छत्तीसगढ़

हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, मेडिकल कॉलेज की 448 पदों की भर्ती बहाल

Shantanu Roy
30 Oct 2026 5:08 PM IST
हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, मेडिकल कॉलेज की 448 पदों की भर्ती बहाल
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Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे सैकड़ों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। अंबिकापुर स्थित राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के 448 पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया रद्द करने के फैसले को हाईकोर्ट ने मनमाना ठहराते हुए निरस्त कर दिया है। न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि भर्ती प्रक्रिया उसी चरण से दोबारा शुरू की जाए, जहां उसे रोका गया था। अदालत ने आदेश की प्रति प्राप्त होने के तीन महीने के भीतर पूरी भर्ती प्रक्रिया संपन्न करने के निर्देश दिए हैं।
2022 में निकला था भर्ती विज्ञापन
जानकारी के अनुसार, राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय मेडिकल कॉलेज, अंबिकापुर में विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए 20 जुलाई 2022 को विज्ञापन जारी किया गया था। इसके बाद वर्ष 2023 में संशोधित विज्ञापन भी जारी किए गए थे। भर्ती प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। चयन प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद मेरिट सूची तैयार की गई और उम्मीदवारों को 23 अगस्त 2023 को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया था। हालांकि, दस्तावेज सत्यापन का कार्यक्रम बाद में स्थगित कर दिया गया। इसके बाद 23 अप्रैल 2025 को महाविद्यालय की सामान्य सभा की बैठक में भर्ती प्रक्रिया रद्द करने और छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल यानी व्यापम के माध्यम से नए सिरे से भर्ती कराने का निर्णय लिया गया।
55 हजार आवेदन मिले, बैठक में बताया एक लाख से अधिक
मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य आवेदनों की संख्या को लेकर सामने आया। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि भर्ती प्रक्रिया रद्द करने का एक प्रमुख आधार अत्यधिक आवेदन प्राप्त होना और चयन में अधिक समय लगना बताया गया था। हालांकि, मेडिकल कॉलेज के डीन द्वारा 19 जून 2025 को चिकित्सा शिक्षा आयुक्त को भेजे गए पत्र में अलग आंकड़े दर्ज थे। इस पत्र के अनुसार, कुल 448 पदों के लिए 55,335 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें तृतीय श्रेणी के 63 पदों के लिए 10,374 और चतुर्थ श्रेणी के 385 पदों के लिए 44,961 आवेदन शामिल थे। वहीं सामान्य सभा की बैठक में एक लाख से अधिक आवेदन मिलने की बात कही गई थी। दोनों आंकड़ों में इस बड़े अंतर को याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट के सामने प्रमुख आधार बनाया।
10 अभ्यर्थियों ने दी थी फैसले को चुनौती
भर्ती प्रक्रिया रद्द करने के खिलाफ आदित्य सैनी, युवराज लिंगम, टिकेश्वर राम, सुभद्रा पैंकरा, खेल साय, गौरव गोंड, दिलेश्वर राम, सोनम सिदार, प्रमोद जायसवाल और वृंदावती ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता पवन श्रीवास्तव ने तर्क दिया कि भर्ती प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी थी। ऐसे में बिना ठोस कारण उसे निरस्त करना अनुचित है। नई भर्ती शुरू होने से कई अभ्यर्थियों की आयु संबंधी पात्रता भी प्रभावित हो सकती थी।
सरकार ने अपने फैसले का किया बचाव
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि केवल चयन प्रक्रिया में शामिल होने या दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाए जाने से किसी उम्मीदवार को नियुक्ति का निश्चित अधिकार नहीं मिल जाता। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि प्रशासनिक सुविधा और संस्थागत हित में भर्ती का तरीका बदलने का अधिकार संबंधित अधिकारियों को है। हालांकि, अदालत ने पाया कि पुरानी भर्ती प्रक्रिया में ऐसी कौन सी खामी थी, जिसके कारण उसे पूरा करना संभव नहीं था, इसका संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
अनुच्छेद 14 और 16 के सिद्धांतों का हवाला
हाईकोर्ट ने माना कि सरकार प्रत्येक विज्ञापित पद को भरने के लिए बाध्य नहीं है और उचित कारणों से भर्ती प्रक्रिया रद्द भी कर सकती है। लेकिन ऐसा निर्णय तर्कसंगत, निष्पक्ष और कानून के अनुरूप होना चाहिए। अदालत ने पाया कि इस मामले में भर्ती निरस्त करने का पर्याप्त तथ्यात्मक और कानूनी आधार प्रस्तुत नहीं किया गया। यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता तथा सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं था।
तीन महीने में पूरी करनी होगी भर्ती
हाईकोर्ट ने 23 अप्रैल 2025 की बैठक में लिए गए भर्ती रद्द करने के निर्णय और 19 जून 2025 के संबंधित पत्र को निरस्त कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि 20 जुलाई 2022 के मूल विज्ञापन और बाद में जारी संशोधित विज्ञापनों के आधार पर भर्ती प्रक्रिया बहाल की जाए। संबंधित अधिकारियों को उम्मीदवारों की पात्रता, दस्तावेज और तुलनात्मक मेरिट का परीक्षण करना होगा। जो अभ्यर्थी निर्धारित नियमों के अनुसार योग्य और चयन के पात्र पाए जाएंगे, उन्हें नियुक्ति दी जाएगी। इस फैसले से लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को राहत मिली है। हालांकि, अदालत ने सभी आवेदकों को स्वतः नियुक्ति देने का आदेश नहीं दिया है। नियुक्तियां पात्रता, मेरिट और लागू भर्ती नियमों के आधार पर ही होंगी।
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