छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में हिरासत में श्रवण की मौत पर SC सख्त, CBI जांच के आदेश
Shantanu Roy
12 Aug 2026 9:57 PM IST

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New Delhi. नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ में 34 वर्षीय श्रवण की हिरासत में हुई मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बड़ा आदेश दिया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का निर्देश दिया। अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार को मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में पुलिस द्वारा FIR दर्ज करने में हुई दो साल से अधिक की देरी को गंभीरता से लिया। अदालत ने कहा कि न्याय के हित में मामले की स्वतंत्र जांच जरूरी है। कोर्ट ने CBI को जांच तेजी से पूरी करने और अपनी रिपोर्ट अगली सुनवाई पर पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को होगी।
दो साल से ज्यादा की देरी पर सवाल
मामला श्रवण की जनवरी 2024 में हुई मौत से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक श्रवण को 18 जनवरी 2024 को कथित तौर पर 1,200 रुपये की शराब रखने के मामले में हिरासत में लिया गया था। इसके बाद 21 जनवरी 2024 को अस्पताल में उसकी मौत हो गई। मामले की न्यायिक जांच जुलाई 2024 में सामने आई थी। रिपोर्ट में हिरासत के दौरान सिर में लगी चोट को मौत से जोड़ते हुए गंभीर तथ्य सामने आए थे। इसके बावजूद पुलिस स्तर पर FIR दर्ज करने में लंबी देरी हुई। रिपोर्टों के अनुसार FIR आखिरकार 30 जुलाई 2026 को दर्ज की गई। सुप्रीम कोर्ट ने इसी देरी को गंभीरता से लेते हुए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की जरूरत महसूस की।
CBI को वरिष्ठ अधिकारी के नेतृत्व में जांच
सुप्रीम कोर्ट ने CBI को मामले में नियमित आपराधिक मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपने और इसे तेजी से पूरा करने को कहा गया है। CBI की जांच में उन राज्य अधिकारियों के आचरण को भी शामिल किया जाएगा, जिन्होंने न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद उचित कदम नहीं उठाए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि जांच में यदि कोई अधिकारी हिरासत में हिंसा के लिए जिम्मेदार पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई और अभियोजन किया जाए। इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने केवल श्रवण की मौत की परिस्थितियों की जांच तक मामला सीमित नहीं रखा, बल्कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच के निर्देश दिए हैं।
परिवार को 25 लाख रुपये अंतरिम राहत
सुप्रीम कोर्ट ने मृतक के परिवार को तत्काल राहत देते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को 25 लाख रुपये अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अंतरिम राशि है और अंतिम मुआवजे का निर्धारण मुख्य याचिका पर फैसला करते समय किया जाएगा। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार राशि चार सप्ताह के भीतर परिवार के खाते में जमा करनी है। अदालत के समक्ष यह तथ्य भी रखा गया कि श्रवण अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था और उसकी मौत हिरासत में हुई हिंसा के कारण अप्राकृतिक परिस्थितियों में हुई। राज्य की ओर से इन निष्कर्षों को चुनौती नहीं दी गई, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम मुआवजे का निर्देश दिया।
DGP को रिकॉर्ड CBI को सौंपने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक को मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड एक सप्ताह के भीतर CBI निदेशक को सौंपने का निर्देश दिया है। इससे जांच एजेंसी को न्यायिक जांच और पुलिस कार्रवाई से संबंधित दस्तावेजों तक जल्द पहुंच मिल सकेगी। CBI को अपनी जांच की प्रगति रिपोर्ट 13 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखने को कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब श्रवण की हिरासत में मौत की परिस्थितियों, पुलिस कार्रवाई में हुई देरी और न्यायिक जांच के बाद भी FIR दर्ज नहीं किए जाने की वजहों की स्वतंत्र जांच होगी। साथ ही यह भी सामने आएगा कि घटना के लिए कौन जिम्मेदार था और संबंधित अधिकारियों की भूमिका क्या रही। मामले में अब जांच का जिम्मा CBI के पास है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य पुलिस को सभी संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड जांच एजेंसी को उपलब्ध कराने होंगे। अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी, जब CBI की जांच की प्रगति अदालत के सामने रखी जाएगी।
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