छत्तीसगढ़
नदी में डूबकर मौत पर नहीं मिलेगा मुआवजा! हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
Shantanu Roy
31 Oct 2026 3:32 PM IST

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छग
Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नदी में डूबकर एक व्यक्ति की मौत के मामले में सरकारी अनुग्रह राशि की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने यानी एस्फिक्सिया का उल्लेख होना अपने आप में यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि संबंधित व्यक्ति की मौत नदी में डूबने से हुई है। इसके लिए आवश्यक मेडिकल और फोरेंसिक साक्ष्यों का होना भी जरूरी है। अदालत ने कहा कि केवल पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर डूबने से हुई दुर्घटनात्मक मौत का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इस मामले में जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने भगवत प्रसाद केंवट की याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने अपने पिता की नदी में डूबने से हुई कथित मौत के आधार पर राज्य सरकार से आर्थिक सहायता देने की मांग की थी।
नदी किनारे गए थे पिता, अचानक आया था दौरा
मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता भगवत प्रसाद केंवट के पिता दौराम केंवट 9 जनवरी 2020 को सुबह करीब 7 बजे शौच के लिए नदी किनारे गए थे। बताया गया कि उन्हें मिर्गी की बीमारी थी। उन्हें अचानक दौरे पड़ने के साथ चक्कर आने की समस्या भी रहती थी। याचिका में बताया गया कि घटना वाले दिन नदी किनारे उन्हें अचानक मिर्गी का दौरा पड़ा और वह नदी में गिर गए। इसके बाद पानी में डूबने से उनकी मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू की थी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने को बताया गया था मौत का कारण
घटना के बाद मृतक का पोस्टमार्टम कसडोल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कराया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटना यानी डूबना बताया गया था। मौत को दुर्घटनाजनित मृत्यु माना गया था। इसी रिपोर्ट के आधार पर मृतक के बेटे ने सरकारी सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू की। भगवत प्रसाद केंवट ने 20 फरवरी 2020 को कसडोल तहसीलदार के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था। इसमें राज्य सरकार के राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी) के प्रावधानों के तहत अनुग्रह राशि देने की मांग की गई थी।
पटवारी की रिपोर्ट में तीन फीट गहरे पानी का उल्लेख
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि पटवारी की जांच रिपोर्ट में घटनास्थल पर करीब तीन फीट गहरा और ठहरा हुआ पानी होने की जानकारी दर्ज की गई थी। ऐसे में उनके पिता की मौत नदी में गिरने और डूबने के कारण हुई थी। याचिकाकर्ता ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पटवारी की जांच रिपोर्ट को आधार बनाते हुए सरकारी मुआवजे का दावा किया। उनका कहना था कि यह एक दुर्घटनात्मक मृत्यु का मामला है और इसके लिए परिवार को नियमानुसार आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने मेडिकल और फोरेंसिक साक्ष्य को बताया जरूरी
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एस्फिक्सिया यानी दम घुटने के उल्लेख को निर्णायक प्रमाण मानने से इनकार किया। अदालत के अनुसार, इस तरह का उल्लेख अकेले यह साबित नहीं करता कि व्यक्ति की मृत्यु पानी में डूबने के कारण ही हुई थी। इसके लिए मेडिकल और फोरेंसिक साक्ष्यों से भी मौत की वास्तविक परिस्थितियों की पुष्टि होना आवश्यक है। केवल घटनास्थल पर पानी की मौजूदगी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने के उल्लेख के आधार पर मुआवजे की पात्रता तय नहीं की जा सकती। इन्हीं तथ्यों और साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने भगवत प्रसाद केंवट की अनुग्रह राशि की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। इस फैसले में अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी अनुग्रह राशि का दावा करते समय दुर्घटना और मौत के कारण के बीच पर्याप्त साक्ष्य आधारित संबंध स्थापित करना जरूरी है।
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