बिहार

घोसैठ में पहली बार रावण दहन, 55 फीट का दशानन बनेगा आकर्षण

nidhi
17 Oct 2026 9:45 AM IST
घोसैठ में पहली बार रावण दहन, 55 फीट का दशानन बनेगा आकर्षण
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55 फीट का रावण और दो विशाल पुतले
लखीसराय: जिले के घोसैठ में इस बार दशहरा का आयोजन खास होगा। यहां पहली बार रावण दहन किया जाएगा। कार्यक्रम में 55 फीट ऊंचे रावण के साथ 50-50 फीट ऊंचे कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले आकर्षण का केंद्र बनेंगे। तीनों विशाल पुतलों का दहन इस आयोजन की प्रमुख विशेषता रहेगा।
घोसैठ में पहली बार होने वाला यह कार्यक्रम स्थानीय दशहरा उत्सव में एक नया अध्याय जोड़ेगा। दिए गए विवरण के अनुसार, रावण का पुतला सबसे ऊंचा होगा। कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों की ऊंचाई उससे पांच-पांच फीट कम रखी गई है। इस तरह तीनों पुतलों के आकार में अंतर भी देखने को मिलेगा। हालांकि, इनके निर्माण की वर्तमान स्थिति, कारीगरों और इस्तेमाल होने वाली सामग्री का विवरण उपलब्ध नहीं है।
दशहरा पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन उत्तर भारत की परिचित सांस्कृतिक परंपरा है। यह आयोजन भगवान राम की रावण पर विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। रामायण की कथा में रावण लंका का राजा, कुंभकर्ण उसका भाई और मेघनाद उसका पुत्र है। दशहरा समारोहों में इन पात्रों के पुतले इसी कथा से जुड़े प्रसंग को सामने लाते हैं।
घोसैठ के कार्यक्रम की खास बात केवल पुतलों की ऊंचाई नहीं, बल्कि गांव में पहली बार रावण दहन का आयोजन होना भी है। इससे स्थानीय लोगों को अपने क्षेत्र में ही इस परंपरा को देखने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम का स्वरूप, दहन की प्रक्रिया और उससे पहले होने वाली गतिविधियों की जानकारी आयोजकों की विस्तृत घोषणा के बाद स्पष्ट होगी। अभी रामलीला मंचन, शोभायात्रा या अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों की पुष्टि नहीं है। विशाल पुतलों वाले सार्वजनिक आयोजन में दर्शकों के लिए निर्धारित स्थान और पुतलों के बीच पर्याप्त दूरी महत्वपूर्ण होती है। कार्यक्रम देखने पहुंचने वाले लोगों को आयोजन स्थल पर दिए जाने वाले निर्देशों का पालन करना चाहिए। पुतलों के करीब जाने, प्रतिबंधित हिस्से में प्रवेश करने या दहन के दौरान आगे बढ़ने से बचना चाहिए। बच्चों के साथ पहुंचने वाले परिवारों के लिए उन्हें अपने पास रखना और भीड़ में अलग नहीं होने देना विशेष रूप से जरूरी है।
आयोजन स्थल तक आने-जाने की जानकारी भी दर्शकों के लिए उपयोगी होगी। किसी भी कार्यक्रम में जाने से पहले उसका सही स्थान, प्रवेश मार्ग और शुरू होने का समय जान लेना सुविधाजनक रहता है। घोसैठ के इस आयोजन के संबंध में अभी ये विवरण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए आसपास के क्षेत्रों से आने वाले लोगों को स्थानीय आयोजकों की घोषणा के अनुसार ही अपनी यात्रा तय करनी चाहिए। यदि कार्यक्रम में आतिशबाजी रखी जाती है, तो उससे संबंधित सुरक्षा निर्देशों का पालन करना भी जरूरी होगा। हालांकि, फिलहाल आतिशबाजी की अवधि, प्रकार या विशेष प्रदर्शन की कोई पुष्ट जानकारी नहीं मिली है। इसी तरह पुलिस बल, अग्निशमन वाहन, चिकित्सा सहायता या पार्किंग की तैनाती को लेकर भी उपलब्ध विवरण में उल्लेख नहीं है। इन व्यवस्थाओं को तय मानकर सूचना देना उचित नहीं होगा।
दशहरा का संदेश सामूहिक उत्सव के साथ अपने व्यवहार में अच्छाई अपनाने से भी जुड़ा है। रावण दहन को अहंकार, अन्याय और बुराइयों के अंत के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है। परिवारों के लिए ऐसा आयोजन बच्चों को रामायण की कथा और विजयादशमी के सांस्कृतिक महत्व से परिचित कराने का अवसर भी बन सकता है। पर्व का आनंद अनुशासन और दूसरों की सुविधा का ध्यान रखते हुए लिया जा सकता है। फिलहाल घोसैठ के आयोजन से जुड़ी प्रमुख जानकारी यही है कि यहां पहली बार रावण दहन होगा और इसके लिए 55 फीट का रावण तथा 50-50 फीट के कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले आकर्षण बनेंगे। आयोजन की निश्चित तारीख, दहन का समय, मैदान और आयोजक समिति का विवरण मिलने के बाद दर्शकों को कार्यक्रम की पूरी जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।
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