रोहू, कतला और पंगाश पालन से बदली किसानों की किस्मत, उत्पादन बढ़ा

मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में मछली पालन अब किसानों और युवाओं के लिए कमाई का बेहतर माध्यम बनता जा रहा है। वैज्ञानिक तकनीक, बढ़ती मांग और सरकारी योजनाओं के सहयोग से जिले में मत्स्य उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। रोहू, कतला, नैनी और पंगाश जैसी मछलियों का पालन किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में जिले में मछली उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मत्स्य पालन अब पारंपरिक खेती के साथ अतिरिक्त आय का मजबूत जरिया बन रहा है। बड़ी संख्या में किसान और युवा इस व्यवसाय से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
जिला मत्स्य कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, मुजफ्फरपुर में पिछले तीन वर्षों के दौरान मछली उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2023-24 में जिले में कुल 40.05 हजार मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ था। इसके बाद वर्ष 2024-25 में उत्पादन बढ़कर 42.53 हजार मीट्रिक टन पहुंच गया।
वहीं, वर्ष 2025-26 में जिले में मछली उत्पादन 43.28 हजार मीट्रिक टन दर्ज किया गया। आंकड़ों के अनुसार, तीन वर्षों में जिले के मछली उत्पादन में करीब 3.23 हजार मीट्रिक टन की वृद्धि हुई है। यह बढ़ोतरी जिले में मत्स्य पालन के बढ़ते कारोबार को दर्शाती है।
जिला मत्स्य पदाधिकारी रंधीर कुमार ने बताया कि जिले के मत्स्य पालक कई प्रमुख प्रजातियों की मछलियों का पालन कर रहे हैं। इनमें रोहू, कतला, नैनी, पंगाश, ग्रास कार्प, कॉमन कार्प और रूपचंद जैसी प्रजातियां शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि बाजार में इन मछलियों की मांग लगातार बढ़ रही है। खासकर रोहू, कतला और पंगाश को उपभोक्ताओं के बीच काफी पसंद किया जाता है। इसी वजह से किसान इन प्रजातियों के पालन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
मत्स्य पालन के लिए अब किसान आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। तालाबों का बेहतर प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण बीज का उपयोग और मछलियों के लिए संतुलित आहार उपलब्ध कराने से उत्पादन क्षमता में सुधार हुआ है।
किसानों का कहना है कि कम जमीन में भी मछली पालन शुरू किया जा सकता है और सही तकनीक अपनाने पर इससे अच्छी आमदनी हासिल की जा सकती है। खेती के साथ मत्स्य पालन करने से उनकी आय के स्रोत बढ़ रहे हैं।
सरकार की ओर से भी मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
मुजफ्फरपुर में बढ़ता मछली उत्पादन न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहा है, बल्कि जिले में रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में मत्स्य पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
जिले में मछली पालन की बढ़ती लोकप्रियता से यह साफ है कि किसान अब पारंपरिक खेती के साथ नए व्यवसायों की ओर भी बढ़ रहे हैं। रोहू, कतला और पंगाश जैसी मछलियों का पालन ग्रामीण क्षेत्रों में आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है।





