असम
प्रचार के अंतिम दिन नागांव में NDA ने निकाली बूथ स्तरीय पदयात्राएं
Ratna Netam
4 Oct 2026 8:07 PM IST

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नागांव। असम की नागांव लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए प्रचार के अंतिम दिन भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने बड़े पैमाने पर बूथ स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलाया। पार्टी की ओर से जारी बयान के मुताबिक, लोकसभा क्षेत्र के सभी 2,309 मतदान बूथों पर एक साथ पदयात्राओं का आयोजन किया गया, जिनमें बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक और स्थानीय लोग शामिल हुए। इससे पहले भी भाजपा ने सभी बूथों पर एक साथ पदयात्रा आयोजित करने की योजना की जानकारी दी थी।
पार्टी के बयान के अनुसार, अंतिम दिन के प्रचार अभियान को बूथ स्तर तक पहुंचाने के लिए पहले से व्यापक तैयारियां की गई थीं। अलग-अलग इलाकों में भाजपा और NDA से जुड़े कार्यकर्ताओं ने पदयात्रा निकालकर मतदाताओं से संपर्क किया। कार्यकर्ता हाथों में केसरिया झंडे लेकर निकले और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, भाजपा की असम इकाई के अध्यक्ष दिलीप सैकिया और NDA उम्मीदवार देबाशीष शर्मा के समर्थन में नारे लगाए।
भाजपा ने प्रचार के अंतिम चरण में बूथ स्तर के संगठन को सक्रिय करने पर खास जोर दिया। नागांव संसदीय क्षेत्र में कुल आठ विधानसभा क्षेत्र आते हैं और NDA ने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान इन सभी क्षेत्रों में अपनी गतिविधियां बढ़ाईं। पार्टी के अनुसार, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने चुनाव अभियान के दौरान सभी आठ विधानसभा क्षेत्रों को कवर करते हुए 15 जनसभाओं को संबोधित किया।
प्रचार अभियान में मुख्यमंत्री के अलावा केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया और NDA के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी भाग लिया। पार्टी की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पूरे संसदीय क्षेत्र में 1,100 से अधिक छोटी-बड़ी बैठकें कीं। इन कार्यक्रमों के जरिए NDA उम्मीदवार देबाशीष शर्मा के पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश की गई।
इस चुनाव में भाजपा ने देबाशीष शर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया है। शर्मा पूर्व प्रशासनिक अधिकारी हैं और सितंबर में भाजपा में शामिल होने के कुछ ही दिनों बाद उन्हें नागांव लोकसभा उपचुनाव का टिकट दिया गया था। नागांव सीट पर मतदान 6 अक्टूबर को होना है, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को निर्धारित है।
प्रचार के दौरान भाजपा ने बड़े नेताओं की रैलियों के साथ घर-घर संपर्क और छोटी बैठकों की रणनीति भी अपनाई। पार्टी के मुताबिक, नागांव और मोरीगांव जिलों की 25 मंडल समितियों ने व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया। इसके तहत 5,000 से अधिक आंगन बैठकों का आयोजन करने का दावा किया गया। पार्टी के विभिन्न मोर्चों ने भी अपने स्तर पर मतदाताओं तक पहुंचने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए।
भाजपा की महिला, युवा, अल्पसंख्यक, किसान, ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति इकाइयों को भी चुनाव प्रचार में सक्रिय किया गया। पार्टी के अनुसार, अलग-अलग मोर्चों की ओर से 9,500 से अधिक आंगन बैठकों का आयोजन किया गया। इस रणनीति के जरिए विभिन्न सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने की कोशिश की गई।
अंतिम दिन की पदयात्राओं को भी इसी बूथ केंद्रित रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। भाजपा ने पहले घोषणा की थी कि सभी 2,309 बूथ समितियां सुबह 11 बजे से एक साथ पदयात्राएं निकालेंगी, जिनमें पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ स्थानीय समर्थकों और मतदाताओं की भागीदारी होगी।
पार्टी ने अपने बयान में पदयात्राओं में हुई भागीदारी को चुनाव अभियान के दौरान NDA को मिले समर्थन से जोड़ा है। हालांकि, किसी भी चुनावी कार्यक्रम में जुटी भीड़ को मतदान के नतीजे का संकेत नहीं माना जा सकता और अंतिम फैसला मतदाता मतदान के जरिए करेंगे।
नागांव उपचुनाव में भाजपा और NDA ने बड़े नेताओं की जनसभाओं से लेकर मंडल, बूथ और घर-घर संपर्क तक बहुस्तरीय प्रचार रणनीति अपनाई। अंतिम दिन एक साथ हजारों बूथों पर पदयात्रा आयोजित करना इसी रणनीति का प्रमुख हिस्सा रहा।
चुनाव प्रचार के दौरान NDA उम्मीदवार के समर्थन में केंद्रीय और राज्य स्तर के कई नेताओं ने जनसभाएं कीं। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी नागांव में चुनावी कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर देबाशीष शर्मा के लिए समर्थन मांगा था।
अब चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद राजनीतिक दलों का ध्यान मतदान पर केंद्रित हो गया है। 6 अक्टूबर को नागांव लोकसभा क्षेत्र के मतदाता उम्मीदवारों के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेंगे। इसके बाद 9 अक्टूबर को मतगणना के साथ उपचुनाव का परिणाम सामने आएगा।
प्रचार के आखिरी दिन 2,309 बूथों पर आयोजित पदयात्राओं के जरिए भाजपा-NDA ने अपने बूथ नेटवर्क और कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने की कोशिश की। पार्टी ने इसे व्यापक जनभागीदारी के रूप में पेश किया है। अब यह देखना होगा कि चुनाव प्रचार के दौरान किए गए जनसंपर्क और बूथ स्तर की गतिविधियों का मतदान में किस तरह असर दिखाई देता है।
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