छत्तीसगढ़

हाथियों के डर से छत पर कट रही ग्रामीणों की रात

Shantanu Roy
22 Sept 2026 9:51 PM IST
हाथियों के डर से छत पर कट रही ग्रामीणों की रात
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Gariaband. गरियाबंद। मैनपुर के जंगलों से लगे गांवों में मक्का और धान की फसल आते ही हाथियों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। सिकासेर दल के 32 और चंदा दल के 9 हाथी अलग-अलग इलाकों में विचरण कर रहे हैं। करीब 17 गांवों के आसपास हाथियों की मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत है। हालात ऐसे हैं कि कच्चे मकानों में रहने वाले कई परिवार रात होते ही पड़ोस के पक्के मकानों की छतों पर बनाए गए तिरपाल के मचान में शरण ले रहे हैं। हाथी प्रभावित गांवों में पक्के मकानों की छत पर तिरपाल लगाकर बनाए गए अस्थायी तंबू ग्रामीणों के लिए रात गुजारने का सुरक्षित ठिकाना बन गए हैं। हाथियों की लोकेशन की सूचना मिलते ही बच्चों और महिलाओं को पहले इन स्थानों पर पहुंचाया जाता है।
17 गांवों के आसपास हाथियों की हलचल
इन दिनों हाथी अभयारण्य की सीमा से लगे सामान्य वन मंडल के जंगलों में बसे छिन्दौला, डंडईपानी, खोलपारा, सिहार, दबनई, फरसेरा और गिरहोला सहित आसपास के गांवों में हाथियों की आवाजाही बताई जा रही है। दो अलग-अलग दलों में 40 से ज्यादा हाथियों की मौजूदगी के कारण ग्रामीण लगातार सतर्क हैं। हाथियों के गांव की तरफ बढ़ने की जानकारी मिलने पर लोग अपनी सुरक्षा के लिए घरों से निकलकर अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जाते हैं।
फसलों के बाद घरों को भी बना रहे निशाना
ग्रामीणों के मुताबिक हाथियों का झुंड खेतों में पहुंचकर मक्का और धान की फसल को नुकसान पहुंचाता है। केले के पेड़ भी हाथियों के निशाने पर आ रहे हैं। भोजन की तलाश में हाथियों के गांवों के अंदर पहुंचने का भी खतरा बना रहता है। प्रभावित ग्रामीण संतोष राम और मनी राम के मुताबिक हाथियों के आने का कोई निश्चित समय नहीं है। हाथी कभी भी गांव की तरफ आ जाते हैं। खेतों में फसल खाने और रौंदने के बाद वे घरों में रखे महुआ और चावल की तलाश में कच्चे मकानों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी खतरे को देखते हुए प्रभावित गांवों के कई पक्के मकानों की छत पर तिरपाल लगाकर अस्थायी तंबू तैयार किए गए हैं। हाथियों के आसपास होने की सूचना मिलते ही कच्चे मकानों में रहने वाले परिवार पड़ोसियों के यहां पहुंच जाते हैं। खासतौर पर बच्चों और महिलाओं को पहले सुरक्षित स्थान पर भेजा जाता है।
अलर्ट मिलते ही सुरक्षित जगह पहुंचते हैं ग्रामीण
वन विभाग की ओर से हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। अलर्ट एप और हाथी मित्र दल के माध्यम से हाथियों की लोकेशन की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाई जाती है। सूचना मिलने के बाद ग्रामीण हाथियों के संभावित रास्तों से दूर रहने का प्रयास करते हैं। मैनपुर क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष लंबे समय से बड़ी चुनौती रहा है। जंगल से सटे गांव और खेत हाथियों के प्राकृतिक आवागमन वाले इलाकों के करीब होने के कारण फसल के मौसम में खतरा बढ़ जाता है।
नुकसान की भरपाई कर रहा वन विभाग
वन विभाग के एसडीओ राजेंद्र सोरी ने बताया कि हाथी बड़ा वन्यजीव है और उसके व्यवहार का सटीक अनुमान लगाना आसान नहीं होता। ग्रामीणों को समय पर सतर्क करने के लिए एप और विभागीय टीम काम कर रही है। एसडीओ के मुताबिक मानव-हाथी द्वंद्व में कमी आई है, लेकिन हाथियों से फसल और अन्य संपत्ति को नुकसान पहुंचने के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रभावित लोगों को क्षतिपूर्ति दी जा रही है। फिलहाल हाथियों की मौजूदगी वाले गांवों में लोगों को सतर्क किया जा रहा है। ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चिंता अपनी और परिवार की सुरक्षा है। यही वजह है कि कई परिवारों के लिए पक्के मकानों की छत पर बना तिरपाल का मचान रात गुजारने का सहारा बन गया है।
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