छत्तीसगढ़

पिस्टल और एयरगन में उलझी पुलिस! राजनांदगांव में हथियार की पहचान पर उठे सवाल

SHIDDHANT
9 Oct 2026 11:54 PM IST
पिस्टल और एयरगन में उलझी पुलिस! राजनांदगांव में हथियार की पहचान पर उठे सवाल
x
रायपुर/राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में हाल ही में सामने आई कथित गोलीबारी की घटना को लेकर पुलिस अधिकारियों के अलग-अलग बयानों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में जब्त किए गए हथियार की पहचान को लेकर कोतवाली थाना पुलिस और नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) के कथित बयानों में विरोधाभास सामने आया है। जहां कोतवाली पुलिस हथियार को पिस्टल बता रही है, वहीं सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी ने इसे एयरगन बताया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर घटना में इस्तेमाल किया गया हथियार पिस्टल था या एयरगन?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजनांदगांव में गोलीबारी से जुड़ी एक घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी। इस दौरान एक हथियार जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई। हालांकि, हथियार की प्रकृति को लेकर पुलिस अधिकारियों के अलग-अलग कथित बयानों से स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। बताया जा रहा है कि कोतवाली थाना पुलिस ने जब्त हथियार को पिस्टल बताया, जबकि क्षेत्र के सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी ने इसे एयरगन कहा। दोनों बयानों में अंतर होने के कारण पुलिस की जांच प्रक्रिया और अधिकारियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
इस मामले में पीड़ित की ओर से पुलिस को शिकायत दिए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों, घटना की परिस्थितियों और दर्ज प्रकरण की धाराओं के संबंध में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। पिस्टल और एयरगन की पहचान में अंतर महत्वपूर्ण माना जाता है। दोनों हथियारों की कार्यप्रणाली अलग होती है। सामान्य तौर पर पिस्टल में कारतूस के माध्यम से गोली चलाई जाती है, जबकि एयरगन में संपीड़ित हवा या गैस के दबाव से प्रोजेक्टाइल छोड़ा जाता है। हालांकि, किसी विशेष हथियार की वास्तविक श्रेणी उसकी तकनीकी बनावट और परीक्षण के आधार पर ही निर्धारित की जा सकती है।
ऐसे मामलों में जब्त हथियार की तकनीकी जांच महत्वपूर्ण होती है। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि हथियार किस प्रकार का है और उसकी कार्यप्रणाली क्या है। जांच के निष्कर्ष घटना की परिस्थितियों को समझने में भी सहायक हो सकते हैं। राजनांदगांव के इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पुलिस ने हथियार जब्त किया है, तो उसकी पहचान को लेकर अलग-अलग जानकारी क्यों सामने आ रही है। क्या अधिकारियों के पास अलग-अलग स्तर की जानकारी थी या फिर हथियार की तकनीकी जांच पूरी होने से पहले बयान दिए गए? इन सवालों का जवाब पुलिस की आधिकारिक स्पष्टता के बाद ही मिल सकेगा।
पुलिस अधिकारियों के कथित विरोधाभासी बयानों के कारण विभागीय समन्वय और प्रशिक्षण को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, केवल बयानों में अंतर होने से प्रशिक्षण में कमी या जांच में लापरवाही साबित नहीं होती। जरूरी है कि पुलिस विभाग जब्त हथियार की तकनीकी जांच के आधार पर उसकी वास्तविक पहचान स्पष्ट करे। साथ ही घटना से संबंधित तथ्यों और जांच की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी सार्वजनिक की जाए, ताकि किसी तरह का भ्रम न रहे।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में हथियार की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट या पुलिस की ओर से जारी अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष का उल्लेख नहीं है। ऐसे में यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि जब्त हथियार पिस्टल है या एयरगन। अब इस मामले में पुलिस की आधिकारिक रिपोर्ट और तकनीकी जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। इन्हीं के आधार पर हथियार की पहचान और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
Next Story