छत्तीसगढ़
डीएपी के नाम पर किसानों से ठगी करने वाला गिरोह पकड़ा गया, 4 आरोपी गिरफ्तार
Shantanu Roy
1 July 2026 11:36 PM IST

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छग
Sarangarh-Bilaigarh. सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिले में किसानों को डीएपी खाद के नाम पर ठगी करने वाले एक गिरोह का खुलासा हुआ है। कृषि विभाग और तहसील प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। सभी के खिलाफ सरसीवां थाना में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई सरसीवां क्षेत्र के ग्राम गाड़ापाली में की गई, जहां टीम ने घेराबंदी कर आरोपियों को पकड़ा। पकड़े गए आरोपी पुलकित बायोफर्टीलाइजर प्रा. लि. से जुड़े बताए जा रहे हैं।
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि आरोपी पिछले दो से तीन वर्षों से सरसीवां क्षेत्र सहित सारंगढ़-बिलाईगढ़, जांजगीर-चांपा और सक्ती जिलों के ग्रामीण इलाकों में सक्रिय थे। वे गांव-गांव जाकर खुद को अधिकृत विक्रेता बताकर किसानों को डीएपी खाद के नाम पर उत्पाद बेचते थे। हालांकि, जांच में यह स्पष्ट हुआ कि किसानों को जो सामग्री दी जा रही थी, वह वास्तविक डीएपी खाद नहीं थी। आरोपियों द्वारा किसानों को बिक्री के समय बिल भी दिया जाता था, जिससे उन्हें वैधता का भरोसा दिलाया जाता था, लेकिन सामग्री की वास्तविक गुणवत्ता और प्रकार संदिग्ध पाए गए हैं। इसके अलावा यह भी सामने आया कि आरोपी अलग-अलग स्थानों पर किराये के कमरों में रहकर लगातार ठिकाना बदलते रहते थे, ताकि किसी को संदेह न हो।
बताया गया कि पिछले वर्ष भी सरसीवां तहसील के ग्राम भिनोदा में इसी कंपनी का संदिग्ध खाद पाया गया था, लेकिन उस समय ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी थी। इस बार प्रशासन की सतर्कता के चलते आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ा गया। यह कार्रवाई कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू के निर्देश पर की गई। इसमें उप संचालक कृषि आशुतोष श्रीवास्तव, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कृष्ण कुमार साहू, उर्वरक निरीक्षक जयप्रकाश गुप्ता, तहसीलदार मोहन साहू, कुलदीप नायक और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की संयुक्त टीम शामिल रही।
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत और लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही उर्वरक खरीदें। साथ ही खरीद के समय पक्का बिल अवश्य लें और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति द्वारा डीएपी या अन्य खाद बेचने की सूचना तुरंत कृषि विभाग या स्थानीय प्रशासन को दें। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी ताकि किसानों को ठगी से बचाया जा सके और खाद वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे।
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