छत्तीसगढ़

शस्त्र पूजा में कई जिलों के अफसरों ने की फायरिंग, लेकिन नोटिस सिर्फ SP अंकिता शर्मा को!

Shubhra Nandy
23 Oct 2026 11:26 AM IST
शस्त्र पूजा में कई जिलों के अफसरों ने की फायरिंग, लेकिन नोटिस सिर्फ SP अंकिता शर्मा को!
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पुलिस विभाग के फैसले पर उठे सवाल
रायपुर : छत्तीसगढ़ में विजयादशमी के अवसर पर हुई पारंपरिक शस्त्र पूजा अब पुलिस विभाग के लिए विवाद का विषय बन गई है। राजनांदगांव की पुलिस अधीक्षक आईपीएस अंकिता शर्मा का AK-47 राइफल से हवाई फायरिंग करते हुए वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस मुख्यालय ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। हालांकि, इस पूरे मामले में अब एक नया सवाल उठ रहा है कि जब राजनांदगांव के अलावा रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, दुर्ग, कबीरधाम और बस्तर समेत कई जिलों में पुलिस अधिकारियों के फायरिंग करते हुए वीडियो सामने आए हैं, तो कार्रवाई के लिए केवल अंकिता शर्मा को ही क्यों चुना गया?
इस मामले ने पुलिस विभाग में अनुशासन, हथियारों के सुरक्षित इस्तेमाल और सभी अधिकारियों के लिए समान नियम लागू करने को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अंकिता शर्मा से स्पष्टीकरण मांगा गया है। उनका जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
शस्त्र पूजा के बाद AK-47 से कई राउंड फायरिंग
घटना 20 अक्टूबर 2026 की है। विजयादशमी के अवसर पर राजनांदगांव पुलिस लाइन में पारंपरिक शस्त्र पूजा का आयोजन किया गया था। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने शस्त्रों एवं वाहनों की पूजा-अर्चना की। इसके बाद पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने AK-47 राइफल से हवा में कई राउंड फायरिंग की। वायरल वीडियो में अंकिता शर्मा साड़ी पहने राइफल चलाती दिखाई दे रही हैं। उनके आसपास कई अन्य पुलिस अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद नजर आते हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद हथियारों के इस्तेमाल के तरीके और सुरक्षा नियमों को लेकर सवाल उठने लगे। कुछ लोगों ने इसे दशहरे की पारंपरिक शस्त्र पूजा का हिस्सा बताया, जबकि अन्य ने भीड़ के आसपास राइफल से फायरिंग को खतरनाक बताया।
ASP कीर्तन राठौर का वीडियो भी आया सामने
राजनांदगांव में यह मामला केवल पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा तक सीमित नहीं रहा। इसी आयोजन का एक अन्य वीडियो सामने आया, जिसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर भी AK-47 राइफल से फायरिंग करते दिखाई दिए। इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या शस्त्र पूजा के दौरान फायरिंग की यह गतिविधि केवल एक अधिकारी ने की थी या विभाग के दूसरे अधिकारी भी इसमें शामिल थे। विभिन्न जिलों से सामने आए वीडियो ने इस मामले का दायरा और बढ़ा दिया।
रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग समेत कई जिलों से वीडियो
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राजनांदगांव के अलावा छत्तीसगढ़ के कई जिलों में विजयादशमी पर शस्त्र पूजा के बाद हथियारों से फायरिंग की गई। इनमें रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, दुर्ग, कबीरधाम और बस्तर से जुड़े वीडियो भी सामने आए हैं।कुछ वीडियो में पुलिस अधिकारी राइफल से हवा में फायरिंग करते दिखाई दिए हैं। हालांकि, इन सभी वीडियो की परिस्थितियां, इस्तेमाल हुए कारतूसों का प्रकार और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं एक जैसी थीं या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। इसके बावजूद कई जिलों में एक जैसी दिखने वाली गतिविधियों के बाद केवल एक अधिकारी को नोटिस जारी होने से विभागीय कार्रवाई की एकरूपता पर सवाल उठ रहे हैं।
पुलिस मुख्यालय ने अंकिता शर्मा को भेजा नोटिस
छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय ने 22 अक्टूबर को राजनांदगांव की एसपी अंकिता शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया। राजनांदगांव रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अजय यादव ने नोटिस की पुष्टि करते हुए बताया कि फायरिंग से जुड़े वीडियो और हथियारों के इस्तेमाल के नियमों को ध्यान में रखते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया है। उन्होंने कहा कि अंकिता शर्मा का जवाब मिलने के बाद उसे अपनी टिप्पणी के साथ वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा जाएगा। इसके बाद विभाग आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा। यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी केवल नोटिस जारी हुआ है। अंकिता शर्मा को किसी विभागीय जांच में अंतिम रूप से दोषी ठहराए जाने या उनके खिलाफ सजा निर्धारित होने की पुष्टि नहीं हुई है।
बाकी अधिकारियों को नोटिस क्यों नहीं?
