छत्तीसगढ़

नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की जेल, DNA रिपोर्ट से खुला राज

Shantanu Roy
16 Oct 2026 9:56 PM IST
नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की जेल, DNA रिपोर्ट से खुला राज
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Balodabazar. बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी मुकेश कुमार निषाद को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और कुल 6 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। आरोपी पर नाबालिग पीड़िता को शादी का झांसा देकर महाराष्ट्र के पुणे ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने का आरोप था। मामले में डीएनए जांच रिपोर्ट और पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्य महत्वपूर्ण साबित हुए। विशेष न्यायाधीश गिरजेश प्रताप सिंह की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद यह फैसला सुनाया।

शादी का झांसा देकर नाबालिग को ले गया था पुणे
प्रकरण कोतवाली थाना क्षेत्र की करही चौकी से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार, आरोपी मुकेश कुमार निषाद ने नाबालिग पीड़िता को शादी करने का प्रलोभन दिया। इसके बाद वह पीड़िता को बहला-फुसलाकर अपने साथ महाराष्ट्र के पुणे ले गया। आरोप था कि वहां आरोपी ने पीड़िता को अपनी पत्नी बताकर करीब एक महीने तक उसके साथ दुष्कर्म किया। इस दौरान पीड़िता गर्भवती हो गई थी। मामले की जानकारी सामने आने के बाद आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।

दुर्ग जिले में भी दुष्कर्म करने का आरोप
अभियोजन के अनुसार, आरोपी इससे पहले भी नाबालिग पीड़िता को दुर्ग जिले के ग्राम बलोदी स्थित एक नर्सरी में लेकर गया था। वहां भी आरोपी द्वारा पीड़िता के साथ दुष्कर्म किए जाने की बात सामने आई थी। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान पीड़िता से जुड़े घटनाक्रम और उपलब्ध साक्ष्यों को संकलित किया। इसके बाद आरोपी के खिलाफ न्यायालय में अभियोजन की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

गर्भवती होने के बाद कराई गई डीएनए जांच
मामले में पीड़िता के गर्भवती होने की जानकारी सामने आई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह करीब दो महीने की गर्भवती थी। पीड़िता का उसके माता-पिता की सहमति से जिला अस्पताल बलौदाबाजार में गर्भसमापन कराया गया। इसके बाद गर्भ से प्राप्त जैविक नमूने को पितृत्व परीक्षण के लिए राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला, रायपुर भेजा गया। डीएनए परीक्षण का उद्देश्य यह पता लगाना था कि गर्भस्थ भ्रूण का जैविक पिता कौन था।

DNA रिपोर्ट से आरोपी का पितृत्व साबित
प्रकरण में डीएनए जांच रिपोर्ट महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में सामने आई। अभियोजन के अनुसार, जांच रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई कि आरोपी मुकेश कुमार निषाद गर्भस्थ भ्रूण का जैविक पिता था। इस वैज्ञानिक साक्ष्य को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही पुलिस विवेचना के दौरान जुटाए गए अन्य साक्ष्यों को भी अदालत में रखा गया। अदालत ने मामले से जुड़े साक्ष्यों और अभियोजन की दलीलों पर विचार करते हुए आरोपी को दोषी पाया।

विशेष पॉक्सो न्यायालय ने सुनाई सजा
इस प्रकरण की सुनवाई विशेष न्यायाधीश पॉक्सो, बलौदाबाजार की अदालत में हुई। न्यायालय के पीठासीन अधिकारी गिरजेश प्रताप सिंह ने आरोपी मुकेश कुमार निषाद को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा दोषी पर कुल 6 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। न्यायालय का फैसला नाबालिग से जुड़े यौन अपराध के इस गंभीर मामले में पुलिस द्वारा जुटाए गए वैज्ञानिक और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आया है।

विशेष लोक अभियोजक निशा शर्मा ने रखा पक्ष
मामले में अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक निशा शर्मा ने न्यायालय में पक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने पुलिस द्वारा एकत्र किए गए साक्ष्यों, डीएनए रिपोर्ट और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों को अदालत के समक्ष रखा। पुलिस की विवेचना और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने आरोपी के विरुद्ध अभियोजन पक्ष को मजबूती प्रदान की। अंततः विशेष पॉक्सो न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।
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