बिहार

सरकारी एंबुलेंस सेवाओं में बड़ा बदलाव, अब GPS से होगी 24 घंटे निगरानी

Kavita2
22 Oct 2026 5:16 PM IST
सरकारी एंबुलेंस सेवाओं में बड़ा बदलाव, अब GPS से होगी 24 घंटे निगरानी
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पटना। मरीजों को समय पर आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और एंबुलेंस सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नई तकनीक अपनाने की दिशा में पहल की है। नई व्यवस्था के तहत सभी सरकारी एंबुलेंस में जीपीएस यानी ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम लगाने की योजना है। इससे एंबुलेंस की वास्तविक लोकेशन, आवाजाही और परिचालन की चौबीसों घंटे ऑनलाइन निगरानी की जा सकेगी। केंद्रीयकृत नियंत्रण कक्ष के माध्यम से किसी भी आपातकालीन स्थिति में मरीज के सबसे नजदीक उपलब्ध एंबुलेंस की पहचान करके उसे संबंधित स्थान पर भेजने में मदद मिलेगी। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं, गंभीर बीमारियों, प्रसव संबंधी आपात स्थितियों और अन्य स्वास्थ्य संकटों में मरीजों को जल्द चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।

सभी सरकारी एंबुलेंस में लगेगा जीपीएस

स्वास्थ्य विभाग की प्रस्तावित व्यवस्था के अंतर्गत सरकारी एंबुलेंस सेवाओं को डिजिटल निगरानी प्रणाली से जोड़ा जाएगा।

प्रत्येक एंबुलेंस में जीपीएस उपकरण लगाने की योजना है। इससे कंट्रोल रूम में बैठे कर्मचारी वाहनों की वास्तविक स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

एंबुलेंस किस स्थान पर मौजूद है, किस दिशा में जा रही है और उसका परिचालन किस स्थिति में है, इसकी जानकारी डिजिटल प्रणाली के माध्यम से उपलब्ध हो सकेगी।

इससे आपातकालीन चिकित्सा परिवहन सेवाओं का संचालन अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता मिलेगी।

हालांकि, सभी वाहनों में उपकरण लगाने और पूरी प्रणाली लागू होने की समयसीमा की विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।

कंट्रोल रूम से होगी चौबीसों घंटे निगरानी

नई व्यवस्था में केंद्रीयकृत नियंत्रण कक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

कंट्रोल रूम के माध्यम से सरकारी एंबुलेंस की लोकेशन पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।

किसी मरीज की ओर से आपातकालीन सहायता की मांग मिलने पर संबंधित कर्मचारी उपलब्ध एंबुलेंस की स्थिति जांच सकेंगे।

इसके बाद मरीज के सबसे नजदीक मौजूद उपयुक्त एंबुलेंस को सहायता के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।

इस व्यवस्था से अनावश्यक देरी कम करने और एंबुलेंस के बेहतर उपयोग में मदद मिलने की उम्मीद है।

दुर्घटना पीड़ितों को जल्द सहायता मिलने की उम्मीद

सड़क दुर्घटना के मामलों में समय पर चिकित्सा सहायता मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है।

कई बार दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने में देरी हो जाती है।

ऐसी स्थिति में जीपीएस आधारित एंबुलेंस ट्रैकिंग उपयोगी साबित हो सकती है।

कंट्रोल रूम को उपलब्ध वाहनों की जानकारी होने पर दुर्घटनास्थल के नजदीक मौजूद एंबुलेंस की पहचान करना आसान होगा।

इससे घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

हालांकि, वास्तविक प्रतिक्रिया समय सड़क की स्थिति, यातायात, वाहन की उपलब्धता और चिकित्सा सुविधाओं पर भी निर्भर करेगा।

गंभीर मरीजों के लिए महत्वपूर्ण होगी व्यवस्था

एंबुलेंस सेवा केवल सड़क दुर्घटनाओं तक सीमित नहीं है।

दिल का दौरा पड़ने, सांस लेने में गंभीर परेशानी, स्ट्रोक, अत्यधिक रक्तस्राव और अन्य आपातकालीन स्थितियों में भी मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की आवश्यकता हो सकती है।

ऐसे मामलों में एंबुलेंस की समय पर उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है।

नई डिजिटल व्यवस्था से चिकित्सा सहायता के लिए आने वाली कॉल और उपलब्ध वाहनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।

इससे आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की कार्यक्षमता सुधारने में सहायता मिल सकती है।

ग्रामीण इलाकों को भी मिल सकता है लाभ

ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में एंबुलेंस सेवाओं की उपलब्धता कई बार चुनौतीपूर्ण होती है।

कुछ इलाकों में अस्पतालों की दूरी अधिक होने और सीमित संख्या में एंबुलेंस उपलब्ध होने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

जीपीएस आधारित निगरानी से यह पता लगाया जा सकेगा कि किस क्षेत्र में एंबुलेंस उपलब्ध है और किन इलाकों में अतिरिक्त वाहनों की आवश्यकता हो सकती है।

इससे भविष्य में एंबुलेंस की तैनाती संबंधी निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावी संचालन के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी और सड़क संपर्क भी महत्वपूर्ण होंगे।

एंबुलेंस के अनावश्यक इस्तेमाल पर लगेगी निगरानी

नई प्रणाली से वाहनों के परिचालन में पारदर्शिता बढ़ाने की भी संभावना है।

कंट्रोल रूम एंबुलेंस की आवाजाही का डिजिटल रिकॉर्ड रख सकेगा।

इससे यह जांचने में सहायता मिल सकती है कि वाहन निर्धारित कार्य के लिए इस्तेमाल हो रहा है या नहीं।

