बिहार

फर्जी शिक्षिका का मामला गरमाया, वेतन बिल पास करने वालों की भूमिका पर सवाल

nidhi
17 Oct 2026 6:35 AM IST
फर्जी शिक्षिका का मामला गरमाया, वेतन बिल पास करने वालों की भूमिका पर सवाल
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भागलपुर: बिहार के भागलपुर में शिक्षा विभाग के कथित वेतन घोटाले से जुड़ी नई जानकारी सामने आई है। वास्तविक शिक्षक अपने बकाये के भुगतान के लिए कार्यालयों के चक्कर काटते रहे, जबकि कथित फर्जी शिक्षिका के नाम पर दो महीने से भी कम समय में लाखों रुपये भेज दिए गए। सामने आए भुगतान विवरण के अनुसार, तनुश्री नाम की शिक्षिका के रिकॉर्ड से जुड़े तनुजा देवी के बैंक खाते में 53 दिनों के भीतर 13 किस्तों में कुल 6,74,452 रुपये पहुंचे। यह मामला विभाग में सामने आए कुल 98.12 लाख रुपये के कथित फर्जी भुगतान से जुड़ा है।
एक ही दिन में कई बार हुआ भुगतान
भुगतान विवरण में 10 अप्रैल से एक जून के बीच रकम भेजे जाने का उल्लेख है। पांच मई को एक ही दिन में चार भुगतान किए गए। आठ मई और एक जून को भी दो-दो बार राशि भेजी गई। इससे सवाल उठा है कि एक कर्मचारी के नाम पर बार-बार प्रस्तुत बिलों की जांच कैसे हुई। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित रिकॉर्ड को मार्च 2026 में पोर्टल पर दर्ज करते हुए नियुक्ति अप्रैल 2025 की दिखाई गई थी। खाते और शिक्षिका के नाम में अंतर भी सत्यापन प्रक्रिया की जांच का अहम बिंदु है।
डिजिटल रिकॉर्ड की जांच में सामने आया मामला
इस कथित घोटाले की शुरुआती जानकारी मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली यानी एचआरएमएस के आंकड़ों की जांच के दौरान सामने आई थी। आरोप है कि शिक्षा विभाग की स्थापना शाखा से जुड़े एक संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर ने तनुश्री के नाम पर फर्जी शिक्षिका का रिकॉर्ड तैयार किया। इस रिकॉर्ड के आधार पर वेतन और बकाये की राशि जारी होती रही। प्राथमिक जांच में ऑपरेटर अविनाश राज की भूमिका सामने आने की जानकारी दी गई थी। हालांकि, संबंधित व्यक्तियों की अंतिम जिम्मेदारी जांच और न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी।
फर्जी रिकॉर्ड को वैध दिखाने के लिए पहचान और सेवा संबंधी दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप भी सामने आया है। शुरुआती पड़ताल में पैन, स्थायी सेवानिवृत्ति खाता संख्या और बैंक विवरण की जांच की गई। रिपोर्ट के अनुसार, संदिग्ध कार्यशैली को लेकर ऑपरेटर की संविदा जून में समाप्त कर दी गई थी। इसके बाद भी संबंधित आईडी से बड़े वित्तीय लेनदेन होने की बात सामने आई। इससे पोर्टल तक पहुंच, रिकॉर्ड में बदलाव और भुगतान मंजूरी की पूरी प्रक्रिया जांच के दायरे में आ गई।
नियुक्ति के अस्तित्व पर भी उठे सवाल
मामले की एक अन्य रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि तनुश्री नाम की शिक्षिका संबंधित विद्यालय में कभी कार्यरत ही नहीं थी। इसके बावजूद उसका रिकॉर्ड तैयार हुआ और भुगतान की व्यवस्था में शामिल कर दिया गया। ऐसे में जांच का विषय केवल बैंक खाते में भेजी गई रकम नहीं है। यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि विद्यालय, पदस्थापन और सेवा अभिलेखों का मिलान किस स्तर पर किया गया। यदि रिकॉर्ड की शुरुआती जांच में गड़बड़ी पकड़ी जाती, तो आगे के भुगतान रोके जा सकते थे।
राज्यभर में वेतन सत्यापन के निर्देश
भागलपुर का मामला सामने आने के बाद वित्त विभाग ने शिक्षा विभाग के वेतन और भत्तों की व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं। नौ अक्टूबर को जारी पत्र में मुख्यालय सहित संबंधित कार्यालयों के पदाधिकारियों, शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के भुगतान की शत-प्रतिशत जांच कराने को कहा गया। वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में सत्यापन पूरा करने और अगले भुगतान से पहले विसंगतियां दूर करने पर जोर दिया गया है। इससे जांच का दायरा एक संदिग्ध शिक्षिका के रिकॉर्ड से आगे बढ़ गया है।
बिल बनाने और मंजूर करने वालों की जवाबदेही
वेतन भुगतान में मेकर, चेकर और अप्रूवर की अलग-अलग जिम्मेदारियां होती हैं। वित्त विभाग ने इन स्तरों पर अनियमितता मिलने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध आपराधिक और अनुशासनिक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अधिक भुगतान की राशि वसूलने तथा महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां प्राथमिकता से नियमित अधिकारियों को सौंपने को भी कहा गया है। अब जांच में यह तय होना है कि फर्जी प्रविष्टि किसने बनाई, उसे सत्यापित किसने किया और भुगतान की मंजूरी कैसे मिली। इसी से सरकारी राशि के दुरुपयोग में शामिल लोगों की वास्तविक भूमिका स्पष्ट होगी।
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