इस विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू अन्य जिलों में हुई फायरिंग पर कार्रवाई का सवाल है। 23 अक्टूबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया गया कि अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी नहीं किए गए हैं। अधिकारी के अनुसार, अंकिता शर्मा का वीडियो सोशल मीडिया पर अधिक वायरल होने और पुलिस की छवि पर नकारात्मक असर पड़ने के कारण उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया। इस बयान के बाद यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठता है कि विभागीय कार्रवाई का आधार केवल वीडियो का वायरल होना होना चाहिए या फिर संबंधित नियमों का पालन सभी मामलों में एक समान जांचा जाना चाहिए। हालांकि, दूसरे मामलों की जांच न होने या सभी अधिकारियों द्वारा समान नियमों का उल्लंघन किए जाने का निष्कर्ष निकालना अभी उचित नहीं होगा।
शस्त्र पूजा की परंपरा और पुलिस नियमों में क्या अंतर?
विजयादशमी के अवसर पर शस्त्र पूजा की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। कई पुलिस इकाइयों में भी इस अवसर पर हथियारों और वाहनों की पूजा की जाती है। लेकिन शस्त्र पूजा करना और हथियारों से फायरिंग करना दो अलग गतिविधियां हैं। सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी आरके विज ने इस मामले में कहा कि शस्त्र पूजा की परंपरा में हथियार चलाना अनिवार्य नहीं है। उनके अनुसार, फायरिंग केवल सुरक्षित स्थानों पर और आवश्यक सावधानियों के साथ ही की जानी चाहिए। यहां विवाद किसी अधिकारी के पहनावे से अधिक हथियारों के सुरक्षित इस्तेमाल और निर्धारित प्रक्रियाओं के पालन का है।
क्या असली गोलियां चलाई गई थीं?
वायरल वीडियो के बाद यह सवाल भी सामने आया कि फायरिंग में वास्तविक गोलियों का इस्तेमाल हुआ था या आवाज करने वाले कारतूसों का। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, राज्य में शस्त्र पूजा के दौरान कभी-कभी 'आवाजी कारतूस' यानी ब्लैंक राउंड का उपयोग किया जाता है। अधिकारी ने दावा किया कि ऐसे आयोजनों में वास्तविक गोलियों का इस्तेमाल नहीं होता। हालांकि, अंकिता शर्मा और दूसरे अधिकारियों के वीडियो में इस्तेमाल हुए कारतूसों की तकनीकी पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। ब्लैंक कारतूस में सामान्य गोली नहीं निकलती, लेकिन हथियार के मुंह से गर्म गैस और अन्य पदार्थ निकल सकते हैं। इसलिए ऐसी फायरिंग भी सुरक्षा नियमों के अनुसार ही की जानी चाहिए।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भी दी प्रतिक्रिया
मामले के सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव से भी इस विवाद को लेकर सवाल किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय का संज्ञान लेगी। इसके बाद पुलिस मुख्यालय की ओर से अंकिता शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी होने की पुष्टि हुई। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग मामले को केवल राजनांदगांव तक सीमित रखता है या अन्य जिलों से सामने आए वीडियो की परिस्थितियों का भी परीक्षण करता है।
परंपरा से बड़ा सवाल सार्वजनिक सुरक्षा का
शस्त्र पूजा से जुड़ी यह घटना अब केवल एक वायरल वीडियो का विषय नहीं रह गई है। इस मामले में तीन सवाल प्रमुखता से सामने आए हैं, क्या आयोजन के दौरान हथियारों के इस्तेमाल के निर्धारित नियमों का पालन किया गया, क्या सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था थी और क्या सभी संबंधित मामलों में विभाग एक समान मानदंड अपनाएगा? अंकिता शर्मा के जवाब और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्णय के बाद विभागीय कार्रवाई की दिशा स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल इस विवाद ने पुलिस बल में अनुशासन, परंपरा और हथियारों के सुरक्षित उपयोग के बीच संतुलन की आवश्यकता को फिर रेखांकित किया है।
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