एंबुलेंस की लोकेशन और परिचालन का रिकॉर्ड उपलब्ध होने से शिकायतों की जांच करना भी आसान हो सकता है।

हालांकि, इस व्यवस्था के लिए स्पष्ट संचालन नियम, प्रशिक्षित कर्मचारी और सुरक्षित डेटा प्रबंधन आवश्यक होंगे।

केंद्र सरकार भी जारी कर चुकी है दिशानिर्देश

देशभर में एंबुलेंस सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 29 जून 2026 को राष्ट्रीय एंबुलेंस सेवा संबंधी परिचालन दिशानिर्देश जारी किए थे।

इन दिशानिर्देशों में जीपीएस आधारित ट्रैकिंग, डिजिटल कॉल प्रबंधन, वास्तविक समय की निगरानी और एकीकृत कमांड तथा डिस्पैच केंद्रों की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।

केंद्र सरकार ने एंबुलेंस सेवाओं को आपातकालीन सहायता नंबर 112 से चरणबद्ध तरीके से जोड़ने की सिफारिश भी की है।

डिजिटल मैपिंग से सही अस्पताल तक पहुंचाने में मदद

राष्ट्रीय दिशानिर्देशों में अस्पतालों, रेफरल केंद्रों, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों और एंबुलेंस तैनाती स्थलों की डिजिटल मैपिंग पर भी जोर दिया गया है।

इससे कंट्रोल रूम के कर्मचारियों को मरीज की स्थिति के अनुसार उपयुक्त अस्पताल की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

गंभीर मरीज को केवल नजदीकी अस्पताल पहुंचाना पर्याप्त नहीं होता। जरूरी है कि संबंधित अस्पताल में उसकी स्थिति के अनुरूप उपचार सुविधा भी उपलब्ध हो।

ऐसे में अस्पतालों की उपलब्ध सुविधाओं से जुड़ी जानकारी डिजिटल प्रणाली में शामिल करना उपयोगी हो सकता है।

ड्राइवर और कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ेगी

जीपीएस ट्रैकिंग व्यवस्था शुरू होने से एंबुलेंस चालकों और परिचालन कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी बढ़ सकती है।

कंट्रोल रूम यह देख सकेगा कि सहायता का निर्देश मिलने के बाद वाहन कब रवाना हुआ और संबंधित स्थान तक पहुंचने में कितना समय लगा।

इन आंकड़ों के आधार पर सेवा की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जा सकेगा।

साथ ही किसी क्षेत्र में लगातार देरी होने पर उसके कारणों का पता लगाने में भी मदद मिलेगी।

हालांकि, तकनीकी खराबी या नेटवर्क संबंधी समस्या होने पर वैकल्पिक व्यवस्था की आवश्यकता होगी।

तकनीकी उपकरणों के रखरखाव पर भी देना होगा ध्यान

जीपीएस आधारित प्रणाली की सफलता उपकरणों के नियमित रखरखाव पर निर्भर करेगी।

सभी एंबुलेंस में लगाए जाने वाले उपकरण ठीक ढंग से काम करें, इसके लिए समय-समय पर तकनीकी जांच जरूरी होगी।

इसके अलावा कंट्रोल रूम के कर्मचारियों को डिजिटल प्रणाली के इस्तेमाल का प्रशिक्षण देना भी आवश्यक होगा।

एंबुलेंस की सही लोकेशन उपलब्ध नहीं होने या संचार व्यवस्था बाधित होने पर मरीजों को सहायता पहुंचाने में देरी हो सकती है।

इसलिए स्वास्थ्य विभाग को तकनीकी निगरानी के साथ परिचालन संबंधी व्यवस्थाओं को भी मजबूत करना होगा।

मरीजों को समय पर उपचार दिलाना मुख्य उद्देश्य

स्वास्थ्य विभाग की इस पहल का मुख्य उद्देश्य मरीजों को निर्धारित समय में एंबुलेंस उपलब्ध कराने की व्यवस्था को बेहतर बनाना है।

यदि कंट्रोल रूम को सभी वाहनों की वास्तविक लोकेशन उपलब्ध होगी, तो आपातकालीन कॉल मिलने पर संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।

इसके अलावा एंबुलेंस की तैनाती, मरम्मत और परिचालन संबंधी समस्याओं की पहचान करने में भी सहायता मिल सकती है।

नई तकनीक लागू होने के बाद स्वास्थ्य विभाग को यह मूल्यांकन करना होगा कि मरीजों तक पहुंचने के औसत समय में कितना सुधार हुआ है।

आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव की उम्मीद

सरकारी एंबुलेंस की ऑनलाइन ट्रैकिंग व्यवस्था स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है।

जीपीएस उपकरण, केंद्रीयकृत कंट्रोल रूम और डिजिटल निगरानी के जरिए एंबुलेंस सेवाओं के संचालन को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा।

इस व्यवस्था से दुर्घटना पीड़ितों, गंभीर मरीजों और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

हालांकि, योजना के वास्तविक परिणाम सभी एंबुलेंस में उपकरण लगाने, तकनीकी प्रणाली के सुचारू संचालन और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता पर निर्भर करेंगे।

फिलहाल स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य एंबुलेंस सेवाओं में देरी कम करना, वाहनों की निगरानी मजबूत बनाना और जरूरतमंद मरीजों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।

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