छत्तीसगढ़
क्रमोन्नत वेतनमान की मांग पर शिक्षकों को हाईकोर्ट से झटका, 25 शिक्षकों की याचिका खारिज
Shantanu Roy
17 July 2026 10:15 PM IST

x
छग
Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन से पहले पंचायत विभाग के अंतर्गत शिक्षा कर्मी के रूप में कार्यरत रहे शिक्षकों को बिलासपुर हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने क्रमोन्नत वेतनमान और समयमान वेतनमान की मांग को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविलियन से पहले पंचायत कैडर में दी गई सेवा अवधि के आधार पर राज्य शासन के वर्ष 2017 के सर्कुलर के तहत क्रमोन्नति वेतनमान का दावा नहीं किया जा सकता।
छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सूरजपुर जिले के विभिन्न स्कूलों में पदस्थ विपिन कुमार चौबे सहित 25 शिक्षकों द्वारा दायर रिट अपील पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सिंगल बेंच के उस निर्णय को सही ठहराया, जिसमें शिक्षकों की क्रमोन्नत वेतनमान संबंधी मांग को अस्वीकार किया गया था। मामला सूरजपुर जिले के भैयाथान, रामानुजनगर, प्रतापपुर और ओड़गी विकासखंड के शासकीय माध्यमिक एवं प्राथमिक स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों और प्रधान पाठकों से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील करते हुए मांग की थी कि उन्हें संविलियन से पहले की सेवा अवधि को जोड़कर क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ दिया जाए।
शिक्षकों ने 2017 के सर्कुलर का दिया था हवाला
याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी 10 मार्च 2017 के सर्कुलर के अनुसार 10 वर्ष और 20 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को प्रथम और द्वितीय क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ दिया जाना चाहिए। शिक्षकों ने अपनी याचिका में सोना साहू प्रकरण में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय का भी हवाला दिया था। उन्होंने समानता के आधार पर मांग की थी कि उन्हें भी क्रमोन्नत वेतनमान का लाभ दिया जाए। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने लंबे समय तक शिक्षा विभाग में सेवाएं दी हैं और संविलियन के बाद उन्हें नियमित शासकीय कर्मचारी का दर्जा मिला है। इसलिए संविलियन से पहले की सेवा अवधि को भी वेतनमान लाभ के लिए शामिल किया जाना चाहिए।
राज्य शासन ने किया विरोध
राज्य शासन की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल प्रसून भादुड़ी ने पक्ष रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं का मामला पहले से तय हो चुके मामलों के समान है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि संविलियन से पहले सभी शिक्षक पंचायत विभाग के अंतर्गत शिक्षा कर्मी के रूप में कार्यरत थे। शासन की ओर से तर्क दिया गया कि शिक्षा कर्मियों की सेवा शर्तें छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 और पंचायत नियमों के तहत नियंत्रित होती थीं। वे राज्य सरकार के नियमित कर्मचारियों के नियमों के अंतर्गत नहीं आते थे। राज्य शासन ने कहा कि सामान्य प्रशासन विभाग का 10 मार्च 2017 का सर्कुलर केवल नियमित शासकीय कर्मचारियों पर लागू होता है। पंचायत कैडर में कार्यरत शिक्षा कर्मियों पर इसका लाभ नहीं दिया जा सकता।
संविलियन आदेश का भी दिया गया हवाला
सुनवाई के दौरान शासन ने 30 जून 2018 के संविलियन आदेश की शर्तों का भी उल्लेख किया। शासन ने बताया कि संविलियन आदेश की कंडिका 4 और 5 में स्पष्ट किया गया था कि सेवा लाभों की गणना 1 जुलाई 2018 से की जाएगी। इसके अलावा संविलियन से पहले की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के एरियर या अन्य सेवा लाभ की पात्रता नहीं होगी। इसी आधार पर शासन ने शिक्षकों की मांग को गलत बताया।
हाईकोर्ट ने माना पंचायत और नियमित सेवा में अंतर
डिवीजन बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि पंचायत विभाग और नियमित शासकीय सेवा के बीच स्पष्ट अंतर है। संविलियन से पहले शिक्षा कर्मियों की सेवा शर्तें अलग नियमों के तहत संचालित होती थीं। कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2017 का सर्कुलर नियमित शासकीय शिक्षकों पर लागू होता है, जबकि याचिकाकर्ता उस समय पंचायत कैडर के अंतर्गत कार्यरत थे। इसलिए उन्हें उस अवधि के आधार पर क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने सोना साहू प्रकरण के संबंध में भी कहा कि वह मामला विशेष परिस्थितियों पर आधारित था। उस निर्णय को पंचायत कैडर के सभी शिक्षकों पर सामान्य नियम के रूप में लागू नहीं किया जा सकता।
25 शिक्षकों की याचिका हुई खारिज
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को सही ठहराते हुए शिक्षकों की रिट अपील को खारिज कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद संविलियन से पहले शिक्षा कर्मी रहे शिक्षकों को क्रमोन्नत वेतनमान के लिए पंचायत सेवा अवधि का लाभ नहीं मिलेगा। इस फैसले को स्कूल शिक्षा विभाग में सेवा लाभों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाईकोर्ट के निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि संविलियन से पहले की पंचायत कैडर सेवा और नियमित शासकीय सेवा के बीच अंतर को ध्यान में रखते हुए ही वेतनमान संबंधी लाभ तय किए जाएंगे।
Tagsबिलासपुर हाईकोर्ट फैसलाशिक्षकों की याचिका खारिजक्रमोन्नत वेतनमान मामलाशिक्षा कर्मी संविलियनछत्तीसगढ़ शिक्षकविपिन कुमार चौबेस्कूल शिक्षा विभागपंचायत कैडर शिक्षकसमयमान वेतनमानहाईकोर्ट डिवीजन बेंचBilaspur High Court decisionteachers' petition rejectedpromotion pay scale caseeducation worker mergerChhattisgarh teacherVipin Kumar ChoubeySchool Education DepartmentPanchayat cadre teachertime scale pay scaleHigh Court Division Bench
Next Story





