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पहली पुण्यतिथि पर याद किए गए जुबीन गर्ग, प्रशंसकों ने दी श्रद्धांजलि

nidhi
19 Sept 2026 2:12 PM IST
पहली पुण्यतिथि पर याद किए गए जुबीन गर्ग, प्रशंसकों ने दी श्रद्धांजलि
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सोनापुर में गूंजीं जुबीन गर्ग की यादें
गुवाहाटी: असम के लोकप्रिय गायक और संगीतकार ज़ुबीन गर्ग की पहली पुण्यतिथि पर शनिवार, 19 सितंबर को बड़ी संख्या में प्रशंसक, कलाकार और उनके परिवार के सदस्य उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए सोनापुर स्थित ज़ुबीन क्षेत्र पहुंचे। गुवाहाटी के बाहरी इलाके में बने स्मारक स्थल पर सुबह से ही लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। प्रशंसकों ने उनके गीत गाकर और पुष्प अर्पित कर अपने प्रिय कलाकार को याद किया।
ज़ुबीन गर्ग का निधन 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में हुआ था। उनके निधन के एक साल बाद भी असम में उनके प्रति लोगों का भावनात्मक जुड़ाव दिखाई दिया। पहली पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) के सदस्य भी शामिल हुए। स्मारक पर पहुंचे कई प्रशंसकों ने पारंपरिक असमिया गमछा और फूल अर्पित किए।
ज़ुबीन गर्ग की याद में असम सरकार के सांस्कृतिक मामलों के विभाग की ओर से तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम 17 सितंबर से शुरू हुआ और 19 सितंबर को उनकी पहली पुण्यतिथि पर संपन्न हुआ। इस दौरान प्रार्थना, संगीत और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए उनके जीवन और संगीत को याद किया गया।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान ज़ुबीन के लोकप्रिय गीत भी गूंजते रहे। उनके प्रशंसकों के साथ कई कलाकारों ने उनकी संगीत यात्रा और असमिया संस्कृति में उनके योगदान को याद किया। ज़ुबीन ने अपने लंबे संगीत करियर में कई भाषाओं में हजारों गीत रिकॉर्ड किए थे और असमिया संगीत को व्यापक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
असम से बाहर भी ज़ुबीन गर्ग को खास पहचान हिंदी फिल्म ‘गैंगस्टर’ के चर्चित गीत ‘या अली’ से मिली थी। इसके बावजूद उनका असमिया संगीत, भाषा और संस्कृति से गहरा जुड़ाव बना रहा। पारंपरिक असमिया संगीत और आधुनिक धुनों के मेल ने उन्हें पूर्वोत्तर भारत के सबसे चर्चित कलाकारों में शामिल किया।
पुण्यतिथि पर AASU के मुख्य सलाहकार डॉ. समुज्जल भट्टाचार्य ने ज़ुबीन को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी मौत से जुड़े मामले में न्याय की मांग दोहराई। AASU अध्यक्ष उत्पल सरमा ने उनके सामाजिक योगदान को भी याद किया और कहा कि आने वाली पीढ़ियों तक ज़ुबीन की कला और मानवीय विरासत को पहुंचाया जाना चाहिए।
पहली पुण्यतिथि पर सोनापुर का ज़ुबीन क्षेत्र केवल एक स्मारक स्थल नहीं, बल्कि प्रशंसकों की यादों और भावनाओं का केंद्र बना नजर आया। गीतों, फूलों और श्रद्धांजलियों के बीच लोगों ने अपने पसंदीदा कलाकार को याद किया और उनकी संगीत विरासत को आगे ले जाने का संकल्प दोहराया।
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