छत्तीसगढ़
स्कूलों की जर्जर स्थिति पर चिंता, मूलभूत सुविधाओं की मांग तेज
Shantanu Roy
18 Jun 2026 6:56 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रदेश के कई सरकारी और निजी विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर चिंता जताई जा रही है। विद्यार्थियों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी प्रशासन की मानी जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी संतोषजनक नहीं बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, कई स्कूल भवन जर्जर स्थिति में हैं और कहीं-कहीं ये छात्रों के लिए खतरा बन चुके हैं। इसके अलावा पेयजल की कमी, शौचालयों की अनुपलब्धता, बिजली व्यवस्था की खराब स्थिति जैसे कई मूलभूत समस्याएं सामने आ रही हैं। कई विद्यालयों में पंखे और प्रकाश व्यवस्था तक ठीक नहीं है, जिससे विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इस स्थिति को देखते हुए कई स्तरों पर मांग उठाई जा रही है कि छत्तीसगढ़ के सभी स्कूलों में तत्काल मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही जिन विद्यालय भवनों की हालत बेहद खराब है, उन्हें विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अस्थायी रूप से बंद किया जाए। इसके अलावा यह भी मांग की जा रही है कि जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर तेजी से पूरा किया जाए। जब तक भवन सुरक्षित नहीं हो जाते, तब तक विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए ऑनलाइन कक्षाओं, वैकल्पिक व्यवस्था या पास के सुरक्षित विद्यालयों में पढ़ाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई जा रही है।
शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए यह भी सुझाव दिया गया है कि शिक्षा विभाग प्रदेशभर में सर्वे कर सभी जर्जर विद्यालयों की सूची सार्वजनिक करे और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करे। इससे सुधार कार्यों में पारदर्शिता और तेजी लाई जा सकेगी। साथ ही विद्यार्थियों को स्कूल यूनिफॉर्म, कॉपी, किताबें और लेखन सामग्री समय पर उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है। मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई है ताकि बच्चों को पौष्टिक आहार मिल सके। स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जा रहा है कि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। सुरक्षित स्कूल और बेहतर शिक्षा हर विद्यार्थी का मूल अधिकार है। इस मुद्दे पर अब प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाने की जरूरत महसूस की जा रही है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि सरकार और संबंधित विभाग मिलकर स्कूलों की स्थिति में सुधार के लिए तेजी से काम करें।
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