छत्तीसगढ़

वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, 40-45 घर ध्वस्त, ग्रामीणों में आक्रोश

Shantanu Roy
19 Jun 2026 12:22 AM IST
वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, 40-45 घर ध्वस्त, ग्रामीणों में आक्रोश
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Lormi. लोरमी। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के लोरमी क्षेत्र में वन विभाग की कार्रवाई के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नवागांव (दयाली) ग्राम पंचायत के चचेड़ी गांव में वन विभाग ने बुलडोजर कार्रवाई करते हुए लगभग 40 से 45 गरीब परिवारों के आवासीय ढांचों को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश और असंतोष का माहौल है। जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई वन विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने के अभियान के तहत की गई। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला केवल अतिक्रमण हटाने का नहीं बल्कि दो विभागों के बीच समन्वय की कमी और प्रशासनिक विफलता का परिणाम है।

प्रभावित ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) लोरमी को एक हस्ताक्षरित आवेदन सौंपकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वे पिछले 20 से 25 वर्षों से इस भूमि पर निवास कर रहे हैं और लगातार वहीं जीवन यापन कर रहे थे। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया है कि इनमें से कई परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकानों की स्वीकृति दी गई थी और सरकारी फंड से मकानों का निर्माण भी कराया गया था। इसी आधार पर ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि यह भूमि वन विभाग की थी या अतिक्रमण की श्रेणी में आती थी, तो सरकारी योजना के तहत मकानों की स्वीकृति और निर्माण कैसे संभव हुआ।

ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई से पहले अधिकांश परिवारों को पर्याप्त और स्पष्ट लिखित नोटिस नहीं दिया गया। अचानक भारी पुलिस बल की मौजूदगी में उनके घरों पर बुलडोजर चला दिया गया, जिससे लोगों को अपना सामान भी सुरक्षित निकालने का मौका नहीं मिला। ध्वस्तीकरण के दौरान कई परिवारों का घरेलू सामान, राशन, कपड़े और बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी सामग्री मलबे में दबकर नष्ट हो गई। इससे प्रभावित परिवारों को भारी आर्थिक और मानसिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। घटना के बाद क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि वे अब खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।

प्रशासन से तत्काल राहत और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने इस पूरी कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि वन विभाग और राजस्व विभाग के बीच समय रहते सही समन्वय होता तो इस तरह की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और जिन परिवारों को नुकसान हुआ है उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जाए। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं ग्रामीणों का विरोध और आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इस घटना ने एक बार फिर से ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवाद, विभागीय समन्वय की कमी और पुनर्वास नीति के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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