तनावपूर्ण माहौल बनाए रखने की निर्देशक की क्षमता को सराहा है।
शाहरुख खान की 'डर' की याद दिलाती है फिल्म
फिल्म का शीर्षक सुनते ही दर्शकों को शाहरुख खान की 1993 में रिलीज हुई फिल्म 'डर' याद आ सकती है।'डर' में भी एकतरफा प्यार के खतरनाक जुनून को दिखाया गया था। 'तू है मेरी किरण' भी प्रेम और जुनून के बीच की सीमाओं पर सवाल उठाती है।हालांकि, दोनों फिल्मों की कहानियां अलग हैं। नई फिल्म में पुराने मोबाइल फोन और समय के रहस्य को जोड़कर विषय को नए अंदाज में प्रस्तुत किया गया है।
रिलीज से पहले कानूनी विवाद में फंसी थी फिल्म
'तू है मेरी किरण' अपनी रिलीज से पहले कानूनी विवाद के कारण भी चर्चा में रही।फिल्म के सह-निर्माताओं के बीच लगभग 8.85 करोड़ रुपये के वित्तीय विवाद को लेकर मामला बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा था।अदालत ने 19 अक्टूबर को अंतरिम आदेश पारित किया था, जिससे फिल्म की रिलीज पर अनिश्चितता पैदा हो गई थी।हालांकि, बाद में निर्माताओं विशाल राणा और सर्वेश गोयल ने विवाद का समाधान होने की जानकारी दी और निर्धारित तारीख पर फिल्म रिलीज करने की घोषणा की।
फिल्म देखें या नहीं?
अगर आपको साइकोलॉजिकल-थ्रिलर, रहस्यमयी कहानियां और रिश्तों के अंधेरे पहलुओं पर आधारित फिल्में पसंद हैं, तो 'तू है मेरी किरण' आपके लिए एक विकल्प हो सकती है।फिल्म का अनोखा विचार, सोनाक्षी-जहीर की जोड़ी और रहस्यपूर्ण माहौल इसकी प्रमुख खूबियां हैं।वहीं, कमजोर पटकथा, कुछ अविश्वसनीय घटनाक्रम और पात्रों के व्यवहार को पर्याप्त स्पष्टता से प्रस्तुत न कर पाना इसकी कमियां हैं।
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