छत्तीसगढ़

RTE सीटों का सही रिकॉर्ड पेश नहीं करने पर हाईकोर्ट नाराज, सरकार को अंतिम मौका

Shantanu Roy
7 Oct 2026 5:58 PM IST
RTE सीटों का सही रिकॉर्ड पेश नहीं करने पर हाईकोर्ट नाराज, सरकार को अंतिम मौका
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Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत निजी स्कूलों में आरक्षित सीटों और उनमें बच्चों के प्रवेश से संबंधित सही एवं पूर्ण रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस के. आर. महापात्रा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की स्पेशल डिवीजन बेंच ने राज्य शासन को सभी स्कूलों का सत्यापित रिकॉर्ड पेश करने के लिए अंतिम अवसर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को तय की गई है। मामला भगवंत की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर ने अदालत को बताया कि राज्य शासन द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड में कई बड़े निजी स्कूलों में आरटीई के तहत आरक्षित सीटों की संख्या शून्य या बेहद कम दिखाई गई है।
याचिकाकर्ता की ओर से इस आंकड़े की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि प्रस्तुत जानकारी जमीनी स्थिति से मेल नहीं खाती। सुनवाई के दौरान स्पेशल डिवीजन बेंच ने शासन की ओर से पेश रिकॉर्ड पर नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत के समक्ष इस तरह का रिकॉर्ड पेश कर मजाक नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि आरटीई से जुड़े मामले में वर्ष 2016 में भी निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन उन आदेशों का उचित पालन नहीं किया गया।
हाईकोर्ट ने राज्य शासन को स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्रदेश के सभी स्कूलों में आरटीई के तहत आरक्षित सीटों की संख्या, प्रवेश लेने वाले बच्चों की जानकारी और इससे संबंधित अन्य आंकड़ों का सही, पूर्ण एवं सत्यापित रिकॉर्ड अगली सुनवाई तक पेश किया जाए। कोर्ट ने इसके लिए 18 नवंबर तक का समय दिया है। साथ ही स्पष्ट किया है कि यह रिकॉर्ड पेश करने के लिए राज्य शासन को दिया गया अंतिम अवसर है। अदालत ने कहा कि निर्धारित समय तक सभी स्कूलों का सही डेटा प्रस्तुत नहीं किया गया तो शिक्षा सचिव कमलप्रीत सिंह के खिलाफ धारा 311 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
आरटीई अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में निर्धारित वर्ग के बच्चों के लिए सीटें आरक्षित रहती हैं। इसी व्यवस्था के क्रियान्वयन और स्कूलों में उपलब्ध आरक्षित सीटों के सही आंकड़ों को लेकर जनहित याचिका में सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत का ध्यान इस बात की ओर दिलाया गया कि कुछ बड़े स्कूलों में आरटीई सीटों की संख्या बेहद कम या शून्य दर्ज होने से रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। इस पर हाईकोर्ट ने शासन से संबंधित आंकड़ों की दोबारा जांच और सत्यापन कर वास्तविक जानकारी प्रस्तुत करने को कहा है। अब मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी। उस दिन राज्य शासन को सभी संबंधित स्कूलों का पूर्ण और प्रमाणित रिकॉर्ड अदालत के समक्ष रखना होगा। कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षा विभाग पर आरटीई से जुड़े आंकड़ों को व्यवस्थित और सत्यापित तरीके से पेश करने की जिम्मेदारी बढ़ गई है।
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