लद्दाख
लद्दाख में शांति की पहल लेह हिंसा से जुड़े 20 लोगों के केस होंगे वापस
Ratna Netam
23 Sept 2026 9:59 PM IST

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लेह। लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने पिछले साल 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा से जुड़े 20 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले वापस लेने की मंजूरी दे दी है। उपराज्यपाल ने इस फैसले के पीछे केंद्र शासित प्रदेश में शांति, सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के व्यापक हित का हवाला दिया है। लद्दाख प्रशासन पहले भी सितंबर 2025 की घटना से जुड़े मामलों को वापस लेने और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने के मुद्दे पर विचार किए जाने की जानकारी दे चुका था।उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने बुधवार को अपने बयान में कहा कि लद्दाख में शांति, सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव के व्यापक हित को देखते हुए उन्होंने पिछले वर्ष 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा से जुड़े 20 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले वापस लेने की मंजूरी दी है।उन्होंने बताया कि मामले की विस्तृत समीक्षा के बाद लद्दाख पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 360 के तहत संबंधित लोगों के मामलों को बंद करने की सिफारिश की थी। उपराज्यपाल की मंजूरी के बाद अब कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
24 सितंबर 2025 को हुई थी हिंसा
लेह में 24 सितंबर 2025 को गंभीर कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हुई थी। लद्दाख प्रशासन के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक इस दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद चार लोगों की मौत हुई थी। घटना में कई लोग घायल भी हुए थे। इसके बाद केंद्र सरकार ने पूरे घटनाक्रम की न्यायिक जांच कराने का फैसला किया था।तत्कालीन उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने घटना के बाद हिंसा की निंदा करते हुए लोगों से शांति और एकता बनाए रखने की अपील की थी। प्रशासन ने उस समय बताया था कि पथराव और आगजनी की घटनाओं के कारण सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा।25 सितंबर 2025 को प्रशासन ने बताया था कि हिंसा के बाद कुल 90 लोगों को एसएनएम अस्पताल लाया गया था। चार लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य को गंभीर और सामान्य चोटें आई थीं।
न्यायिक जांच भी कराई गई
घटना की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अक्टूबर 2025 में न्यायिक जांच का आदेश दिया था। जांच की जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बीएस चौहान की अध्यक्षता वाले आयोग को सौंपी गई थी।आयोग को तीन प्रमुख पहलुओं की जांच करनी थी—24 सितंबर को गंभीर कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा होने की परिस्थितियां, पुलिस की कार्रवाई और इसके परिणामस्वरूप हुई चार लोगों की मौत। आयोग ने 27 अक्टूबर 2025 से अपनी कार्यवाही शुरू की थी।जांच आयोग ने घटना के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों, संगठनों और प्रत्यक्षदर्शियों से मौखिक, लिखित और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी मांगे थे। इसका उद्देश्य घटना से जुड़ी परिस्थितियों और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच करना था।
गिरफ्तार लोगों को धीरे-धीरे मिली थी जमानत
अक्टूबर 2025 में लद्दाख प्रशासन ने बताया था कि हिंसा के बाद गिरफ्तार किए गए ज्यादातर लोगों को जमानत मिल चुकी थी, जबकि शेष लोग न्यायिक हिरासत में थे। प्रशासन ने उस समय भी लोगों से शांति बनाए रखने और मुद्दों का समाधान बातचीत के माध्यम से करने की अपील की थी।अब 20 लोगों के खिलाफ मामले वापस लेने की मंजूरी को प्रशासन की ओर से तनाव कम करने और संवाद का माहौल मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदम के रूप में पेश किया गया है।
सितंबर में ही आगे बढ़ा था मामला
मामले वापस लेने का मुद्दा अचानक सामने नहीं आया है। लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने 10 सितंबर 2026 को मीडिया को जानकारी देते हुए कहा था कि 24 सितंबर की घटना से संबंधित मामलों की वापसी और प्रभावित परिवारों के मुआवजे से जुड़े विषय उपराज्यपाल के विचार के लिए भेजे गए हैं।इसी दौरान लद्दाख की संवैधानिक और विधायी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी जारी रही। प्रशासन का कहना है कि इन मुद्दों को बातचीत और आम सहमति के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा।
संवाद पर जोर देते रहे हैं सक्सेना
विनय कुमार सक्सेना वर्तमान में लद्दाख के उपराज्यपाल हैं। मार्च 2026 में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत समाप्त करने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए सक्सेना ने कहा था कि लद्दाख से जुड़े मुद्दों को रचनात्मक संवाद और आपसी समझ के जरिए हल किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन की ओर से सभी हितधारकों के साथ बातचीत जारी रखने की प्रतिबद्धता भी जताई थी।इसी पृष्ठभूमि में अब 20 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामलों की वापसी को मंजूरी दी गई है।
लद्दाख में राजनीतिक संवाद भी जारी
लद्दाख में पिछले कुछ वर्षों से संवैधानिक सुरक्षा, भूमि और रोजगार संबंधी अधिकारों सहित कई मांगों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की गतिविधियां जारी हैं। सितंबर 2026 में गृह मंत्रालय के अधिकारियों और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच भी बातचीत हुई थी। इसमें एपेक्स बॉडी लेह और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के प्रतिनिधि शामिल हुए थे।प्रशासन ने कहा है कि लद्दाख के लिए किसी भी व्यवस्था को स्थानीय हितधारकों से परामर्श के बिना लागू नहीं किया जाएगा और बातचीत की प्रक्रिया जारी रखी जाएगी।20 लोगों के खिलाफ मामलों की वापसी की मंजूरी इसी व्यापक राजनीतिक और प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच आई है। हालांकि मंजूरी मिलने के बाद भी संबंधित मामलों को बंद करने की औपचारिक कानूनी प्रक्रिया लागू कानून के अनुसार पूरी की जाएगी।उपराज्यपाल ने अपने फैसले में शांति, सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव को प्राथमिक आधार बताया है। सितंबर 2025 की हिंसा के करीब एक साल बाद उठाया गया यह कदम प्रशासन और स्थानीय समुदाय के बीच विश्वास तथा संवाद बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
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