छत्तीसगढ़

बाल सुरक्षा को लेकर विशेष अभियान, स्कूलों में न्यायाधीशों ने दी कानूनी जानकारी

Shantanu Roy
27 Oct 2026 7:56 PM IST
बाल सुरक्षा को लेकर विशेष अभियान, स्कूलों में न्यायाधीशों ने दी कानूनी जानकारी
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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बच्चों को उनके अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा और कानूनी संरक्षण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से 'सुरक्षित बचपन अभियान' के तहत विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर की पहल पर मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को लगभग 14 विद्यालयों में 28 न्यायाधीशों ने पहुंचकर विद्यार्थियों को पॉक्सो एक्ट सहित विभिन्न कानूनी विषयों की जानकारी दी। अभियान का मुख्य संदेश 'हर बच्चे का बचपन, हम सबकी जिम्मेदारी है' रखा गया है। इस पहल के माध्यम से बच्चों को शोषण से बचाव, ऑनलाइन सुरक्षा, शिकायत करने की प्रक्रिया और निःशुल्क कानूनी सहायता के बारे में जागरूक किया जा रहा है।

10 अक्टूबर से शुरू हुआ सुरक्षित बचपन अभियान
जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली के कार्यपालक अध्यक्ष द्वारा 10 अक्टूबर 2026 को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 यानी पॉक्सो एक्ट के संबंध में अखिल भारतीय विद्यालय जागरूकता अभियान 'सुरक्षित बचपन अभियान' का शुभारंभ किया गया था। इस अभियान का उद्देश्य स्कूली बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों की जानकारी देना है। बच्चों को यह समझाया जा रहा है कि किसी भी प्रकार के शोषण, उत्पीड़न या असुरक्षित परिस्थिति में वे किस तरह सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

प्रधान जिला न्यायाधीश ने गठित की समन्वय समिति
रायपुर के प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष बलराम प्रसाद वर्मा ने अभियान के प्रभावी संचालन के लिए जिला स्तरीय समन्वय समिति का गठन किया है। इस समिति में जिला शिक्षा अधिकारी, बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग और साइबर क्राइम विभाग को शामिल किया गया है। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर बच्चों तक सुरक्षा और कानूनी सहायता की जानकारी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

26 से 31 अक्टूबर तक स्कूलों में विशेष कार्यक्रम
अभियान के प्रथम चरण के अंतर्गत 26 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक रायपुर और गरियाबंद जिले के चयनित विद्यालयों में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन कार्यक्रमों में न्यायिक अधिकारियों की उपस्थिति भी सुनिश्चित करने को कहा गया है। अभियान के अंतर्गत बच्चों को 'मेरा बचपन, मेरा अधिकार', 'कानून जानो, बचपन बचाओ', 'सुरक्षित क्लिक, सुरक्षित बचपन', 'बोलो, बताओ, बचाओ', 'न बाल विवाह, न बाल शोषण' तथा 'जागरूक बचपन, सशक्त भारत' जैसे संदेशों के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है।

नुक्कड़ नाटक, प्रश्नोत्तरी और पेंटिंग से मिलेगी जानकारी
सुरक्षित बचपन अभियान को बच्चों के लिए रुचिकर और प्रभावशाली बनाने के उद्देश्य से विद्यालयों में विभिन्न गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। रायपुर जिले के विधि महाविद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों तथा विधि विद्यार्थियों के सहयोग से नुक्कड़ नाटक, प्रश्नोत्तरी, ड्राइंग और पेंटिंग जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को उनके अधिकारों के साथ-साथ सुरक्षित इंटरनेट उपयोग और आवश्यकता पड़ने पर सहायता मांगने के तरीकों के बारे में बताया जाएगा।

बाल मनोविज्ञान विशेषज्ञ भी करेंगे जागरूक
अभियान में महिला एवं बाल विकास विभाग से पॉक्सो पीड़ितों के सपोर्ट पर्सन, किशोर न्याय बोर्ड के सदस्यों, बाल कल्याण समिति के सदस्यों और बाल मनोविज्ञान विशेषज्ञों को रिसोर्स पर्सन के रूप में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। इन विशेषज्ञों की सहायता से बच्चों को उनकी उम्र और समझ के अनुरूप संवेदनशील विषयों की जानकारी प्रदान की जाएगी। प्रधान जिला न्यायाधीश बलराम प्रसाद वर्मा ने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए निरंतर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर दिया है। उन्होंने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देशित किया है कि निर्धारित अभियान अवधि समाप्त होने के बाद भी विद्यालयों में बच्चों की मानसिक, बौद्धिक और कानूनी जागरूकता बढ़ाने के प्रयास जारी रखे जाएं। 27 अक्टूबर को रायपुर के लगभग 14 विद्यालयों में 28 न्यायाधीशों द्वारा आयोजित विधिक जागरूकता कार्यक्रम इसी अभियान का हिस्सा रहे।
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