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कानपुर CSJMU और आकाश हर्बोफार्मिंग के बीच एमओयू, हर्बल रिसर्च और टिश्यू कल्चर को मिलेगा बढ़ावा

Gulabi Jagat
25 Jun 2026 10:09 PM IST
कानपुर CSJMU और आकाश हर्बोफार्मिंग के बीच एमओयू, हर्बल रिसर्च और टिश्यू कल्चर को मिलेगा बढ़ावा
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Kanpur: कानपुर स्थित छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (Chhatrapati Shahu Ji Maharaj University) के फार्मास्युटिकल साइंसेज स्कूल ने आकाश हर्बोफार्मिंग प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य अकादमिक क्षेत्र और उद्योग के बीच सहयोग को मजबूत करना और हर्बल विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान को नई दिशा देना है।

इस समझौते के तहत दोनों संस्थान मिलकर टिश्यू कल्चर (ऊतक संवर्धन) और हर्बल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नए शोध और विकास कार्य करेंगे। साथ ही, हर्बल उत्पादों के निर्माण, गुणवत्ता सुधार और तकनीकी नवाचार पर भी संयुक्त रूप से काम किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, यह साझेदारी छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगी। विद्यार्थियों को न केवल शैक्षणिक ज्ञान मिलेगा, बल्कि उन्हें उद्योग से जुड़े वास्तविक अनुभव और अत्याधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं का भी लाभ मिलेगा।

इस अवसर पर सीएसजेएमयू के कुलाधिपति प्रोफेसर विनय पाठक ने कहा कि यह समझौता शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और उद्योग मिलकर अब संयुक्त शोध परियोजनाओं पर काम करेंगे, जिससे नवाचार को गति मिलेगी। प्रो. पाठक ने यह भी कहा कि इस सहयोग से छात्रों के कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे वे भविष्य में उद्योग की जरूरतों के अनुसार खुद को तैयार कर सकें।

समझौते के तहत तकनीकी कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं का भी आयोजन किया जाएगा। इससे स्टार्टअप्स को भी लाभ मिलेगा और उन्हें तकनीकी सहयोग तथा मार्गदर्शन प्राप्त होगा।

फार्मेसी विभाग की निदेशक डॉ. निशा शर्मा और आकाश हर्बोफार्मिंग प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक विश्वजीत जादौन ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। कैंपस में आयोजित इस कार्यक्रम में कुलाधिपति प्रो. विनय कुमार पाठक, कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी, रजिस्ट्रार राकेश कुमार मिश्रा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और शिक्षक उपस्थित रहे। अधिकारियों का कहना है कि यह साझेदारी न केवल हर्बल विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देगी, बल्कि शिक्षा और उद्योग के बीच मजबूत सेतु भी तैयार करेगी।

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