असम

हनी ट्रैप गैंग का भंडाफोड़ दो महिलाओं समेत पांच गिरफ्तार

Ratna Netam
7 Oct 2026 6:37 PM IST
हनी ट्रैप गैंग का भंडाफोड़ दो महिलाओं समेत पांच गिरफ्तार
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जोरहाट। असम के जोरहाट जिले में पुलिस ने हनी-ट्रैपिंग और जबरन वसूली के एक कथित रैकेट का पर्दाफाश किया है। मामले में दो महिलाओं समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार गिरोह ने तिनसुकिया के एक निजी बैंक मैनेजर को सोशल मीडिया के जरिए कथित रूप से जाल में फंसाया, उसके निजी पलों का वीडियो बनाया और फिर उसे ब्लैकमेल कर पैसे की मांग की।मामले का खुलासा तब हुआ जब बैंक मैनेजर ने 2 अक्टूबर को जोरहाट पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि कुछ लोगों के एक समूह ने उसे योजनाबद्ध तरीके से फंसाया और बाद में निजी वीडियो के आधार पर ब्लैकमेल किया। इसके बाद जोरहाट पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपियों की गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई।
जोरहाट सदर पुलिस स्टेशन के प्रभारी ऋषिकेश हजारिका के अनुसार, शिकायतकर्ता का संपर्क जुलाई में इंस्टाग्राम के जरिए एक महिला से हुआ था। शुरुआत में दोनों के बीच सोशल मीडिया पर बातचीत हुई और धीरे-धीरे संपर्क बढ़ता गया। पुलिस का आरोप है कि इसी संपर्क को बाद में हनी-ट्रैपिंग के लिए इस्तेमाल किया गया।जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक महिला सोशल मीडिया पर ऐसे लोगों से संपर्क बनाती थी, जिन्हें आर्थिक रूप से सक्षम माना जाता था। कुछ समय तक बातचीत करने के बाद मुलाकात तय की जाती थी। पुलिस का आरोप है कि इसके बाद गिरोह के अन्य सदस्य निजी पलों को गुप्त रूप से रिकॉर्ड करते थे और वीडियो का इस्तेमाल ब्लैकमेल के लिए किया जाता था।
पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें दो महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं। अलग-अलग स्थानीय रिपोर्टों में आरोपियों के नामों की वर्तनी में कुछ अंतर सामने आया है, लेकिन पुलिस जांच में पांच लोगों की भूमिका की बात कही गई है।एक स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में मोरोमी दास नियोग, बेबी बोरा, अंकित पूल, संजीब दास और अंकित बोरा उर्फ बेम्बो शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि इनमें से कुछ आरोपी आपस में परिचित थे और संगठित तरीके से कथित रैकेट चला रहे थे। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इनके संपर्क में और कितने लोग आए थे।
पुलिस के मुताबिक बैंक मैनेजर से पहले करीब तीन लाख रुपये वसूले गए थे। आरोप है कि इसके बाद उससे पांच लाख रुपये और मांगे गए। लगातार बढ़ती मांग और ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर पीड़ित ने पुलिस से संपर्क किया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए कार्रवाई शुरू की।मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में ऑपरेशन चलाया गया। पुलिस ने जानकारी के आधार पर एक किराए के मकान पर कार्रवाई की और कथित गिरोह से जुड़े लोगों को हिरासत में लिया। पूछताछ और प्रारंभिक जांच के बाद पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस को आशंका है कि यह मामला केवल एक बैंक मैनेजर तक सीमित नहीं हो सकता। जांच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि आरोपियों ने इससे पहले भी इसी तरीके से अन्य लोगों को निशाना बनाया था या नहीं। इसके लिए उनके मोबाइल फोन, सोशल मीडिया खातों, कॉल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है।जांच का एक अहम हिस्सा सोशल मीडिया गतिविधियां भी हैं। पुलिस यह पता लगा रही है कि किन-किन सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए संभावित पीड़ितों से संपर्क किया गया और क्या इसके लिए फर्जी पहचान या अलग-अलग प्रोफाइल का इस्तेमाल किया गया था। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कथित निजी वीडियो कहां रिकॉर्ड किए गए और उन्हें किन उपकरणों में रखा गया था।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल उपकरणों की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि गिरोह कितने समय से सक्रिय था। यदि मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूसरे पीड़ितों से जुड़ी सामग्री मिलती है तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।मामले ने सोशल मीडिया के जरिए बनने वाले संपर्कों से जुड़े जोखिम पर भी ध्यान खींचा है। पुलिस आमतौर पर ऐसे मामलों में लोगों को अनजान सोशल मीडिया प्रोफाइल से निजी जानकारी साझा करने और जल्दबाजी में मुलाकात करने से बचने की सलाह देती है। निजी फोटो या वीडियो के आधार पर ब्लैकमेल किए जाने की स्थिति में पैसे देने के बजाय तत्काल पुलिस या साइबर अपराध इकाई से संपर्क करना जरूरी माना जाता है।
जोरहाट पुलिस फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश में है कि कथित रैकेट में कोई और व्यक्ति भी शामिल था या नहीं और अब तक कुल कितनी रकम की वसूली की गई। इसके साथ ही संभावित अन्य पीड़ितों की पहचान करने की कोशिश भी की जा रही है।पुलिस ने अभी जांच पूरी होने से पहले किसी आरोपी को दोषी घोषित नहीं किया है। सभी आरोप फिलहाल जांच के दायरे में हैं। मामले में इलेक्ट्रॉनिक और वित्तीय साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं, जिसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।तिनसुकिया के बैंक मैनेजर की शिकायत से शुरू हुई जांच ने अब कथित संगठित हनी-ट्रैपिंग नेटवर्क का रूप ले लिया है। पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ यह साफ हो सकेगा कि गिरोह का दायरा कितना बड़ा था और क्या इससे जुड़े अन्य मामले भी सामने आते हैं।
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