
बेतिया। पश्चिम चंपारण जिले के अनुमंडलीय अस्पताल में बुधवार देर रात एंबुलेंस नहीं मिलने को लेकर मरीज के परिजनों ने जमकर हंगामा किया। मामला गांधीनगर निवासी बसंत गौड़ से जुड़ा है, जिन्हें सांप काटने के बाद गंभीर हालत में इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी स्थिति गंभीर देखते हुए उन्हें जीएमसीएच बेतिया रेफर कर दिया, लेकिन समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी।
जानकारी के अनुसार, बुधवार देर रात बसंत गौड़ को सांप ने काट लिया था। परिजन उन्हें तत्काल इलाज के लिए अनुमंडलीय अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में डॉक्टर संजय गुप्ता ने मरीज की जांच की और प्राथमिक उपचार शुरू किया। उपचार के दौरान मरीज की हालत गंभीर पाई गई, जिसके बाद डॉक्टर ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें जीएमसीएच बेतिया रेफर कर दिया।
रेफर किए जाने के बाद मरीज को जल्द से जल्द बेतिया मेडिकल कॉलेज ले जाने की जरूरत थी। इसके लिए परिजनों ने अस्पताल परिसर में एंबुलेंस की मांग की, लेकिन काफी प्रयास के बाद भी उन्हें तत्काल एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। इस देरी से मरीज के परिजन परेशान हो गए और अस्पताल परिसर में नाराजगी जताने लगे।
मरीज के स्वजनों का आरोप है कि अस्पताल परिसर में उस समय पांच एंबुलेंस मौजूद थीं, लेकिन उनमें से तीन एंबुलेंस में चालक या संबंधित कर्मी उपलब्ध नहीं थे। उनका कहना है कि गंभीर स्थिति में मरीज को समय पर रेफर किए गए अस्पताल तक पहुंचाना जरूरी था, लेकिन एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं होने से परेशानी का सामना करना पड़ा।
एंबुलेंस नहीं मिलने से नाराज परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने अस्पताल प्रशासन और एंबुलेंस संचालन व्यवस्था पर सवाल उठाए। परिजनों का कहना था कि अगर समय पर मरीज को एंबुलेंस मिल जाती तो उसे जल्द ही बेहतर इलाज के लिए बेतिया ले जाया जा सकता था।
हंगामे की सूचना मिलने के बाद अस्पताल कर्मियों ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया। हालांकि काफी देर तक परिजनों और अस्पताल कर्मियों के बीच बहस होती रही। बाद में किसी तरह मामला शांत कराया गया और मरीज को दूसरे माध्यम से बेतिया ले जाने की व्यवस्था की गई।
बताया जा रहा है कि अनुमंडलीय अस्पताल में एंबुलेंस सेवा जैन प्लस संस्था की ओर से संचालित की जाती है। अस्पताल परिसर में एंबुलेंस उपलब्ध होने के बावजूद चालक और कर्मियों की अनुपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। सांप काटने जैसे मामलों में समय पर इलाज मिलना बेहद जरूरी होता है। देरी होने पर मरीज की जान को खतरा बढ़ सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सांप काटने के मामलों में मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी होता है। ऐसे मामलों में एंबुलेंस सेवा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
परिजनों का कहना है कि अस्पताल में एंबुलेंस रहने के बावजूद उसका लाभ नहीं मिल पाया। उन्होंने मांग की कि ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि आपात स्थिति में मरीजों को तुरंत एंबुलेंस उपलब्ध हो सके।
अस्पताल प्रशासन की ओर से इस मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि एंबुलेंस संचालन व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों से इस संबंध में जानकारी ली जा सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अनुमंडलीय अस्पताल में आने वाले मरीजों को कई बार रेफर किए जाने के बाद परिवहन की समस्या का सामना करना पड़ता है। खासकर रात के समय एंबुलेंस की उपलब्धता बड़ी चुनौती बन जाती है।
इस घटना के बाद अस्पताल की एंबुलेंस व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है। अगर एंबुलेंस उपलब्ध हैं तो उनके लिए चालक और अन्य जरूरी कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि आपात स्थिति में मरीजों को परेशानी न हो।
फिलहाल सांप काटने से पीड़ित बसंत गौड़ को इलाज के लिए बेतिया भेजे जाने की जानकारी है। वहीं, एंबुलेंस नहीं मिलने को लेकर परिजनों की नाराजगी ने स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह घटना बताती है कि केवल अस्पताल में संसाधनों की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका समय पर संचालन और जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचना भी उतना ही जरूरी है।





