छत्तीसगढ़

IOB बैंक के 14.56 करोड़ घोटाले का मास्टरमाइंड गिरफ्तार

Shantanu Roy
31 July 2026 9:19 PM IST
IOB बैंक के 14.56 करोड़ घोटाले का मास्टरमाइंड गिरफ्तार
x
छग
Bemetara. बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) की शाखा में सामने आए 14.56 करोड़ रुपये के कथित बैंक घोटाले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रहे मामले के मुख्य आरोपी और बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक विनीत दास को तमिलनाडु के तंजावुर से गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर बेमेतरा लाया गया है, जहां उससे गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस का मानना है कि पूछताछ के दौरान इस बहुचर्चित घोटाले से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं और पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होने की संभावना है।
पुलिस के अनुसार, विनीत दास पर आरोप है कि उन्होंने बैंकिंग नियमों की अनदेखी करते हुए फर्जी और बंद संस्थानों, स्वयं सहायता समूहों, किसान क्रेडिट कार्ड तथा कृषि योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये के ऋण स्वीकृत किए। जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में खाताधारकों की जानकारी के बिना राशि का हस्तांतरण किया गया। इसके अलावा फर्जी जीएसटी नंबरों का उपयोग, दस्तावेजों की पर्याप्त जांच किए बिना ऋण स्वीकृत करना और बैंक की आंतरिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन करने जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए हैं।
इस मामले की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी, जब इंडियन ओवरसीज बैंक की बेमेतरा शाखा के तत्कालीन प्रबंधक रज्जू पाटनवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक विनीत दास ने बैंक के नियमों का उल्लंघन करते हुए बड़े पैमाने पर संदिग्ध ऋण स्वीकृत किए, जिससे बैंक को करोड़ों रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ। शिकायत के बाद रायपुर स्थित बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय ने आंतरिक जांच कराई, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई। जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 409, 120-बी और 34 के तहत अपराध दर्ज कर विस्तृत विवेचना शुरू की। बैंक की आंतरिक जांच में कुल 180 ऋण खातों की जांच की गई। जांच के दौरान लगभग 16.01 करोड़ रुपये के ऋण वितरण में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। इनमें से 14.56 करोड़ रुपये की राशि को बैंक के प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान के रूप में चिन्हित किया गया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि कई ऋण ऐसे लोगों और संस्थाओं के नाम पर स्वीकृत किए गए, जो पात्र ही नहीं थे। कई मामलों में फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया गया, जबकि आवश्यक सत्यापन प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि पूरा घोटाला सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था और इसमें कई लोगों की भूमिका रही। मामले की गंभीरता को देखते हुए दुर्ग रेंज के आईजी अभिषेक शांडिल्य की निगरानी और बेमेतरा पुलिस अधीक्षक त्रिलोक बंसल के निर्देशन में विशेष जांच टीम गठित की गई। सिटी कोतवाली प्रभारी निरीक्षक सोनल ग्वाला के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, बैंकिंग रिकॉर्ड और लगातार निगरानी के आधार पर आरोपी की लोकेशन ट्रेस की। इसके बाद 29 जुलाई 2026 को तमिलनाडु के तंजावुर में दबिश देकर विनीत दास को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान कमलेश सिन्हा, जोहन सिंह वर्मा, नागेश कुमार वर्मा और टीकाराम माथुर की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। आरोप है कि ये सभी बैंक और ऋण लेने वालों के बीच बिचौलियों के रूप में काम कर रहे थे। इन लोगों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कराने, अपात्र लोगों को ऋण दिलाने और बैंकिंग प्रक्रिया को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाई। पुलिस इन चारों आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। अब पुलिस विनीत दास से पूछताछ कर यह जानने का प्रयास कर रही है कि इस पूरे घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे, अवैध रूप से स्वीकृत ऋण की राशि किन-किन खातों में गई तथा इस वित्तीय अनियमितता से किसे लाभ पहुंचा। पुलिस का कहना है कि बैंकिंग दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन का
विश्लेषण
किया जा रहा है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस बहुचर्चित बैंक घोटाले में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी को पुलिस बड़ी सफलता मान रही है। अधिकारियों का कहना है कि निष्पक्ष और व्यापक जांच के माध्यम से पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा तथा दोषियों को कानून के दायरे में लाकर बैंक और जनता के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
Next Story