छत्तीसगढ़

डिजिटल अरेस्ट से डीपफेक तक बनाएं फिल्म रायगढ़ पुलिस ने शुरू की प्रतियोगिता

Shantanu Roy
10 Sept 2026 3:05 PM IST
डिजिटल अरेस्ट से डीपफेक तक बनाएं फिल्म रायगढ़ पुलिस ने शुरू की प्रतियोगिता
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Raigarh. रायगढ़। साइबर अपराध के लगातार बदलते तरीकों और बढ़ते मामलों के बीच रायगढ़ पुलिस ने लोगों को जागरूक करने के लिए अभिनव पहल की है। जिला पुलिस ने “साइबर जागृति अभियान” के अंतर्गत साइबर अपराध जागरूकता लघु फिल्म प्रतियोगिता की घोषणा की है। प्रतियोगिता की थीम लाइन “संकल्प: साइबर क्राइम मुक्त छत्तीसगढ़” रखी गई है। इसमें फिल्मकारों से लेकर विद्यार्थियों, युवाओं, कंटेंट क्रिएटर्स, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों तक को भाग लेने का अवसर मिलेगा। खास बात यह है कि मोबाइल फोन से बनाई गई फिल्मों को भी स्वीकार किया जाएगा और उन्हें विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रतियोगिता का उद्देश्य रचनात्मक फिल्मों और प्रभावशाली कहानियों के माध्यम से साइबर अपराध के तरीकों, उनके दुष्परिणामों, खतरे के संकेतों, बचाव के उपायों और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाना है।

अभियान में रोटरी क्लब रायगढ़ एवं अन्य संस्थानों का सहयोग रहेगा, जबकि प्रतियोगिता का प्रबंधन Take 3 Studios द्वारा किया जाएगा। एसएसपी रायगढ़ शशि मोहन सिंह ने प्रेसवार्ता में प्रतियोगिता की जानकारी देते हुए बताया कि डिजिटल लेन-देन और सोशल मीडिया का उपयोग तेजी से बढ़ने के साथ साइबर अपराध के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। साइबर अपराधी लोगों के भय, लालच, विश्वास, जल्दबाजी और तकनीकी जानकारी की कमी का फायदा उठाकर ठगी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध होने के बाद कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है। नागरिकों को पहले से सतर्क और जागरूक करने के साथ जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार की जानकारी देना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से लघु फिल्मों को जागरूकता का माध्यम बनाने की पहल की गई है।

डिजिटल अरेस्ट से लेकर डीपफेक तक विषय
प्रतिभागी हिंदी, अंग्रेजी और छत्तीसगढ़ी भाषा में साइबर या डिजिटल अपराध से जुड़े विषयों पर फिल्म बना सकेंगे। इसमें वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ साइबर अपराध, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी पुलिस, CBI, कस्टम या बैंक अधिकारी बनकर ठगी जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा हनीट्रैप, सेक्सटॉर्शन, ब्लैकमेल, ऑनलाइन जबरन वसूली, OTP, UPI, QR कोड, क्रेडिट-डेबिट कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग फ्रॉड को भी फिल्म का विषय बनाया जा सकता है। फिशिंग ईमेल, फर्जी SMS, कॉल और संदिग्ध लिंक के जरिए होने वाली ठगी तथा APK फाइल या अनजान मोबाइल एप डाउनलोड करवाकर किए जाने वाले फ्रॉड को भी शामिल किया गया है।

स्क्रीन शेयरिंग, रिमोट एक्सेस एप, मालवेयर, पहचान की चोरी, SIM स्वैप, सोशल मीडिया अकाउंट टेकओवर, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, ट्रोलिंग, साइबर स्टॉकिंग और डॉक्सिंग जैसे विषयों पर भी फिल्म बनाई जा सकती है। फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल, डीपफेक, मॉर्फिंग, प्रतिरूपण, फर्जी निवेश और ट्रेडिंग, क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर धोखाधड़ी, फर्जी नौकरी, वर्क फ्रॉम होम, टास्क और लोन एप घोटाले भी प्रतियोगिता के प्रमुख विषयों में शामिल हैं। महिलाओं एवं बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, रैनसमवेयर, डेटा चोरी, फेक न्यूज और डिजिटल गोपनीयता पर भी फिल्म बनाई जा सकेगी। पुलिस ने प्रतिभागियों से अपेक्षा की है कि फिल्म में केवल अपराध की घटना दिखाने तक सीमित न रहें, बल्कि साइबर ठगी के चेतावनी संकेत, उससे बचाव के तरीके और सुरक्षित रिपोर्टिंग की जानकारी भी दें।

दो श्रेणियों में होगी प्रतियोगिता
प्रतियोगिता को दो श्रेणियों में बांटा गया है। श्रेणी ‘अ’ में फिल्म की अवधि तीन मिनट से अधिक और अधिकतम छह मिनट होगी। इसमें विस्तृत कहानी, पात्रों, अपराध के तरीके, पीड़ित पर प्रभाव और समाधान को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है। इस श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को एक लाख रुपये, द्वितीय स्थान पर 75 हजार रुपये और तृतीय स्थान पर 50 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। श्रेणी ‘ब’ में अधिकतम तीन मिनट की फिल्म या रील स्वीकार की जाएगी। इसमें किसी स्पष्ट घटना, प्रभावशाली चेतावनी या संक्षिप्त जन-जागरूकता संदेश को प्रस्तुत किया जा सकता है। इस श्रेणी में प्रथम पुरस्कार 75 हजार, द्वितीय पुरस्कार 50 हजार और तृतीय पुरस्कार 25 हजार रुपये रखा गया है।

24 सितंबर तक भेज सकेंगे प्रविष्टि
प्रतियोगिता में प्रविष्टि जमा करने की अंतिम तारीख 24 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। परिणाम 27 सितंबर 2026 को घोषित किए जाएंगे और परिणाम का आयोजन रायगढ़ के ऑडिटोरियम में होगा। प्रतियोगिता में भेजी जाने वाली फिल्म मौलिक होनी चाहिए। फिल्म में इस्तेमाल संगीत, दृश्य, चित्र और अन्य सामग्री के आवश्यक अधिकार प्रतिभागी के पास होने चाहिए। संवेदनशील मामलों में पीड़ित की पहचान और व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। निर्णायक मंडल का फैसला अंतिम और मान्य होगा। चयनित फिल्मों का इस्तेमाल भविष्य में साइबर अपराध के खिलाफ जन-जागरूकता और सोशल मीडिया प्रचार के लिए भी किया जा सकता है। प्रतिभागियों को अपनी फिल्म सीधे आवेदन फॉर्म में अपलोड करने की जरूरत नहीं होगी।

फिल्म को Google Drive या किसी अन्य विश्वसनीय फाइल होस्टिंग प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर उसका सक्रिय और सार्वजनिक रूप से देखने योग्य लिंक जमा किया जा सकेगा। प्रतियोगिता में भाग लेने और विस्तृत जानकारी के लिए filmotsav.org पर जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए संपर्क नंबर 8817420420 और ईमेल [email protected] भी जारी किया गया है। रायगढ़ पुलिस ने युवाओं, विद्यार्थियों, फिल्मकारों, कंटेंट क्रिएटर्स और जागरूक नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में प्रतियोगिता में शामिल होने की अपील की है। पुलिस का संदेश है कि जागरूकता पर बनाई गई एक छोटी सी फिल्म भी किसी व्यक्ति को साइबर ठगी से होने वाली बड़ी आर्थिक या मानसिक क्षति से बचा सकती है।
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