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अरुणाचल प्रदेश
भारत के पहले नदी काइनेटिक एनर्जी डेमोंस्ट्रेशन प्लांट के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किया
SHIDDHANT
15 July 2026 12:04 AM IST

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Arunachal Pradesh अरुणाचल प्रदेश: सरकार ने मंगलवार को नॉर्वे की कंपनी 'टाइडल सेल एएस' के साथ 500-किलोवॉट के 'रिवर काइनेटिक एनर्जी डेमोंस्ट्रेशन प्रोजेक्ट' को लागू करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इससे पूर्वोत्तर राज्य में भारत के पहले 'रिवर काइनेटिक एनर्जी डेमोंस्ट्रेशन प्लांट' की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है। भारत-नॉर्वे ग्रीन पार्टनरशिप के तहत सेंटर फॉर अर्थ साइंसेज एंड हिमालयन स्टडीज, अरुणाचल प्रदेश सरकार और टाइडल सेल एएस के बीच एक एमओयू पर साइन किए गए।
ईटानगर में अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) और इनोवेशन नॉर्वे के सहयोग से चलने वाला यह प्रोजेक्ट ऐसी टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन करेगा जो बिना किसी बड़े सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर के सीधे नदी की धाराओं से बिजली पैदा करती है। यह पर्यावरण के अनुकूल और किफायती नवीकरणीय ऊर्जा समाधान प्रदान करेगा। नई दिल्ली में साइनिंग सेरेमनी के दौरान मौजूद राज्य की विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री दासांगलू पुल ने इस समझौते को अरुणाचल प्रदेश के स्वच्छ ऊर्जा बदलाव में एक मील का पत्थर बताया।
उन्होंने कहा कि यह साझेदारी इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। पुल ने कहा कि राज्य की विशाल नदी प्रणालियों में नवीकरणीय ऊर्जा की अपार संभावनाएं हैं और भरोसा जताया कि यह प्रोजेक्ट प्राकृतिक संसाधनों के पर्यावरण-अनुकूल उपयोग को सुनिश्चित करते हुए ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा। उन्होंने इस पहल का समर्थन करने के लिए एमएनआरई, विदेश मंत्रालय, रॉयल नॉर्वेजियन दूतावास, इनोवेशन नॉर्वे, टाइडल सेल एएस और अन्य सहयोगी संस्थानों का भी धन्यवाद किया।
भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश की नदी प्रणालियां इसे नदी काइनेटिक ऊर्जा टेक्नोलॉजी के प्रदर्शन के लिए एक आदर्श स्थान बनाती हैं, जो मौजूदा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की पूरक हो सकती है और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ा सकती है। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट जियोथर्मल ऊर्जा, जियोटेक्निकल इंजीनियरिंग और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में नॉर्वे और अरुणाचल प्रदेश के बीच बढ़ते सहयोग को दर्शाता है, जो ग्रीन टेक्नोलॉजी और ज्ञान साझेदारी को बढ़ावा देने के प्रति नॉर्वे की प्रतिबद्धता को फिर से पुष्ट करता है।
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