छत्तीसगढ़

कहानी बदलाव की: मुर्गी पालन से आत्मनिर्भर बनी धरमजयगढ़ विकासखंड की रजनी

Shantanu Roy
20 Sept 2026 9:38 PM IST
कहानी बदलाव की: मुर्गी पालन से आत्मनिर्भर बनी धरमजयगढ़ विकासखंड की रजनी
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Raigarh. रायगढ़। शासन की योजनाओं से मिले सहयोग ने धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम पाराघाटी की रजनी केरकेट्टा की जिंदगी में बदलाव की राह खोली है। रजनी ने मुर्गी पालन को अपनी आजीविका का साधन बनाकर परिवार की आय बढ़ाने में योगदान दिया और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया है। रजनी जीवन ज्योति स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से उन्हें आजीविका गतिविधि के लिए आर्थिक सहयोग मिला। उन्हें सामुदायिक निवेश निधि से 50 हजार रुपए, बैंक लिंकेज से 1 लाख रुपए तथा स्वयं सिद्धा के तहत प्रथम वर्ष में 1.50 लाख रुपए की राशि प्राप्त हुई।

द्वितीय वर्ष में आजीविका गतिविधि को आगे बढ़ाने के लिए 1.50 लाख रुपए की राशि का पुनः नवीनीकरण किया गया। इस आर्थिक सहयोग से रजनी ने मुर्गी पालन व्यवसाय को आगे बढ़ाया। समूह से मिले मार्गदर्शन और सहयोग ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। अब वे आजीविका से जुड़े निर्णय स्वयं लेते हुए व्यवसाय को आगे बढ़ा रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में सहभागी बन रही हैं। रजनी बताती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक सहयोग के साथ आगे बढ़ने का हौसला भी मिला। मुर्गी पालन ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया है। उन्होंने शासन की योजनाओं और समूह के सहयोग के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

स्व-सहायता समूहों से महिलाओं को मिल रहा आर्थिक संबल
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। समूहों को नियमित बचत, बैंक लिंकेज और विभिन्न निधियों के माध्यम से आजीविका गतिविधियों के लिए सहयोग दिया जाता है। इससे महिलाएं मुर्गीपालन, पशुपालन और कृषि सहित अन्य गतिविधियां अपनाकर परिवार की आय बढ़ाने में सहभागी बन रही हैं।
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