छत्तीसगढ़
आर्टिफिशियल ज्वैलरी निर्माण का प्रशिक्षण, स्वरोजगार के गुर सीख रहीं 35 से अधिक महिलाएं व बालिकाएं
Shantanu Roy
22 Jun 2026 10:57 PM IST

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Gariaband. गरियाबंद। रूरल सेल्फ इंप्लॉयमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (ग्रामीण स्वरोजगार विकास संस्थान) गरियाबंद एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में ग्राम पंचायत सढ़ौली में आर्टिफिशल ज्वैलरी मेकिंग का प्रशिक्षण आरसेटी द्वारा दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण केवल 14 दिनों का है, जिसमें 10 दिन में थ्योरी के साथ साथ प्रैक्टिकल भी कराया जाता है। 4 दिन उनके सिखे हुए कार्यों का मूल्यांकन किया जाता है। जिसमें ट्रेनी को उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत मार्केटिंग प्रबंधन, बैंकिंग, सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं के समस्या का समाधान के विषय में डिजिटल मार्केटिंग का प्रशिक्षण दिया गया। जिसे खेल गतिविधि के माध्यम से सरलता से सिखाया जा रहा है। जैसे खेल प्रबंधन के लिए रिंग टाय गेम, आत्मनिर्भरता के लिए सामूहिक टॉवर निर्माण गेम, उत्पाद के गुणवत्ता व समय प्रबंधन करने के लिए नाव विधि का प्रयोग कर विभिन्न गतिविधियां कराई जा रही है। गांव के ही 35 से अधिक महिलाएं एवं बालिका प्रशिक्षण ले रहे है, जहां उन्हें मुख्य रूप से झुमके 5 प्रकार के टॉप्स, बाली, डेकोरेटिव समान जैसे तोरण, झूमर, चूड़ी, करवाचौथ की सजावटी थाली एवं चन्नी, ब्रेसलेट, राधा रानी गले का सेट, मांगटीका, जन्मदिन और विशेष अवसर पर सर में पहनने वाले टियारा, डेकोरेटिव हेयर क्लिप, बाल संवारने वाला जुड़ा, गले के मोतियों से बना हार बनाया जा रहा है।
इस दौरान प्रशिक्षाणार्थी योगिता शांडिल्य ने बताया कि रूरल सेल्फ इंप्लॉयमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (बड़ौदा स्वरोजगार विकास संस्थान) एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 14 दिवसीय आर्टिफिशियल ज्वैलरी मेकिंग प्रशिक्षण में सहभागिता कर स्वरोजगार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने विभिन्न प्रकार की आर्टिफिशियल ज्वैलरी एवं सजावटी सामग्री निर्माण का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया। इसके अंतर्गत झुमके, टॉप्स, बाली, ब्रेसलेट, मांगटीका, गले के सेट, मोतियों के हार, टियारा, हेयर क्लिप, झूमर, तोरण तथा अन्य सजावटी वस्तुओं का निर्माण करना सीखा। प्रशिक्षण में सिद्धांत एवं प्रायोगिक दोनों पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया। ज्वैलरी निर्माण के तकनीकी प्रशिक्षण के साथ-साथ उन्हें उद्यमिता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत विपणन प्रबंधन, बैंकिंग सेवाओं, डिजिटल मार्केटिंग तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी भी प्रदान की गई। खेल आधारित गतिविधियों के माध्यम से समय प्रबंधन, गुणवत्ता प्रबंधन, नेतृत्व क्षमता तथा सामूहिक कार्य संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषयों को सरल एवं प्रभावी ढंग से समझाया गया। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण से उन्हें न केवल नया कौशल प्राप्त हुआ है, बल्कि स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने का आत्मविश्वास भी मिला है। वे भविष्य में आर्टिफिशियल ज्वैलरी निर्माण को स्वरोजगार के रूप में विकसित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कार्य करना चाहती हैं।
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