छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के 3 निजी मेडिकल कॉलेजों पर अतिरिक्त फीस वसूली का आरोप, FIR की मांग
Shantanu Roy
19 Oct 2026 6:44 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के निजी मेडिकल कॉलेजों में विद्यार्थियों से निर्धारित फीस से अधिक राशि वसूलने और अतिरिक्त रकम वापस नहीं करने का मामला सामने आया है। इस संबंध में शिकायतकर्ता निश्चय वाजपेयी ने रायपुर पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत सौंपकर तीन निजी मेडिकल कॉलेजों के संचालकों, प्रबंधन और फीस वसूली के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि राज्य की प्रवेश तथा फीस विनियामक समिति के निर्णय और चिकित्सा शिक्षा विभाग के आदेश के बावजूद विद्यार्थियों को अतिरिक्त फीस वापस नहीं की गई है। शिकायतकर्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
तीन निजी मेडिकल कॉलेजों पर लगे गंभीर आरोप
शिकायत में छत्तीसगढ़ के तीन निजी मेडिकल कॉलेजों का उल्लेख किया गया है। इनमें श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, जुनवानी, भिलाई; रायपुर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, भनसोज, ग्राम गोढ़ी, रायपुर और श्री बालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, मोवा, रायपुर शामिल हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन संस्थानों द्वारा विद्यार्थियों से निर्धारित फीस से अधिक रकम वसूली गई, लेकिन संबंधित आदेश जारी होने के बावजूद अतिरिक्त राशि वापस नहीं की गई।
प्रति विद्यार्थी चार लाख से अधिक फीस वापसी का दावा
शिकायत में प्रत्येक मेडिकल कॉलेज के लिए प्रति विद्यार्थी अतिरिक्त फीस वापसी की अलग-अलग राशि बताई गई है।
मेडिकल कॉलेज प्रति विद्यार्थी कथित वापसी राशि
श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, भिलाई ₹4,43,173
रायपुर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, रायपुर ₹4,53,593
श्री बालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, रायपुर ₹4,58,222
ये आंकड़े शिकायत में किए गए दावों पर आधारित हैं। संबंधित कॉलेजों से वसूली गई वास्तविक अतिरिक्त राशि और वापसी की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
एक महीने में फीस लौटाने के आदेश का हवाला
शिकायतकर्ता ने राज्य शासन द्वारा गठित प्रवेश तथा फीस विनियामक समिति के 3 अप्रैल 2025 के निर्णय और चिकित्सा शिक्षा विभाग के 23 सितंबर 2025 के आदेश का हवाला दिया है। शिकायत के मुताबिक, संबंधित विद्यार्थियों को एक महीने के भीतर अतिरिक्त फीस वापस करने तथा निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ राशि लौटाने का प्रावधान बताया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आदेश की जानकारी होने के बावजूद संबंधित संस्थानों ने विद्यार्थियों की अतिरिक्त फीस वापस नहीं की।
भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में जांच की मांग
निश्चय वाजपेयी ने पुलिस कमिश्नर से मामले की परिस्थितियों की जांच कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 308, 316 और 223 सहित अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई करने की मांग की है। शिकायत में विद्यार्थियों से प्राप्त अतिरिक्त राशि के इस्तेमाल, फीस वसूली की प्रक्रिया और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कराने का अनुरोध भी किया गया है। हालांकि, शिकायत में किसी धारा का उल्लेख होने मात्र से अपराध सिद्ध नहीं होता। आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए आवश्यक कानूनी तत्वों और साक्ष्यों की जांच जरूरी होगी।
वर्तमान शैक्षणिक सत्र में भी अधिक फीस वसूली का आरोप
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि पूर्व में समिति के निर्णय और शासन के आदेश जारी होने के बावजूद वर्तमान शैक्षणिक सत्र में भी निर्धारित फीस से अधिक राशि वसूलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। शिकायतकर्ता ने इसे विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के आर्थिक हितों से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।
पुलिस जांच और कॉलेज प्रबंधन के पक्ष का इंतजार
शिकायतकर्ता ने संबंधित संस्थानों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी निर्धारित करने की मांग की है। फिलहाल शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज होने या पुलिस द्वारा किसी कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। संबंधित मेडिकल कॉलेजों के प्रबंधन का पक्ष भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आरोपों की सत्यता, फीस वापसी की वास्तविक स्थिति और संभावित कानूनी जवाबदेही जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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